PM Modi – टी20 विश्व कप के बीच जब कोई बल्लेबाज़ चौका लगाता है, तो जर्सी पर देश का नाम दिखता है—लेकिन नाम सुनते ही कभी-कभी एहसास होता है, “अरे, ये तो अपना ही लगता है।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ में इसी भावना को शब्द दिए। उन्होंने कहा कि भारतीय मूल के अनगिनत खिलाड़ी दुनिया भर में अपने-अपने देशों का नाम रोशन कर रहे हैं—और यही भारतीयता की पहचान है।
जो खेलता है, वही खिलता है
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में खेल को जोड़ने वाली ताकत बताया।
“जो खेलता है, वही खिलता है,” उन्होंने कहा, और जोड़ा कि टी20 विश्व कप देखते समय कई बार दर्शकों की नजर किसी ऐसे खिलाड़ी पर टिक जाती है जिसका नाम भारतीय लगता है, भले ही वह किसी और देश की जर्सी पहने हो।
यह भावना नई नहीं है। लेकिन इस बार इसे प्रधानमंत्री के मंच से पहचान मिली।
कनाडा में भारतीय मूल के खिलाड़ियों की सबसे ज्यादा मौजूदगी
मोदी ने खास तौर पर कनाडा टीम का जिक्र किया। उनके मुताबिक, टी20 विश्व कप में खेलने वाली टीमों में कनाडा में भारतीय मूल के खिलाड़ियों की संख्या सबसे ज्यादा है।
कनाडा टीम के प्रमुख भारतीय मूल खिलाड़ी
| खिलाड़ी | मूल स्थान |
|---|---|
| दिलप्रीत बाजवा (कप्तान) | गुरदासपुर, पंजाब |
| नवनीत धालीवाल | चंडीगढ़ |
| हर्ष ठाकर | भारत मूल |
| श्रेयस मोवा | भारत मूल |
इन नामों के जरिए प्रधानमंत्री ने यह रेखांकित किया कि प्रवासी भारतीय समुदाय अब वैश्विक खेल मंच पर भी प्रभाव छोड़ रहा है।
अमेरिका और ओमान में भी भारतीय जड़ें
अमेरिकी टीम का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि कप्तान मोनांक पटेल गुजरात की अंडर-16 और अंडर-18 टीम के लिए खेल चुके हैं। मुंबई के सौरभ, दिल्ली के हरमीत सिंह और मिलिंद कुमार भी अमेरिकी टीम का हिस्सा हैं।
ओमान टीम में भी कई खिलाड़ी भारतीय घरेलू क्रिकेट से जुड़े रहे हैं—जतिंदर सिंह, विनायक शुक्ला, करण, जय और आशीष जैसे नामों का उल्लेख किया गया।
प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि न्यूजीलैंड, यूएई और इटली की टीमों में भी भारतीय मूल के खिलाड़ी शामिल हैं।
‘मातृभूमि’ और ‘कर्मभूमि’ का संतुलन
मोदी का संदेश सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं था। उन्होंने कहा:
“भारतीय जहां भी जाते हैं, वे अपनी मातृभूमि की जड़ों से जुड़े रहते हैं और अपनी कर्मभूमि के विकास में योगदान देते हैं।”
यह बयान भारतीय डायस्पोरा की व्यापक भूमिका को रेखांकित करता है—चाहे वह टेक्नोलॉजी हो, बिजनेस, अकादमिक या खेल।
बदलती वैश्विक तस्वीर
टी20 विश्व कप जैसे टूर्नामेंट अब सिर्फ क्रिकेट प्रतियोगिता नहीं रहे। वे प्रवास, पहचान और वैश्विक जुड़ाव की कहानी भी बताते हैं।
कनाडा, अमेरिका, ओमान जैसी टीमों में भारतीय मूल के खिलाड़ियों की मौजूदगी यह दिखाती है कि क्रिकेट अब केवल पारंपरिक देशों तक सीमित नहीं है। भारतीय समुदाय जहां भी बसा, वहां क्रिकेट की संस्कृति भी साथ गई।















