Bangladesh – ढाका से आई खबर ने बांग्लादेश क्रिकेट को झकझोर दिया है। महिला टीम की पूर्व कप्तान जहांआरा आलम के गंभीर आरोपों के बाद आखिरकार बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) ने बड़ा कदम उठाया है। महिला टीम के पूर्व मुख्य चयनकर्ता मोंजुरुल इस्लाम को क्रिकेट से जुड़ी किसी भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
यह फैसला सिर्फ एक व्यक्ति पर कार्रवाई नहीं, बल्कि सिस्टम की जवाबदेही की परीक्षा भी है।
आरोप क्या थे?
जहांआरा आलम, जो बांग्लादेश की महिला टीम की कप्तान रह चुकी हैं, ने पिछले साल एक इंटरव्यू में सनसनीखेज आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा कि मोंजुरुल इस्लाम ने राष्ट्रीय टीम के मैनेजर और मुख्य चयनकर्ता रहते हुए कई बार उन्हें गलत तरीके से छुआ, असहज हाव-भाव दिखाए और यहां तक कि उनके मासिक धर्म चक्र के बारे में निजी सवाल पूछे।
ये आरोप सिर्फ पेशेवर सीमा लांघने के नहीं थे—ये गरिमा और सुरक्षा के सवाल थे।
आलम ने यह भी दावा किया कि जब उन्होंने बीसीबी के वरिष्ठ अधिकारियों—नाडेल चौधरी और सीईओ निजामुद्दीन चौधरी—से शिकायत की, तो उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया।
इसके बाद उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य का हवाला देते हुए क्रिकेट से दूरी बना ली। दिसंबर 2024 के बाद से वह राष्ट्रीय टीम का हिस्सा नहीं रहीं।
जांच और प्रतिबंध
आरोप सामने आने के बाद बीसीबी ने एक स्वतंत्र जांच समिति गठित की थी। समिति ने इसी महीने अपनी रिपोर्ट बोर्ड को सौंपी।
रविवार को ढाका में हुई बोर्ड बैठक के बाद बीसीबी ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि:
“स्वतंत्र जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर पूर्व राष्ट्रीय क्रिकेटर मोंजुरुल इस्लाम को बीसीबी के तहत क्रिकेट से जुड़ी किसी भी गतिविधि में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका से प्रतिबंधित किया जाता है।”
इसका मतलब साफ है—अब वे बांग्लादेश क्रिकेट के ढांचे का हिस्सा नहीं रहेंगे।
कार्रवाई का सार
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| आरोपी | मोंजुरुल इस्लाम |
| पद | पूर्व मुख्य चयनकर्ता (महिला टीम) |
| आरोप | यौन उत्पीड़न, गंभीर कदाचार |
| कार्रवाई | बीसीबी के तहत हर भूमिका से प्रतिबंध |
| आगे की संभावना | अतिरिक्त कार्रवाई पर विचार जारी |
बीसीबी के बयान में यह भी संकेत दिया गया कि अगर समिति की सिफारिशों के आधार पर और कदम उठाने जरूरी हुए, तो वे भी लिए जाएंगे।
सवाल जो अब भी बाकी हैं
हालांकि बोर्ड ने आखिरकार कार्रवाई की, लेकिन आलोचना इस बात को लेकर भी है कि आरोप सामने आने के बाद भी इस्लाम जून 2025 तक अपने पद पर बने रहे और अपना कार्यकाल पूरा किया।
• शिकायत के बाद तत्काल कदम क्यों नहीं उठाया गया?
• क्या शुरुआती स्तर पर संवेदनशीलता की कमी थी?
• क्या महिला खिलाड़ियों के लिए शिकायत तंत्र पर्याप्त है?
ये सवाल अब बीसीबी के सामने हैं।
महिला क्रिकेट में सुरक्षा का मुद्दा
दक्षिण एशिया में महिला क्रिकेट तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन इसके साथ संस्थागत सुरक्षा और जवाबदेही की व्यवस्था भी उतनी ही मजबूत होनी चाहिए।
जहांआरा आलम का मामला यह दिखाता है कि खिलाड़ियों के लिए सुरक्षित वातावरण सिर्फ बयानबाजी से नहीं, ठोस कार्रवाई से बनता है।
उनका करियर रुक गया। मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हुआ। यह सिर्फ एक व्यक्तिगत लड़ाई नहीं थी—यह सिस्टम के खिलाफ आवाज थी।















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