BCCI – टी20 वर्ल्ड कप के बीच जब टीम इंडिया मैदान पर अपने अभियान को मजबूत करने में जुटी है, उसी समय बीसीसीआई ने सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट की लिस्ट जारी कर दी—और बस, बहस शुरू। ड्रेसिंग रूम से ज्यादा चर्चा अब ग्रेडिंग पर हो रही है। किसे ऊपर रखा गया, किसे नीचे। और सबसे बड़ा सवाल—क्या सबके साथ न्याय हुआ?
इस बार सबसे बड़ा बदलाव था A+ कैटेगरी का हटाया जाना। अब टॉप ग्रेड सिर्फ A है, जिसमें तीन नाम हैं—शुभमन गिल, जसप्रीत बुमराह और रवींद्र जडेजा।
लेकिन जैसे ही लिस्ट सामने आई, सोशल मीडिया पर आवाज़ें उठने लगीं—खासतौर पर अक्षर पटेल, हार्दिक पांड्या, केएल राहुल और कुलदीप यादव को लेकर।
A+ हटाया गया, संरचना बदली
बीसीसीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी लिस्ट के मुताबिक इस बार A+ कैटेगरी को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। पहले यह ग्रेड उन खिलाड़ियों के लिए था जो तीनों फॉर्मेट में लगातार खेलते और प्रदर्शन करते थे।
अब संरचना इस प्रकार है:
ग्रेड A
शुभमन गिल
जसप्रीत बुमराह
रवींद्र जडेजा
ग्रेड B
विराट कोहली
रोहित शर्मा
केएल राहुल
वॉशिंगटन सुंदर
मोहम्मद सिराज
हार्दिक पांड्या
ऋषभ पंत
कुलदीप यादव
यशस्वी जायसवाल
सूर्यकुमार यादव
श्रेयस अय्यर
ग्रेड C
अक्षर पटेल
रुतुराज गायकवाड़
तिलक वर्मा
रिंकू सिंह
शिवम दुबे
संजू सैमसन
अर्शदीप सिंह
प्रसिद्ध कृष्णा
आकाश दीप
ध्रुव जुरेल
हर्षित राणा
वरुण चक्रवर्ती
नितीश कुमार रेड्डी
अभिषेक शर्मा
साई सुदर्शन
रवि बिश्नोई
अक्षर पटेल: सबसे बड़ा सवाल
अक्षर पटेल तीनों फॉर्मेट खेलते हैं। टी20 में उप-कप्तान हैं। टेस्ट में भरोसेमंद ऑलराउंडर। वनडे में उपयोगी विकल्प। फिर भी ग्रेड C?
यही सवाल पूर्व क्रिकेटर आकाश चोपड़ा ने भी उठाया। उन्होंने X पर लिखा—“अक्षर पटेल को जो मिलना चाहिए, उसे पाने के लिए और क्या करना होगा? तीनों फॉर्मेट का खिलाड़ी। एक फॉर्मेट में वाइस-कैप्टन। ग्रेड-C??”
यह टिप्पणी सीधे बीसीसीआई के मूल्यांकन मॉडल पर सवाल उठाती है।
जडेजा A में, तो हार्दिक क्यों नहीं?
रवींद्र जडेजा दो फॉर्मेट में सक्रिय हैं और उन्हें A ग्रेड मिला है। तो फिर हार्दिक पांड्या—जो व्हाइट-बॉल क्रिकेट में प्रमुख ऑलराउंडर हैं—ग्रेड B में क्यों?
केएल राहुल टेस्ट और वनडे दोनों में स्थिर नाम रहे हैं। कुलदीप यादव तीनों फॉर्मेट के लिए उपलब्ध हैं और बड़े टूर्नामेंट में असरदार रहे हैं।
फिर भी वे B में हैं।
क्या चयन सिर्फ फॉर्मेट की संख्या पर आधारित है?
या निरंतरता, नेतृत्व भूमिका और हालिया प्रदर्शन भी शामिल हैं?
बीसीसीआई ने अभी तक सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत मापदंड साझा नहीं किया है।
अर्शदीप सिंह का मामला
टी20 वर्ल्ड कप 2024 विजेता स्क्वॉड का हिस्सा रहे अर्शदीप सिंह, जो डेथ ओवर स्पेशलिस्ट माने जाते हैं, उन्हें भी ग्रेड C में रखा गया है।
धीरे-धीरे वनडे सेटअप में भी जगह बना रहे हैं। ऐसे में कई विशेषज्ञों का मानना है कि वह कम से कम ग्रेड B के हकदार थे।
क्या कॉन्ट्रैक्ट सिर्फ पैसे की बात है?
पहले ग्रेड A की वार्षिक राशि 5 करोड़, B की 3 करोड़ और C की 1 करोड़ रुपये हुआ करती थी। इस बार बोर्ड ने आधिकारिक तौर पर रकम की पुष्टि नहीं की है, लेकिन ढांचा लगभग वैसा ही माना जा रहा है।
मुद्दा सिर्फ पैसों का नहीं है।
यह स्टेटस का मामला है।
टीम में आपकी प्राथमिकता का संकेत है।
किसी खिलाड़ी का ग्रेड उसकी बोर्ड में “स्थिति” को दर्शाता है।
बीसीसीआई का संभावित तर्क
संभव है कि बोर्ड ने निम्न कारकों पर विचार किया हो:
• पिछले 12 महीनों का निरंतर प्रदर्शन
• फिटनेस और उपलब्धता
• कप्तानी/लीडरशिप भूमिका
• सभी फॉर्मेट में नियमित चयन
अगर ऐसा है तो जडेजा और बुमराह का A ग्रेड समझ आता है। शुभमन गिल टेस्ट और वनडे कप्तान हैं—इसलिए शीर्ष ग्रेड में।
लेकिन फिर भी अक्षर और अर्शदीप जैसे मामलों में सवाल उठना स्वाभाविक है।















