BCCI – भारतीय राजनीति में “रिजॉर्ट पॉलिटिक्स” शब्द पिछले कुछ वर्षों में खूब चर्चा में रहा है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसकी झलक क्रिकेट प्रशासन में दो दशक पहले ही दिखाई दे चुकी थी।
बीसीसीआई के 2005 के ऐतिहासिक चुनाव में सत्ता की लड़ाई इतनी तीखी थी कि बोर्ड सदस्यों को होटलों में ठहराया गया, उड़ानों के रूट बदलवाने की कोशिश हुई और विरोधी खेमे के समर्थकों को वोटिंग तक पहुंचने से रोकने के आरोप लगे। यह दावा किसी और ने नहीं, बल्कि आईपीएल के संस्थापक और पूर्व कमिश्नर ललित मोदी ने किया है।
एक हालिया इंटरव्यू में ललित मोदी ने उस चुनावी जंग के कई दिलचस्प किस्से साझा किए, जिसमें एक तरफ शरद पवार का गुट था और दूसरी ओर तत्कालीन बीसीसीआई अध्यक्ष जगमोहन डालमिया का मजबूत खेमा।
मोदी का कहना है कि यही चुनाव आगे चलकर भारतीय क्रिकेट में उस बदलाव की शुरुआत बना, जिसने बाद में आईपीएल जैसी क्रांतिकारी लीग को जन्म दिया।
जब शरद पवार एक वोट से हार गए थे
ललित मोदी ने रिद्धिमा पाठक के यूट्यूब चैनल पर बातचीत में बताया कि उन्होंने और उनके साथियों ने शरद पवार को बीसीसीआई अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने के लिए तैयार किया था।
उनके मुताबिक, शुरुआती चुनाव में पवार की हार बेहद मामूली अंतर से हुई।
2004-05 की चुनावी कहानी
| मुद्दा | विवरण |
|---|---|
| उम्मीदवार | शरद पवार बनाम जगमोहन डालमिया |
| हार का अंतर | 1 वोट |
| मुख्य विवाद | गुटबाजी और समर्थन बदलना |
| प्रमुख नाम | अजीत शिरके, दयानेश्वर अगाशे |
मोदी के अनुसार, पुणे क्रिकेट एसोसिएशन के भीतर मतभेदों का असर चुनाव पर पड़ा और दयानेश्वर अगाशे कथित तौर पर डालमिया खेमे के साथ चले गए, जिससे समीकरण बदल गए।
2005 का चुनाव बना प्रतिष्ठा की लड़ाई
पहली हार के बाद पवार गुट ने अगले चुनाव की तैयारी और आक्रामक तरीके से की।
मोदी के अनुसार, उस समय क्रिकेट प्रशासन में कई बड़े नाम अलग-अलग पक्षों में बंटे हुए थे।
उन्होंने कहा कि चुनाव इतना महत्वपूर्ण हो चुका था कि दोनों पक्ष जीत के लिए हरसंभव रणनीति अपना रहे थे।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुआ मतदान
ललित मोदी ने दावा किया कि चुनाव को लेकर कानूनी विवाद इतना बढ़ गया था कि मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
उनके अनुसार, शीर्ष अदालत के निर्देश पर दो सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की निगरानी में चुनाव कराया गया।
चुनाव से जुड़ी प्रमुख बातें
| तथ्य | जानकारी |
|---|---|
| चुनाव तिथि | 29 नवंबर 2005 |
| स्थान | कोलकाता |
| निगरानी | सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक |
| मुख्य मुकाबला | पवार गुट बनाम डालमिया गुट |
“होटलों में रखे गए थे सदस्य”
इंटरव्यू का सबसे चर्चित हिस्सा वह था, जब ललित मोदी ने कथित “रिजॉर्ट पॉलिटिक्स” का जिक्र किया।
उनके अनुसार, चुनाव से पहले दोनों पक्ष अपने समर्थकों को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे थे।
मोदी ने दावा किया:
“कुछ सदस्यों को होटल के कमरों में रखा गया था। कुछ लोगों की फ्लाइट डाइवर्ट कर दी गई थी। हमने भी उनके कुछ सदस्यों की फ्लाइट डाइवर्ट करवाई थी।”
हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है, लेकिन मोदी का कहना है कि चुनाव की अहमियत इतनी ज्यादा थी कि दोनों खेमे किसी भी तरह जीत सुनिश्चित करना चाहते थे।
मीटिंग जो आधे घंटे की थी, शाम तक चली
मोदी ने उस दिन की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया में कई कानूनी और प्रक्रियागत विवाद सामने आए।
उनके मुताबिक, जिस बैठक को कुछ ही समय में समाप्त होना था, वह घंटों तक चली।
उन्होंने बताया कि:
- दरवाजे बंद कर दिए गए थे
- पुलिस व्यवस्था करनी पड़ी
- कानूनी बहसें होती रहीं
- चुनाव प्रक्रिया में देरी हुई
मोदी का दावा है कि अंततः सुप्रीम कोर्ट के पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में मतदान पूरा कराया गया।
चुनाव जीतने के बाद बदला भारतीय क्रिकेट
ललित मोदी का मानना है कि 2005 का चुनाव भारतीय क्रिकेट के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
उनके अनुसार, शरद पवार गुट की जीत के बाद क्रिकेट प्रशासन में नई सोच आई, जिसने आगे चलकर आईपीएल की नींव रखी।
आईपीएल लॉन्च की दिशा में अहम घटनाएं
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 2005 | पवार गुट की बीसीसीआई चुनाव में जीत |
| 2006-07 | नई व्यावसायिक योजनाओं पर काम |
| 2008 | आईपीएल का पहला सीजन |
ललित मोदी ने किन नेताओं का लिया नाम?
मोदी ने इंटरव्यू में कई प्रभावशाली क्रिकेट प्रशासकों और नेताओं का भी उल्लेख किया।
उन्होंने दावा किया कि:
- अरुण जेटली
- राजीव शुक्ला
- एन. श्रीनिवासन
- अनुराग ठाकुर
जैसे नाम उस समय अलग-अलग खेमों से जुड़े हुए थे।
हालांकि इन राजनीतिक और प्रशासनिक समीकरणों को लेकर अलग-अलग पक्षों की अपनी व्याख्या रही है।















