Zimbabwe : चेन्नई में करो या मरो – जिम्बाब्वे से भिड़ेगा भारत

Atul Kumar
Published On:
Zimbabwe

Zimbabwe – चेन्नई की उमस भरी हवा, एमए चिदंबरम स्टेडियम की धीमी पिच… और टीम इंडिया के लिए करो या मरो का मुकाबला। सुपर-8 की पहली हार के बाद भारतीय टीम सोमवार को चेन्नई पहुंच चुकी है। अब सामने है जिम्बाब्वे—एक ऐसी टीम जिसे हल्के में लेने की भूल कोई भी बड़ी टीम नहीं कर सकती।

76 रन से साउथ अफ्रीका के हाथों मिली करारी शिकस्त ने भारत की लय तोड़ी है। 17 मैचों की आईसीसी व्हाइट-बॉल जीत का सिलसिला खत्म। सुपर-8 में अब समीकरण साफ है—दोनों बचे मैच जीतने ही होंगे।

जिम्बाब्वे को हल्के में लेने की गलती नहीं

कागज पर भारत मजबूत दिखता है। लेकिन यह वही जिम्बाब्वे है जिसने ग्रुप स्टेज में ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका जैसी टीमों को हराकर सबको चौंका दिया।

उनकी गेंदबाजी अनुशासित रही है, और मिडिल ऑर्डर दबाव में रन निकाल रहा है। चेन्नई की स्पिन-फ्रेंडली पिच पर वे और खतरनाक हो सकते हैं।

सुपर-8 समीकरण (संक्षेप)

टीमस्थिति
दक्षिण अफ्रीकाबढ़त में
भारतजीत जरूरी
जिम्बाब्वेआत्मविश्वास में
वेस्टइंडीजप्रतिस्पर्धी

भारत को सिर्फ जीत नहीं, बल्कि बेहतर नेट रन रेट भी चाहिए। यानी मुकाबला एकतरफा होना चाहिए।

76 रन की हार का असर

अहमदाबाद में 187 का पीछा करते हुए भारत 111 पर सिमट गया। पावरप्ले में 31/3—यहीं मैच हाथ से निकल गया।

सूर्यकुमार यादव ने हार के बाद साफ कहा:
“अगर आप 180-185 रन का पीछा कर रहे हैं, तो आप पावरप्ले में गेम नहीं जीत सकते, लेकिन पावरप्ले में गेम हार सकते हैं।”

यह बयान आत्मविश्लेषण का संकेत है।

क्या बदलेगा टीम कॉम्बिनेशन?

पिछले मैच के बाद चयन को लेकर बहस तेज है।
• अभिषेक शर्मा का फॉर्म
• तिलक वर्मा की धीमी शुरुआत
• रिंकू सिंह की फिनिशिंग

और अक्षर पटेल की संभावित वापसी।

चेन्नई की पिच को देखते हुए स्पिन ऑलराउंडर की अहमियत बढ़ जाती है। अगर बदलाव होता है, तो यही मैच सही समय होगा।

चेपॉक का फैक्टर

एम चिदंबरम स्टेडियम की पिच आमतौर पर धीमी और टर्न लेने वाली होती है। यहां 160-170 भी चुनौतीपूर्ण स्कोर हो सकता है।

भारत को यहां तीन चीजें सुधारनी होंगी:

  1. पावरप्ले में संयम
  2. मिडिल ओवर में स्ट्राइक रोटेशन
  3. स्पिन के खिलाफ स्पष्ट रणनीति

जिम्बाब्वे की टीम छोटी साझेदारियों से मैच में बनी रहती है। अगर भारत शुरुआती विकेट नहीं ले पाया, तो मुकाबला फंस सकता है।

कप्तान का भरोसा

सूर्यकुमार ने कहा:
“हम जैसा क्रिकेट खेलना चाहते हैं, वैसा ही खेलेंगे। कुछ नहीं बदलेगा।”

यह आत्मविश्वास अच्छा है। लेकिन “कुछ नहीं बदलेगा” का मतलब रणनीति नहीं, मानसिकता होना चाहिए। क्योंकि चेन्नई में वही टीम जीतेगी जो पिच पढ़ेगी।

टॉस के बाद फाइनल टीम चाहिए तो, अभी जॉइन करे Cricketyatri का Telegram चैनल- Join Now




Follow Us On