IPL : वंडर किड वैभव का बड़ा फैसला – क्लासरूम से ज्यादा मैदान पर फोकस

Atul Kumar
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IPL – समस्तीपुर के ताजपुर से उठकर आईपीएल के स्टेडियम तक पहुंचा एक किशोर… और अब वही नाम सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह बल्ला नहीं—बोर्ड परीक्षा है। बिहार के युवा क्रिकेट सनसनी वैभव सूर्यवंशी ने इस साल सीबीएसई की दसवीं बोर्ड परीक्षा नहीं देने का फैसला किया है। वजह साफ है—क्रिकेट।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, वैभव इस वक्त पूरी तरह अपने क्रिकेट करियर पर फोकस करना चाहते हैं। आईपीएल का नया सीजन अगले महीने शुरू होने जा रहा है, और तैयारियां जोरों पर हैं। ऐसे में बोर्ड एग्जाम की तैयारी के लिए समय निकालना मुश्किल हो गया था।

एडमिट कार्ड जारी, लेकिन एग्जाम नहीं

वैभव ताजपुर प्रखंड के मॉडेस्टी स्कूल के छात्र हैं और सीबीएसई बोर्ड से पढ़ाई कर रहे हैं। सीबीएसई की आधिकारिक डेटशीट के अनुसार, कक्षा 10 की परीक्षाएं 17 फरवरी से 11 मार्च तक चलेंगी।

उनका एडमिट कार्ड भी जारी हो चुका था। परीक्षा केंद्र समस्तीपुर शहर के पोदार इंटरनेशनल स्कूल में तय किया गया था। स्कूल प्रशासन ने पहले पुष्टि की थी कि सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं।

लेकिन अब हालात बदल गए हैं।

मॉडेस्टी स्कूल के डायरेक्टर आदर्श कुमार पिंटू ने पुष्टि की है कि वैभव इस साल परीक्षा में शामिल नहीं होंगे। पिता से बातचीत के बाद यह निर्णय लिया गया कि व्यस्त क्रिकेट शेड्यूल के चलते परीक्षा देना संभव नहीं होगा।

क्रिकेट बनाम क्लासरूम

यह कोई साधारण छात्र नहीं है।

वैभव सूर्यवंशी वही खिलाड़ी हैं जिन्होंने पिछले साल आईपीएल में डेब्यू कर इतिहास रच दिया था। वह लीग खेलने वाले सबसे युवा खिलाड़ियों में शामिल रहे और आईपीएल इतिहास में सबसे तेज शतक जड़ने वाले भारतीय बल्लेबाज बने।

राजस्थान रॉयल्स की आधिकारिक जानकारी पर उपलब्ध है, जहां पिछले सीजन में उनके प्रदर्शन की झलक साफ दिखती है।

इसके बाद अंडर-19 क्रिकेट में उनका बल्ला लगातार बोला। हाल ही में अंडर-19 वर्ल्ड कप में भारत की खिताबी जीत में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। बीसीसीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर उनकी उपलब्धियों का जिक्र मौजूद है।

ऐसे में सवाल उठता है—क्या इतनी कम उम्र में क्रिकेट को प्राथमिकता देना सही फैसला है?

भीड़, लोकप्रियता और दबाव

बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राकेश तिवारी ने टीओआई से कहा, “सूर्यवंशी जहां जाते हैं, उनके आसपास 2000-3000 लोग जमा हो जाते हैं। वह देश के सबसे चहेते युवा क्रिकेटरों में से एक हैं।”

यह लोकप्रियता आशीर्वाद भी है और दबाव भी।

परीक्षा केंद्र पर सुरक्षा व्यवस्था भी एक चुनौती बन सकती थी। इतनी कम उम्र में स्टारडम का बोझ अलग, और बोर्ड एग्जाम का तनाव अलग।

क्या है विकल्प?

सूत्रों के मुताबिक, वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है ताकि वैभव बाद में परीक्षा दे सकें। सीबीएसई के नियमों के तहत छात्र अगले सत्र में या विशेष परिस्थितियों में परीक्षा दे सकते हैं—हालांकि अंतिम निर्णय बोर्ड की प्रक्रियाओं पर निर्भर करता है।

यह पहली बार नहीं है जब किसी युवा खिलाड़ी ने पढ़ाई से ब्रेक लेकर खेल को प्राथमिकता दी हो। कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों ने शुरुआती करियर में यही रास्ता चुना, फिर बाद में पढ़ाई पूरी की।

जोखिम और अवसर

यह फैसला जोखिम भरा भी है।

क्रिकेट का करियर लंबा हो सकता है—या अचानक रुक भी सकता है। शिक्षा एक सुरक्षा कवच मानी जाती है। लेकिन दूसरी तरफ, अवसर हमेशा इंतजार नहीं करते। आईपीएल, अंडर-19, राष्ट्रीय टीम की संभावनाएं—यह समय निर्णायक हो सकता है।

वैभव अभी किशोर हैं। उनके पास समय है—करियर बनाने का भी, और पढ़ाई पूरी करने का भी। सवाल सिर्फ प्राथमिकता का है।

भारत में क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं, एक सपना है। छोटे शहरों से निकलकर राष्ट्रीय मंच तक पहुंचने की कहानियां प्रेरित करती हैं। लेकिन इन कहानियों के पीछे कठिन फैसले भी होते हैं।

वैभव सूर्यवंशी ने फिलहाल बल्ला चुना है, किताब नहीं।

क्या यह फैसला उन्हें अगला सुपरस्टार बनाएगा?
या कुछ साल बाद पढ़ाई की ओर लौटने का अध्याय खुलेगा?

फिलहाल इतना तय है—समस्तीपुर का यह लड़का क्रिकेट के मैदान पर अपनी कहानी लिखने में व्यस्त है।

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