England – वानखेड़े की उस रात इंग्लैंड ने मैच तो जीत लिया, लेकिन डर की एक नई कहानी वहीं से शुरू हो गई। चार रन की जीत, आख़िरी ओवर तक खिंचा मुकाबला और नेपाल जैसी टीम का लगातार दबाव—स्कोरबोर्ड ने भले इंग्लैंड के पक्ष में फैसला सुनाया, लेकिन क्रिकेट की समझ रखने वालों ने कुछ और ही पढ़ा। वेस्टइंडीज के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ इयान बिशप को भी वही दिखा। और उन्होंने बिना लाग-लपेट साफ कह दिया—इंग्लैंड अब डराने लगी है।
ऑस्ट्रेलिया के बाद अब इंग्लैंड भी डराती है — इयान बिशप
टी20 वर्ल्ड कप के बीच इयान बिशप की यह टिप्पणी यूं ही नहीं आई। उन्होंने इंग्लैंड की बल्लेबाज़ी ताकत को लेकर साफ चेतावनी दी है। बिशप के मुताबिक, फ्रेंचाइज़ी क्रिकेट के दौर में अनुभव और पावर का मेल सबसे घातक हथियार बन चुका है—और इंग्लैंड के पास दोनों हैं।
बिशप ने कहा कि लंबे समय तक उन्हें सिर्फ ऑस्ट्रेलिया डराती थी, लेकिन अब उसी सूची में इंग्लैंड भी आ चुकी है। वजह सीधी है—यह टीम हर वक्त बाउंड्री और छक्के की सोच के साथ खेलती है। उनके दिमाग में “सुरक्षित रन” जैसा कुछ नहीं चलता।
नेपाल मैच खराब शुरुआत या छुपी ताकत?
सवाल उठना लाज़मी है—अगर इंग्लैंड इतनी खतरनाक है, तो नेपाल के खिलाफ मैच आख़िरी गेंद तक क्यों गया?
असल में यही बिशप की बात को मज़बूत करता है। इंग्लैंड ने जब दबाव महसूस किया, तब भी उन्होंने अपना DNA नहीं बदला। 184 रन बनाए। जोखिम लिया। और फिर डेथ ओवर्स में अनुभव काम आया।
नेपाल ने 180 रन बना दिए, लेकिन जीत नहीं निकाल पाया। इंग्लैंड बच गया—और यही बड़ी टीमों की पहचान होती है।
बल्लेबाज़ी में पावर, सोच में बेरहमी
इयान बिशप के मुताबिक, इंग्लैंड की सबसे बड़ी ताकत उनका माइंडसेट है। यह टीम अब “अच्छी गेंद” जैसी अवधारणा को चुनौती देती है।
हैरी ब्रूक, जैकब बेथेल, जोस बटलर—ये खिलाड़ी ऐसे एरिया में शॉट खेल रहे हैं जहां पारंपरिक क्रिकेट में रन नहीं माने जाते थे। यही वजह है कि विपक्षी कप्तान अक्सर प्लान बनाकर भी फेल हो जाते हैं।
यह सिर्फ ताकत की बात नहीं है। यह सोच की बात है। और टी20 में सोच ही सबसे बड़ा हथियार होती है।
गेंदबाज़ी में धार लौट आई है
बिशप ने सिर्फ बल्लेबाज़ी की नहीं, इंग्लैंड की गेंदबाज़ी की भी खुलकर तारीफ की। खास तौर पर जोफ्रा आर्चर की वापसी को उन्होंने गेम-चेंजर बताया।
उनके मुताबिक, आर्चर के आने से इंग्लैंड की गेंदबाज़ी में वह धार लौट आई है, जिसकी कमी पिछले कुछ समय से दिख रही थी। इसके साथ आदिल राशिद का अनुभव आज भी उतना ही प्रभावी है।
जैकब बेथेल जैसे युवा खिलाड़ी गेंद और बल्ले—दोनों से टीम को विकल्प देते हैं। यही बैलेंस इंग्लैंड को खतरनाक बनाता है।
नेपाल ने डर दिखाया, लेकिन डराया नहीं
इस मैच में नेपाल की भूमिका भी कम नहीं थी। उन्होंने दिखाया कि इंग्लैंड को परेशान किया जा सकता है। लोकेश बाम की 20 गेंदों में नाबाद 39 रन की पारी ने इंग्लैंड की धड़कनें तेज कर दी थीं।
आख़िरी ओवर में 10 रन चाहिए थे। स्टेडियम में शोर था। लेकिन सैम करन ने अनुभव दिखाया। लगातार यॉर्कर। कोई बाउंड्री नहीं।
यहीं फर्क पड़ा—बड़ी टीम और उभरती टीम के बीच।
इंग्लैंड क्यों डराने वाली टीम है?
इयान बिशप की बातों को अगर एक लाइन में समेटें, तो जवाब साफ है—
यह टीम
डर से नहीं खेलती
स्कोर बचाने नहीं सोचती
और दबाव में अपना खेल नहीं बदलती
टी20 वर्ल्ड कप जैसे टूर्नामेंट में यही आदत सबसे ज्यादा खतरनाक होती है।















