Shivam Dube – टी20 वर्ल्ड कप जैसे बड़े मंच पर अक्सर सुर्खियां उन्हीं खिलाड़ियों को मिलती हैं जो चमकदार शतक जड़ते हैं या आखिरी ओवर में मैच खत्म करते हैं। लेकिन इस टूर्नामेंट में एक नाम ऐसा है जो शोर नहीं करता—सिर्फ असर छोड़ता है। शिवम दुबे। भारतीय टीम का यह ऑलराउंडर चुपचाप, लेकिन लगातार, मैचों की दिशा बदल रहा है।
नीदरलैंड के खिलाफ 31 गेंदों पर 66 रन। छह छक्के। और उससे भी बड़ी बात—बीच के ओवरों में पारी की रफ्तार को फिर से जीवित करना। यह वही चरण होता है जहां टी20 मैच अक्सर फंस जाते हैं।
शुरुआत धीमी, अंत विस्फोटक
दुबे ने अपनी पहली 11 गेंदों पर सिर्फ छह रन बनाए। कई बल्लेबाज इस दौर में घबरा जाते हैं, शॉट चुनने में जल्दबाजी कर बैठते हैं। लेकिन दुबे का दृष्टिकोण अलग था।
उन्होंने परिस्थितियों को परखा।
गेंदबाजों की लंबाई को समझा।
फिर गियर बदला।
अगली 20 गेंदों में 60 रन—यह सिर्फ पावर नहीं, गणित है। टी20 का गणित।
शिवम दुबे बनाम नीदरलैंड
| रन | गेंदें | छक्के | स्ट्राइक रेट |
|---|---|---|---|
| 66 | 31 | 6 | 212.90 |
बीच के ओवरों में 200+ स्ट्राइक रेट—यही अंतर पैदा करता है।
डॉट बॉल से डर नहीं
मैच के बाद दुबे ने जो कहा, वही उनकी बल्लेबाजी की फिलॉसफी समझाता है।
“अगर मैं 10 गेंद में दो रन भी बनाऊं, लेकिन अगली पांच में दो छक्के लगा दूं तो हिसाब बराबर हो जाता है।”
यह आत्मविश्वास अनुभव से आता है। और आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स के साथ बिताए वर्षों ने उन्हें यही सिखाया—धैर्य रखो, मौका आएगा।
सिर्फ स्पिनर-हिटर नहीं
पहले दुबे को स्पिन के खिलाफ विशेषज्ञ माना जाता था। लेकिन इस विश्व कप में उन्होंने तेज गेंदबाजों के खिलाफ भी खुद को साबित किया है।
नीदरलैंड के खिलाफ लोगन वैन बीन की विविध गति वाली गेंदों पर तीन छक्के—यह दिखाता है कि उन्होंने रफ्तार के खिलाफ टाइमिंग में सुधार किया है।
शॉर्ट बॉल के खिलाफ भी अब उनका संतुलन बेहतर दिख रहा है। फ्रंट-फुट कमिटमेंट कम हुआ है, बैक-फुट ट्रिगर साफ है।
‘खामोश योद्धा’ की भूमिका
नामीबिया और पाकिस्तान के खिलाफ मुश्किल पिचों पर छोटी लेकिन महत्वपूर्ण पारियां—शायद स्कोरकार्ड पर चमकदार नहीं दिखतीं, लेकिन टीम की संरचना के लिए अहम थीं।
दूसरे टी20 वर्ल्ड कप में खेल रहे दुबे अब मैच की परिस्थितियों को पढ़ना सीख चुके हैं।
उन्होंने खुद कहा, “अब मैं जानता हूं कि गेंदबाज मुझे किस तरह की गेंद कर सकता है।”
यह परिपक्वता है।
गेंदबाजी में भरोसा
सबसे दिलचस्प पल तब आया जब नीदरलैंड को आखिरी ओवर में 28 रन चाहिए थे और कप्तान सूर्यकुमार यादव ने जसप्रीत बुमराह की जगह गेंद दुबे को थमा दी।
यह सिर्फ रणनीतिक निर्णय नहीं था—यह भरोसे का संकेत था।
दुबे ने दबाव में ओवर डाला और मैच भारत की झोली में गया।
बड़ी तस्वीर
हर टीम को ऐसे खिलाड़ी की जरूरत होती है जो हेडलाइन न बने, लेकिन मैच का संतुलन संभाले।
दुबे वही हैं।
आत्मविश्वास चरम पर
“आज मुझे लगा कि आज मेरा दिन है,” दुबे ने कहा।
उनकी बॉडी लैंग्वेज में अब झिझक नहीं है। छक्के मारने के बाद भी चेहरे पर वही शांत भाव—जैसे काम पूरा करना ही उद्देश्य हो, जश्न नहीं।
शिवम दुबे शायद सबसे ज्यादा चर्चित खिलाड़ी नहीं हैं। लेकिन टी20 वर्ल्ड कप 2026 में वह भारत के लिए एक्स-फैक्टर बनते जा रहे हैं।
डॉट बॉल से घबराते नहीं।
दबाव में टूटते नहीं।
और मौके पर प्रहार करते हैं।
खामोश योद्धा… लेकिन असरदार।
अगर भारत खिताब की ओर बढ़ता है, तो इस अभियान में दुबे की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकेगा।















