Jos Buttler : वॉकी-टॉकी पर मैकुलम – बटलर ने उठाया बड़ा सवाल

Atul Kumar
Published On:
Jos Buttler

Jos Buttler – नेपाल के खिलाफ उस रोमांचक मुकाबले के बाद चर्चा सिर्फ चार रन की जीत की नहीं थी, बल्कि ड्रिंक्स ब्रेक के दौरान एक वॉकी-टॉकी की भी थी।

कैमरे ने इंग्लैंड के हेड कोच ब्रैंडन मैकुलम को कप्तान हैरी ब्रूक से सीधे बात करते हुए कैद किया—और वहीं से बहस शुरू हो गई कि क्या क्रिकेट अब भी कम्युनिकेशन के मामले में बाकी खेलों से पीछे है?

जोस बटलर ने इस सवाल को टालने के बजाय सीधे स्वीकार किया—हाँ, क्रिकेट शायद अभी भी थोड़ा पीछे है।

वॉकी-टॉकी विवाद या नई रणनीति

नेपाल के खिलाफ टी20 वर्ल्ड कप मैच में ड्रिंक्स ब्रेक के दौरान मैकुलम को वॉकी-टॉकी पर ब्रूक से बात करते देखा गया। कुछ लोगों ने इसे “मैदान पर कोचिंग का सीधा हस्तक्षेप” कहा, तो कुछ ने इसे आधुनिक क्रिकेट का हिस्सा।

बटलर ने साफ कहा,
“वॉकी-टॉकी तो काफी समय से हैं। टीम में ऊपर से नीचे तक संवाद हमेशा अच्छा रहा है।”

उनका लहजा बचाव का नहीं, बल्कि व्यावहारिक था। मतलब साफ—यह कोई नियम तोड़ने वाली चीज नहीं, बल्कि बेहतर कम्युनिकेशन का तरीका है।

क्रिकेट बनाम बाकी खेल

बटलर ने तुलना खुद की।
फॉर्मूला वन में रेस इंजीनियर हर सेकंड ड्राइवर से जुड़ा रहता है।
फुटबॉल में मैनेजर साइडलाइन से लगातार निर्देश देते हैं।
रग्बी में तो मैदान पर मैसेजिंग लगभग निरंतर होती है।

तो फिर क्रिकेट में क्यों नहीं?

“ऐसा लगता है कि क्रिकेट अब भी इस मामले में थोड़ा पीछे है,” बटलर ने कहा।
“शायद आने वाले समय में यह और बढ़े।”

यह बयान छोटा है, लेकिन संकेत बड़ा। क्रिकेट, खासकर टी20, अब हाई-इंटेंसिटी रणनीतिक खेल बन चुका है। हर ओवर में प्लान बदल सकता है। ऐसे में रियल-टाइम इनपुट क्यों न हो?

मैकुलम शांत चेहरे के पीछे तेज दिमाग

बटलर ने मैकुलम की तारीफ भी खुलकर की।

“वह आराम से बैठकर, चश्मा लगाकर शांत दिख सकते हैं, लेकिन वह सबसे तेज दिमाग वाले कोचों में से एक हैं। उनसे कुछ नहीं छूटता।”

यह सिर्फ तारीफ नहीं, बल्कि भरोसे का बयान है।
मैकुलम का स्टाइल अलग है—कम हावभाव, ज्यादा विश्लेषण।

आईपीएल का उदाहरण देते हुए बटलर ने आशीष नेहरा का जिक्र किया, जो बाउंड्री लाइन पर लगातार सक्रिय रहते हैं। यानी क्रिकेट में यह ट्रेंड नया नहीं है, बस अब वह ज्यादा दिखने लगा है।

नेपाल मैच चेतावनी या सबक

इंग्लैंड नेपाल के खिलाफ हारते-हारते बचा।
184 रन बनाने के बाद भी टीम को सिर्फ चार रन से जीत मिली।

बटलर ने कहा,
“टी20 क्रिकेट में खेल बहुत करीबी होता है। एक या दो खिलाड़ी मैच जिता सकते हैं।”

नेपाल ने आखिरी ओवर तक मुकाबला खींचा। इससे साफ है—टी20 में नाम से नहीं, दिन से मैच जीता जाता है।

दबाव का गणित

बटलर ने एक दिलचस्प बात कही—
“क्रिकेट वही है, लेकिन दबाव और नतीजों का असर अलग होता है।”

विश्व कप का मंच अलग है।
हर रन का वजन ज्यादा है।
हर निर्णय का असर बड़ा।

अगर रियल-टाइम कम्युनिकेशन से कप्तान को बेहतर रणनीति मिलती है, तो क्या यह खेल के विकास का हिस्सा नहीं होना चाहिए?

क्या नियम बदलेंगे

फिलहाल आईसीसी के नियमों के तहत ड्रिंक्स ब्रेक या निर्धारित समय पर बातचीत की अनुमति है, लेकिन लगातार रेडियो कम्युनिकेशन अभी क्रिकेट की संस्कृति का हिस्सा नहीं है।

सवाल यह है—
क्या आने वाले वर्षों में क्रिकेट भी F1 या रग्बी की तरह “लाइव कोचिंग” मॉडल अपनाएगा?

या फिर क्रिकेट अपनी पारंपरिक सीमाओं में ही रहेगा?

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