Samson – टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज संजू सैमसन ने जिस तरह बल्लेबाजी की, उसने उन्हें टूर्नामेंट का सबसे बड़ा स्टार बना दिया। सिर्फ पांच मैचों में उन्होंने 321 रन बनाकर भारत को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
दिलचस्प बात यह है कि उनके पास तीन बार शतक बनाने का मौका था, लेकिन उन्होंने व्यक्तिगत रिकॉर्ड से ज्यादा टीम की जरूरत को प्राथमिकता दी। खुद सैमसन ने अब खुलासा किया है कि उनके मन में शतक का विचार जरूर आया था, मगर उन्होंने उसे दबा दिया।
टी20 वर्ल्ड कप में सैमसन का शानदार प्रदर्शन
टी20 वर्ल्ड कप 2026 में संजू सैमसन का बल्ला लगातार गरजता रहा। उन्होंने सिर्फ पांच मैचों में 321 रन बनाए और उनका स्ट्राइक रेट 199.37 रहा। वह इस टूर्नामेंट में भारत के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बने।
सैमसन के प्रमुख आंकड़े
| मैच | रन | स्ट्राइक रेट | अवॉर्ड |
|---|---|---|---|
| 5 | 321 | 199.37 | प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट |
उनकी तेजतर्रार बल्लेबाजी ने भारत को कई मुश्किल परिस्थितियों से बाहर निकाला।
तीन बार शतक के करीब पहुंचे
सैमसन तीन अलग-अलग मौकों पर शतक के करीब पहुंचे, लेकिन हर बार उन्होंने टीम की जरूरत को ध्यान में रखते हुए जोखिम भरी बल्लेबाजी जारी रखी।
सैमसन की बड़ी पारियां
| मैच | रन |
|---|---|
| वेस्टइंडीज (सुपर-8) | 97* |
| इंग्लैंड (सेमीफाइनल) | 89 |
| न्यूजीलैंड (फाइनल) | 89 |
वेस्टइंडीज के खिलाफ सुपर-8 मुकाबला भारत के लिए ‘करो या मरो’ जैसा था। उस मैच में सैमसन ने नाबाद 97 रन बनाकर टीम को जीत दिलाई।
“100 का ख्याल आया था, लेकिन…”
टी20 वर्ल्ड कप के बाद इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में संजू सैमसन ने स्वीकार किया कि उनके मन में शतक लगाने का विचार जरूर आया था।
उन्होंने कहा:
“मैं ऐसा नहीं कहूंगा कि 100 के बारे में सोचा ही नहीं। इंसान हूं, तो मन में आता है कि यार एक शतक लग जाए तो मजा आ जाएगा। लेकिन फिर मैंने खुद से पूछा कि मेरे रन कैसे बन रहे हैं। जब मैंने बल्लेबाजी शुरू की थी, तब शतक के बारे में नहीं सोच रहा था, इसलिए उसी प्रोसेस को फॉलो करता रहा।”
सैमसन ने कहा कि 80 या 90 के स्कोर पर पहुंचने के बाद भी उनका फोकस सिर्फ टीम की जरूरत पर था।
टीम पहले, रिकॉर्ड बाद में
भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर भी लगातार यह बात कहते रहे हैं कि टीम के अंदर व्यक्तिगत रिकॉर्ड से ज्यादा टीम की सफलता को महत्व दिया जाना चाहिए।
सैमसन ने भी इस सोच का समर्थन किया।
उन्होंने कहा:
“टीम मीटिंग में साफ कहा गया था कि कोई पर्सनल माइलस्टोन नहीं होना चाहिए। श्रीलंका सीरीज से ही सूर्या और गौतम भाई ने यह साफ कर दिया था कि टीम पहले है।”
प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिलने से टूट गए थे
सैमसन ने एक और बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि टी20 वर्ल्ड कप के दौरान शुरुआती मैचों में प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिलने से वह काफी निराश हो गए थे।
उन्होंने कहा:
“मैं बहुत बेचैन था क्योंकि मेरा सपना वर्ल्ड कप जीतना था। लेकिन मैं प्लेइंग इलेवन में भी नहीं था, इसलिए मैं पूरी तरह टूट गया था।”
इस दौरान उन्होंने खुद को कुछ दिनों के लिए सबसे अलग कर लिया था।
खुद को फिर से संभाला
सैमसन ने बताया कि उन्होंने खुद को फिर से मानसिक रूप से तैयार किया।
उन्होंने कहा कि वह जानते थे कि क्रिकेट कभी भी मौका दे सकता है, इसलिए उन्होंने खुद को तैयार रखना शुरू किया।
जब मौका मिला, तो उन्होंने उसका पूरा फायदा उठाया और टूर्नामेंट के सबसे अहम खिलाड़ी बन गए।















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