Nabi – रणजी ट्रॉफी 2025-26 में 60 विकेट लेकर जम्मू-कश्मीर को पहला खिताब दिलाने वाले तेज गेंदबाज आकिब नबी को अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट के लिए भारतीय टीम में जगह नहीं मिलने पर बहस तेज हो गई है।
अब इस मुद्दे पर भारत के अनुभवी तेज गेंदबाज ईशांत शर्मा के बचपन के कोच श्रवण कुमार ने भी खुलकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि आकिब नबी जैसे प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी को सिर्फ “बैक-अप” या नेट गेंदबाज बनाकर रखना घरेलू क्रिकेट के महत्व को कम करता है।
श्रवण कुमार ने साफ शब्दों में कहा कि अगर रणजी ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन के बाद भी किसी खिलाड़ी को टेस्ट टीम में मौका नहीं मिलता, तो फिर घरेलू क्रिकेट खेलने का उद्देश्य क्या रह जाता है? उनके मुताबिक, नबी को अफगानिस्तान के खिलाफ मुल्लांपुर में 6 जून से शुरू होने वाले एकमात्र टेस्ट की प्लेइंग इलेवन में होना चाहिए था।
60 विकेट लेने के बाद भी नहीं मिला मौका
आकिब नबी ने इस रणजी सीजन में गेंद से शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में 60 विकेट चटकाए और जम्मू-कश्मीर को इतिहास में पहली बार रणजी ट्रॉफी चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई।
इसके बावजूद चयनकर्ताओं ने उन्हें मुख्य टीम में शामिल नहीं किया। बीसीसीआई ने उन्हें केवल नेट अभ्यास सत्र के लिए चुने गए छह गेंदबाजों में जगह दी है।
आकिब नबी का रणजी ट्रॉफी प्रदर्शन
| उपलब्धि | आंकड़ा |
|---|---|
| विकेट | 60 |
| टीम | जम्मू-कश्मीर |
| टूर्नामेंट | रणजी ट्रॉफी 2025-26 |
| परिणाम | जम्मू-कश्मीर पहली बार चैंपियन |
“बैक-अप गेंदबाज नहीं, प्लेइंग इलेवन में होना चाहिए था”
पीटीआई से बातचीत में श्रवण कुमार ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि नबी को सिर्फ बैक-अप गेंदबाज कहना उनके प्रदर्शन के साथ अन्याय है।
उन्होंने कहा:
“अपनी टीम को रणजी चैंपियन बनाने और 60 विकेट लेने के बाद भी आकिब नबी को अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट मैच के लिए क्यों नहीं चुना जा रहा है? यह बैक-अप गेंदबाज वाली बात क्या है?”
कोच के अनुसार, नबी को नेट गेंदबाज के रूप में इस्तेमाल करना उनके शानदार सीजन की उपलब्धियों को नजरअंदाज करने जैसा है।
चयनकर्ताओं पर उठाए गंभीर सवाल
श्रवण कुमार का मानना है कि भारतीय चयनकर्ता घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को पर्याप्त महत्व नहीं दे रहे।
उन्होंने कहा कि जब एक खिलाड़ी पूरे सीजन में 60 विकेट लेकर अपनी टीम को खिताब दिलाता है, तो उसे टेस्ट टीम में जगह मिलनी चाहिए। उनके अनुसार, कुछ ऐसे गेंदबाजों को मौका दिया जा रहा है जिनका घरेलू रिकॉर्ड नबी जितना प्रभावशाली नहीं है।
कोच की प्रमुख आपत्तियां
| मुद्दा | टिप्पणी |
|---|---|
| 60 विकेट के बावजूद चयन नहीं | प्रदर्शन की अनदेखी |
| बैक-अप भूमिका | प्रतिभा का उचित सम्मान नहीं |
| घरेलू क्रिकेट का महत्व | सवालों के घेरे में |
| चयन प्रक्रिया | पारदर्शिता पर बहस |
“फिर रणजी ट्रॉफी खेलने का मतलब क्या है?”
श्रवण कुमार की सबसे तीखी टिप्पणी रणजी ट्रॉफी की प्रासंगिकता को लेकर रही।
उन्होंने कहा:
“रणजी ट्रॉफी खेलने का क्या मतलब है? बीसीसीआई को या तो रणजी ट्रॉफी खत्म कर देनी चाहिए या शानदार प्रदर्शन पर विचार करना चाहिए।”
उनका मानना है कि अगर घरेलू क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को राष्ट्रीय टीम में मौका नहीं मिलेगा, तो युवा खिलाड़ियों का इस टूर्नामेंट पर भरोसा कम हो सकता है।
गुरनूर बराड़ को मिली प्राथमिकता
आकिब नबी की जगह चयनकर्ताओं ने पंजाब के लंबे कद के तेज गेंदबाज गुरनूर बराड़ को टीम में शामिल किया है। इसी फैसले को लेकर क्रिकेट जगत में चर्चा हो रही है।
हालांकि चयन समिति की ओर से इस निर्णय के पीछे कोई विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि टीम प्रबंधन भविष्य को ध्यान में रखते हुए अलग विकल्पों पर विचार कर रहा है।
अफगानिस्तान टेस्ट से जुड़े प्रमुख तथ्य
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| मुकाबला | भारत बनाम अफगानिस्तान |
| प्रारूप | एकमात्र टेस्ट |
| शुरुआत | 6 जून |
| स्थान | मुल्लांपुर |
| आकिब नबी की स्थिति | बैक-अप/नेट गेंदबाज |
| गुरनूर बराड़ | मुख्य टीम में शामिल |
क्या घरेलू प्रदर्शन को पर्याप्त महत्व मिल रहा है?
आकिब नबी का मामला एक बार फिर उस पुराने सवाल को सामने ले आया है कि क्या भारतीय क्रिकेट में घरेलू प्रदर्शन को पर्याप्त महत्व दिया जा रहा है?
रणजी ट्रॉफी लंबे समय से भारतीय क्रिकेट की सबसे प्रतिष्ठित घरेलू प्रतियोगिता रही है। इसी टूर्नामेंट से निकलकर कई खिलाड़ी भारतीय टीम तक पहुंचे हैं। ऐसे में 60 विकेट लेने वाले गेंदबाज को टेस्ट टीम से बाहर रखना स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन गया है।















