Australia – कोलंबो के आर. प्रेमदासा स्टेडियम में शुक्रवार की रात जो हुआ, उसे टी20 वर्ल्ड कप 2026 का अब तक का सबसे बड़ा झटका कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। ऑस्ट्रेलिया—जिसे खिताब के प्रबल दावेदारों में गिना जा रहा था—जिम्बाब्वे के हाथों 23 रनों से हार गया। स्कोरबोर्ड पर 169/2 बनाम 146 ऑल आउट, लेकिन कहानी इससे कहीं ज्यादा गहरी है।
जिम्बाब्वे ने 19 साल बाद टी20 वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया को हराया। और यह जीत किसी किस्मत का नतीजा नहीं थी—यह रणनीति, धैर्य और अनुशासन का परिणाम थी।
169/2: जिम्बाब्वे की ठोस नींव
टॉस हारने के बाद पहले बल्लेबाजी करते हुए जिम्बाब्वे ने 20 ओवर में 169/2 का स्कोर खड़ा किया। कोलंबो की धीमी पिच पर यह स्कोर 10-15 रन ज्यादा माना जा सकता था।
ऑस्ट्रेलिया ने सिर्फ दो विकेट निकाले। यानी जिम्बाब्वे के बल्लेबाजों ने शुरुआत से लेकर अंत तक विकेट हाथ में रखे। यही टी20 का पहला नियम है—अगर अंत तक बल्लेबाज मौजूद हों, तो 160 भी 180 जैसा दिखने लगता है।
ऑस्ट्रेलिया की लड़खड़ाती शुरुआत
लक्ष्य 170 का था। नामुमकिन नहीं। लेकिन ऑस्ट्रेलिया ने 29 रन पर 4 विकेट गंवा दिए। पावरप्ले में झटके ने पूरी चेज को उलझा दिया।
| बल्लेबाज | रन |
|---|---|
| मैट रेनशॉ | 65 |
| ग्लेन मैक्सवेल | 31 |
| ट्रैविस हेड | 17 |
रेनशॉ ने 65 रन बनाकर कोशिश जरूर की, मैक्सवेल ने 31 जोड़े, लेकिन सात खिलाड़ी दहाई का आंकड़ा पार नहीं कर सके। 19.3 ओवर में 146 पर पूरी टीम सिमट गई।
यह सिर्फ हार नहीं थी—यह लय का टूटना था।
ट्रैविस हेड का बयान: आत्मविश्वास या अति-आत्मविश्वास?
हार के बाद कार्यवाहक कप्तान ट्रैविस हेड ने कहा कि यह ऐसा स्कोर था, जिसे “हम खुशी-खुशी चेज कर सकते थे।”
उन्होंने कहा, “हमें लगा कि यह अच्छा विकेट है। उतना बड़ा स्कोर नहीं बना। दूसरी पारी में पिच बेहतर रहेगी। हमने जल्दी विकेट गंवाए और प्रेशर आ गया।”
बयान में आत्मविश्वास झलकता है। लेकिन सवाल यह है—क्या ऑस्ट्रेलिया ने जिम्बाब्वे को हल्के में लिया?
हेड ने यह भी माना कि पावरप्ले में विकेट गंवाने से दबाव बढ़ गया और स्कोरबोर्ड रेट चढ़ता गया। बीच में साझेदारी बनी, लेकिन तब तक मैच हाथ से निकल चुका था।
जिम्बाब्वे का अनुशासन
जिम्बाब्वे ने जो किया, वह पाठ्यपुस्तक जैसा टी20 क्रिकेट था:
- पहले बल्लेबाजी में विकेट बचाए
- गेंदबाजी में शुरुआती झटके दिए
- दबाव बनाए रखा
29/4 के बाद ऑस्ट्रेलिया लगातार बैकफुट पर रहा। कोलंबो की पिच ने भी गेंदबाजों का साथ दिया। धीमी सतह पर स्ट्रोक लगाना आसान नहीं था।
ग्रुप बी में असर
यह हार ग्रुप बी के समीकरण बदल सकती है। ऑस्ट्रेलिया को अब अपने अगले मुकाबले में श्रीलंका (16 फरवरी, पल्लेकेले) के खिलाफ जीत जरूरी होगी। श्रीलंका पहले ही शानदार फॉर्म में दिख रहा है।
ऑस्ट्रेलिया ने अब तक सिर्फ एक टी20 वर्ल्ड कप (2021) जीता है। और इस बार भी उन्हें शुरुआत से ही दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
क्या यह चेतावनी है?
ऑस्ट्रेलिया अक्सर टूर्नामेंट के शुरुआती चरण में लड़खड़ाकर भी अंत में मजबूत वापसी करता है। हेड ने भी कहा, “हम पहले भी इस स्थिति से गुजरे हैं। हम मजबूत वापसी करेंगे।”
लेकिन यह वर्ल्ड कप है। यहां हर हार महंगी पड़ सकती है। नेट रन रेट, अंक तालिका, मानसिक बढ़त—सब दांव पर है।
जिम्बाब्वे की जीत का मतलब
यह जीत सिर्फ दो अंकों की नहीं है। यह आत्मविश्वास की जीत है। यह संदेश है कि टी20 में कोई भी टीम किसी को भी हरा सकती है।
19 साल बाद ऑस्ट्रेलिया पर जीत।
23 रन का अंतर।
और ग्रुप बी में नई हलचल।
अब नजर 16 फरवरी पर है—क्या ऑस्ट्रेलिया वापसी करेगा? या यह हार टूर्नामेंट की दिशा बदल देगी?
















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