Sri Lanka : होम क्राउड के सामने हार – शनाका का छलका दर्द

Atul Kumar
Published On:
Sri Lanka

Sri Lanka – श्रीलंका के क्रिकेट फैंस ने 2014 के बाद हर आईसीसी टूर्नामेंट में एक उम्मीद के साथ कदम रखा—शायद इस बार वापसी होगी। लेकिन 2026 टी20 वर्ल्ड कप में सह-मेजबान होने के बावजूद टीम सुपर-8 से आगे नहीं बढ़ पाई। न्यूजीलैंड से 61 रनों की हार के बाद कप्तान दासुन शनाका का दर्द साफ झलक रहा था।

“होम क्राउड को निराश करना शर्म की बात है…” यह सिर्फ एक बयान नहीं था, बल्कि उस निराशा की आवाज थी जो कोलंबो से कैंडी तक फैले समर्थकों के दिल में थी।

2014 के बाद सेमीफाइनल का सूखा

श्रीलंका ने 2014 में टी20 वर्ल्ड कप जीता था। उसके बाद से किसी भी आईसीसी इवेंट के सेमीफाइनल में पहुंचने में नाकाम रही है। यह आंकड़ा अपने आप में कहानी कहता है।

2026 में हालात अनुकूल थे—घरेलू मैदान, परिचित पिच, समर्थकों का साथ। लेकिन सुपर-8 में न्यूजीलैंड के खिलाफ मिली हार ने अभियान यहीं खत्म कर दिया।

श्रीलंका – आईसीसी इवेंट प्रदर्शन (2014 के बाद)

वर्षटूर्नामेंटपरिणाम
2016टी20 वर्ल्ड कपग्रुप स्टेज से बाहर
2019वनडे वर्ल्ड कपलीग स्टेज
2021टी20 वर्ल्ड कपसुपर-12 से बाहर
2022टी20 वर्ल्ड कपसुपर-12
2026टी20 वर्ल्ड कपसुपर-8

सेमीफाइनल कॉलम अब भी खाली है।

मैच कहां फिसला?

न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 169 रन बनाए। लक्ष्य बड़ा नहीं था, लेकिन श्रीलंका की बल्लेबाजी 107 पर सिमट गई।

शनाका ने खास तौर पर मिचेल सेंटनर और उनके साझेदार की पार्टनरशिप का जिक्र किया। उनके मुताबिक वही साझेदारी मैच का टर्निंग पॉइंट थी।

“हमने सोचा नहीं था कि पिच इतना टर्न करेगी, क्योंकि यह नई पिच थी,” शनाका ने कहा।

यानी रणनीति और पिच रीडिंग में चूक।

टॉस और पिच का गणित

शनाका ने स्वीकार किया कि बल्लेबाजी का फैसला सामूहिक था। लेकिन नई पिच से इतनी मदद स्पिनरों को मिलेगी, इसकी उम्मीद नहीं थी।

सेंटनर ने जिस सटीकता से गेंदबाजी की, उसने श्रीलंका के बल्लेबाजों को बांध दिया।

शनाका ने यह भी कहा कि टीम न्यूजीलैंड को 130 के आसपास रोकना चाहती थी। लेकिन आखिरी ओवरों में रन लीक हुए।

यह वही फेज था जहां मैच हाथ से निकल गया।

बल्लेबाजी की नाकामी

कप्तान ने कुसल मेंडिस की फिटनेस का जिक्र किया—वह हल्की समस्या के साथ मैदान में उतरे थे।

लेकिन सच यही है कि टॉप ऑर्डर में किसी को ठोस शुरुआत नहीं मिली। 169 का लक्ष्य टी20 में असंभव नहीं होता। पर 107 पर सिमटना दर्शाता है कि दबाव में बल्लेबाजी बिखर गई।

आत्ममंथन का वक्त

शनाका ने न्यूजीलैंड के गेंदबाजों को श्रेय दिया। यह कप्तानी की जिम्मेदारी है। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि श्रीलंकाई गेंदबाज हर बार सही लेंथ पर गेंद नहीं डाल पाए।

यानी समस्या सिर्फ एक विभाग में नहीं थी—समग्र प्रदर्शन में कमी रही।

घरेलू टूर्नामेंट में बाहर होना दोहरी चोट देता है। एक तो हार, दूसरा अपने दर्शकों के सामने हार।

अब सवाल यह है—क्या श्रीलंका इस हार से सबक लेकर टीम संयोजन और रणनीति में बदलाव करेगा? या फिर 2014 के बाद का सेमीफाइनल सूखा और लंबा चलेगा?

दासुन शनाका की आवाज में निराशा जरूर थी, लेकिन उसमें जिम्मेदारी भी झलक रही थी।

“हमें उन्हें क्रेडिट देना चाहिए…”

क्रिकेट में यही खेल है—कभी आप जीतते हैं, कभी सीखते हैं।

फिलहाल श्रीलंका ने एक और आईसीसी इवेंट बिना सेमीफाइनल खेले खत्म किया है। और फैंस फिर उसी उम्मीद के साथ घर लौटे हैं—अगली बार शायद कहानी बदले।

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