T20 – टी20 क्रिकेट अब उस मोड़ पर पहुंच चुका है जहां सिर्फ “अच्छी गेंदबाजी” काफी नहीं रह गई… और यही बात भारत के पूर्व कप्तान और विश्व कप विजेता कोच राहुल द्रविड़ ने भी खुलकर कही है। द्रविड़ का मानना है कि पिछले कुछ सालों में बल्लेबाजी का अंदाज इतनी तेजी से बदला है कि गेंदबाजों को अब survive करने के लिए अपने skills को बिल्कुल नए level पर ले जाना होगा।
दिलचस्प बात ये है कि यह बयान ऐसे समय आया है जब IPL और इंटरनेशनल टी20 क्रिकेट में लगातार 200+ स्कोर देखने को मिल रहे हैं। कई मैचों में तो 250 रन भी सुरक्षित नहीं लगते। ऐसे माहौल में द्रविड़ ने साफ कहा कि बल्लेबाज फिलहाल खेल में गेंदबाजों से “काफी आगे” दिखाई दे रहे हैं।
राहुल द्रविड़ ने टी20 बल्लेबाजी में बदलाव पर क्या कहा?
भारत को 2024 टी20 विश्व कप जिताने वाले राहुल द्रविड़ इस समय डबलिन में हैं, जहां उन्हें यूरोपियन टी20 प्रीमियर लीग (ETPL) की डबलिन फ्रेंचाइजी से जोड़ा गया है।
PTI से बातचीत में द्रविड़ ने कहा:
“पिछले दो-तीन वर्षों में बल्लेबाजी में जो बदलाव देखने को मिले हैं, उसे देखते हुए गेंदबाजों को उस स्तर तक पहुंचने के लिए काफी मेहनत करनी होगी।”
उन्होंने माना कि आधुनिक बल्लेबाज अब मैदान के उन हिस्सों में भी बड़े शॉट खेल रहे हैं जिन्हें पहले “कम scoring zones” माना जाता था।
अभिषेक शर्मा और युवा बल्लेबाजों की जमकर तारीफ
द्रविड़ ने खास तौर पर भारत के युवा बल्लेबाजों की तारीफ की और कहा कि नई generation ने powerplay batting का तरीका ही बदल दिया है।
उन्होंने जिन खिलाड़ियों का जिक्र किया उनमें शामिल थे:
- अभिषेक शर्मा
- वैभव सूर्यवंशी
- आयुष म्हात्रे
- प्रियांश आर्य
द्रविड़ के मुताबिक ये बल्लेबाज शुरुआत से ही bowlers पर हमला बोलते हैं और risk लेने से बिल्कुल नहीं डरते।
उन्होंने कहा:
“छक्के लगाने की क्षमता और मैदान के अलग-अलग हिस्सों में शॉट खेलने की कला में जबरदस्त सुधार हुआ है।”
बल्लेबाज टी20 की जरूरतों के हिसाब से ज्यादा तेजी से ढले
द्रविड़ ने यह भी स्वीकार किया कि फिलहाल बल्लेबाजों ने T20 क्रिकेट की मांगों के अनुसार खुद को गेंदबाजों की तुलना में ज्यादा बेहतर ढंग से ढाला है।
उनके मुताबिक:
- बल्लेबाज नई तकनीक अपना रहे हैं
- unconventional shots बढ़े हैं
- strike rate अब average से ज्यादा अहम हो चुका है
- power-hitting नई normal बन चुकी है
उन्होंने कहा:
“अगर संतुलन की बात करें तो इस समय बल्लेबाज, गेंदबाजों से आगे दिखाई देते हैं।”
हालांकि द्रविड़ को उम्मीद है कि अगले कुछ वर्षों में गेंदबाज भी वापसी कर सकते हैं।
क्या गेंदबाजों को मदद की जरूरत है?
यह सवाल लंबे समय से क्रिकेट जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है।
Flat pitches, छोटी boundaries और heavy bats की वजह से गेंदबाजों पर दबाव लगातार बढ़ा है। द्रविड़ भी मानते हैं कि bowlers को कुछ support की जरूरत है।
उन्होंने कहा:
“विकेट थोड़े चुनौतीपूर्ण होने चाहिए ताकि गेंदबाजों को भी मदद मिल सके।”
उन्होंने यह भी माना कि boundary size बढ़ाना practical solution नहीं है।
क्या दो बाउंसर प्रति ओवर समाधान हो सकता है?
हाल के वर्षों में कई पूर्व क्रिकेटरों ने सुझाव दिया है कि टी20 में bowlers को प्रति ओवर दो बाउंसर की अनुमति मिलनी चाहिए।
जब द्रविड़ से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने सीधे समर्थन या विरोध नहीं किया, लेकिन संकेत दिए कि कोई भी ऐसा नियम जो गेंदबाजों को थोड़ी मदद दे, उस पर विचार किया जा सकता है।
उन्होंने कहा:
“कोई भी ऐसी चीज जिससे गेंदबाजों को थोड़ी मदद मिले, उस पर विचार हो सकता है।”
हालांकि उनका मानना है कि आने वाले समय में गेंदबाज नए variations और swing के जरिए खुद को बेहतर ढंग से adapt कर लेंगे।
टेस्ट क्रिकेट का उदाहरण देकर समझाया संतुलन
द्रविड़ ने बातचीत में टेस्ट क्रिकेट का उदाहरण भी दिया।
उन्होंने कहा कि आजकल टेस्ट मैच तेजी से खत्म हो रहे हैं और वहां गेंदबाजों का प्रभाव फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है।
उनके मुताबिक:
- टेस्ट क्रिकेट में attacking approach बढ़ी है
- बल्लेबाज तेजी से रन बना रहे हैं
- इसका फायदा गेंदबाजों को wickets के रूप में मिल रहा है
यानी क्रिकेट का संतुलन समय के साथ बदलता रहता है।
IPL और आधुनिक टी20 क्रिकेट ने बदली तस्वीर
अगर मौजूदा IPL seasons पर नजर डालें तो द्रविड़ की बात पूरी तरह सही लगती है।
अब regularly देखने को मिल रहा है:
- 200+ totals
- powerplay में 70-80 रन
- middle overs में aggressive hitting
- lower order द्वारा भी 200+ strike rate
पहले जहां anchor innings की अहमियत ज्यादा थी, अब intent और acceleration सबसे बड़ी जरूरत बन चुके हैं।
संतुलन ही क्रिकेट की असली खूबसूरती
राहुल द्रविड़ का सबसे अहम point शायद यही था कि क्रिकेट पूरी तरह बल्लेबाजों या गेंदबाजों का खेल नहीं बनना चाहिए।
उन्होंने कहा:
“हम नहीं चाहते कि संतुलन किसी एक तरफ बहुत ज्यादा झुक जाए।”
यानी fans को वही क्रिकेट पसंद आता है जहां:
- बल्लेबाज बड़े shots खेलें
- लेकिन गेंदबाज भी मुकाबला करें
- pitches balanced हों
- और हर मैच में competition बना रहे















