The Hundred – पल्लेकेले की उमस भरी दोपहर, सुपर आठ मुकाबले से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में हैरी ब्रूक से सवाल ‘द हंड्रेड’ पर आया—और इंग्लैंड के कप्तान ने बिना घुमाए सीधी बात रख दी। अगर पाकिस्तानी खिलाड़ियों को नीलामी से बाहर रखा जाता है, तो वह “शर्मनाक” होगा। क्रिकेट की दुनिया में ऐसे बयान अक्सर हल्के नहीं होते। खासकर तब, जब खेल और राजनीति की रेखा धुंधली पड़ने लगे।
ब्रूक का साफ संदेश
ब्रूक, जो खुद भारतीय स्वामित्व वाली सनराइजर्स लीड्स से जुड़े हैं, ने कहा कि फिलहाल उनका फोकस टी20 विश्व कप पर है। लेकिन पाकिस्तान जैसे क्रिकेट इतिहास के अहम देश के खिलाड़ियों को नीलामी में न देखना खेल के लिए अच्छा संकेत नहीं होगा।
उनके शब्दों में एक संतुलन था—ना सीधे आरोप, ना कूटनीतिक चुप्पी।
“उनके पास बेहतरीन क्रिकेटर हैं… कुछ खिलाड़ियों को वहां न देखना शर्म की बात होगी।”
यह बयान ऐसे समय आया है जब रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि भारतीय स्वामित्व वाली कुछ फ्रेंचाइजियां—मैनचेस्टर सुपर जायंट्स, एमआई लंदन, सदर्न ब्रेव और सनराइजर्स लीड्स—भारत-पाकिस्तान तनाव के कारण संभावित राजनीतिक प्रतिक्रिया से बचने के लिए पाकिस्तानी खिलाड़ियों को लेने से हिचक सकती हैं।
‘द हंड्रेड’ की नीलामी: आंकड़े क्या कहते हैं
लंदन में होने वाली आगामी नीलामी के लिए पाकिस्तान के 67 खिलाड़ी (पुरुष और महिला) पंजीकृत हैं। इनमें टी20 विश्व कप में खेल रहे लगभग सभी प्रमुख नाम शामिल हैं।
पंजीकृत पाकिस्तानी खिलाड़ी
| श्रेणी | संख्या |
|---|---|
| पुरुष | 50+ |
| महिला | 10+ |
| कुल | 67 |
शाहीन शाह अफरीदी, शादाब खान, हारिस रऊफ और मोहम्मद आमिर जैसे खिलाड़ी पहले ‘द हंड्रेड’ का हिस्सा रह चुके हैं। यानी यह कोई नई एंट्री नहीं—बल्कि संभावित बहिष्कार की चर्चा है।
फ्रेंचाइजी स्वामित्व और जियोपॉलिटिक्स
यहां कहानी थोड़ा जटिल हो जाती है।
आईपीएल में 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद से कोई पाकिस्तानी खिलाड़ी नहीं खेला। यह एक राजनीतिक और कूटनीतिक निर्णय था।
एसए20—जिसकी सभी छह फ्रेंचाइजी भारतीय स्वामित्व में हैं—वहां भी 2023 से अब तक कोई पाकिस्तानी खिलाड़ी नहीं दिखा।
यूएई की आईएलटी20 में भी भारतीय मालिकाना हक वाली टीमों ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों को अनुबंधित नहीं किया।
अब सवाल यह है—क्या ‘द हंड्रेड’ भी उसी रास्ते पर जाएगा?
तुलना: प्रमुख लीग्स में पाकिस्तानी खिलाड़ियों की स्थिति
| लीग | पाकिस्तानी खिलाड़ी |
|---|---|
| आईपीएल | 2008 के बाद नहीं |
| एसए20 | अब तक नहीं |
| आईएलटी20 | भारतीय स्वामित्व वाली टीमों में नहीं |
| द हंड्रेड | अनिश्चित |
क्रिकेट अब सिर्फ बैट-बॉल का खेल नहीं रहा। यह ग्लोबल ब्रांडिंग, निवेश और राजनीतिक समीकरणों से जुड़ा है।
ब्रूक की दुविधा
दिलचस्प बात यह है कि ब्रूक खुद भारतीय स्वामित्व वाली टीम से जुड़े हैं। ऐसे में उनका बयान और भी वजनदार हो जाता है। वह न तो बोर्ड के नीति-निर्माता हैं, न फ्रेंचाइजी मालिक। लेकिन एक कप्तान के तौर पर उन्होंने खेल के हित की बात की।
ब्रूक ने यह भी कहा कि पाकिस्तानी खिलाड़ी बड़ी संख्या में दर्शकों को आकर्षित करते हैं। यह महज खेल की गुणवत्ता का सवाल नहीं—व्यावसायिक पहलू भी जुड़ा है। शाहीन या रऊफ जैसे तेज गेंदबाज जहां खेलते हैं, वहां स्टेडियम का माहौल अलग होता है। यह हकीकत है।
क्या ईसीबी हस्तक्षेप करेगा?
‘द हंड्रेड’ इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) के तहत आयोजित होता है। अंतिम चयन फ्रेंचाइजी के हाथ में होता है, लेकिन लीग की संरचना बोर्ड नियंत्रित करता है। अगर राजनीतिक दबाव की चर्चा बढ़ती है, तो ईसीबी को स्पष्ट रुख लेना पड़ सकता है।
अब तक कोई आधिकारिक नीति घोषित नहीं हुई है कि पाकिस्तानी खिलाड़ियों को प्रतिबंधित किया जाएगा। मामला फिलहाल “संभावित परहेज” की रिपोर्ट्स तक सीमित है।















