Gambhir – टेस्ट क्रिकेट में खराब रोशनी की वजह से खेल रुकना लंबे समय से बहस का विषय रहा है। कई बार मैच ऐसे मोड़ पर पहुंच जाते हैं, जहां नतीजा निकल सकता है, लेकिन अंपायरों को खराब रोशनी के कारण खेल रोकना पड़ता है।
अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने इस समस्या का समाधान तलाशने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। आईसीसी ने सामान्य टेस्ट मैचों में जरूरत पड़ने पर फ्लडलाइट्स के तहत गुलाबी गेंद के इस्तेमाल की मंजूरी दी है और भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने इस फैसले का खुलकर समर्थन किया है।
खराब रोशनी में गुलाबी गेंद के इस्तेमाल का समर्थन
अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट मैच से पहले गौतम गंभीर ने आईसीसी के इस नए फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि अगर किसी मैच का नतीजा निकालने का मौका हो तो उसे हर हाल में हासिल करने की कोशिश की जानी चाहिए।
गंभीर का मानना है कि खराब रोशनी के कारण खेल रुकने से दोनों टीमों की मेहनत पर असर पड़ता है और कई बार महत्वपूर्ण मुकाबले ड्रॉ की ओर बढ़ जाते हैं।
उन्होंने कहा, “मुझे यह फैसला पसंद है। मेरा हमेशा से मानना रहा है कि अगर मैच का परिणाम निकालने का अवसर मौजूद है तो उसे हर हाल में किया जाना चाहिए।”
आईसीसी ने क्या नया नियम बनाया है?
आईसीसी बोर्ड की हालिया बैठक में फैसला लिया गया कि दोनों टीमों की सहमति होने पर पारंपरिक टेस्ट मैचों में खराब रोशनी की स्थिति में गुलाबी गेंद का परीक्षण किया जा सकेगा।
योजना के मुताबिक मैच की शुरुआत लाल गेंद से होगी, लेकिन अगर शाम के समय रोशनी कम हो जाती है और फ्लडलाइट्स की जरूरत पड़ती है, तो गुलाबी गेंद का इस्तेमाल किया जा सकेगा।
नए नियम की मुख्य बातें
| नियम | जानकारी |
|---|---|
| मैच की शुरुआत | लाल गेंद से |
| खराब रोशनी की स्थिति | गुलाबी गेंद का इस्तेमाल |
| फ्लडलाइट्स | जरूरत पड़ने पर चालू होंगी |
| दोनों टीमों की सहमति | अनिवार्य |
| लागू होने की तारीख | 1 अक्टूबर |
क्यों अहम माना जा रहा है यह फैसला?
टेस्ट क्रिकेट में कई बार खराब रोशनी की वजह से महत्वपूर्ण ओवर नहीं फेंके जा पाते। खासकर ऐसे मुकाबलों में, जहां विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) की दौड़ दांव पर लगी हो, एक ड्रॉ मैच पूरे समीकरण बदल सकता है।
गौतम गंभीर ने भी इसी पहलू को रेखांकित करते हुए कहा कि कल्पना कीजिए, कोई टीम WTC फाइनल में पहुंचने के लिए आखिरी टेस्ट खेल रही हो और खराब रोशनी की वजह से नतीजा ही न निकल पाए।
उनके मुताबिक अगर दोनों टीमें सहमत हैं और मैच का रिजल्ट संभव है, तो गुलाबी गेंद का इस्तेमाल एक सकारात्मक कदम है।
बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी को लेकर भी हो सकता है फायदा
गौतम गंभीर के समर्थन के पीछे एक व्यावहारिक कारण भी माना जा रहा है। भारत को फरवरी-मार्च में घरेलू मैदान पर बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी खेलनी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक इस सीरीज का तीसरा टेस्ट गुवाहाटी और आखिरी टेस्ट रांची में प्रस्तावित है। देश के पूर्वी हिस्सों में सूर्यास्त अपेक्षाकृत जल्दी होता है, जिससे शाम के समय ओवरों पर असर पड़ सकता है।
ऐसी स्थिति में गुलाबी गेंद के इस्तेमाल से ज्यादा खेल संभव हो सकेगा।
गुलाबी गेंद के संभावित फायदे
| फायदा | असर |
|---|---|
| खराब रोशनी में बेहतर दृश्यता | खेल जारी रह सकेगा |
| ज्यादा ओवर संभव | मैच का नतीजा निकलने की संभावना |
| WTC जैसे बड़े टूर्नामेंट में मदद | अंक तालिका पर असर कम |
| फ्लडलाइट्स के साथ बेहतर संतुलन | खिलाड़ियों और दर्शकों को फायदा |
खिलाड़ियों के लिए आसान नहीं होगा बदलाव
हालांकि गौतम गंभीर ने यह भी स्वीकार किया कि एक ही मैच के दौरान लाल गेंद से गुलाबी गेंद पर स्विच करना खिलाड़ियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
गुलाबी गेंद की सीम, स्विंग और विजिबिलिटी लाल गेंद से अलग होती है। बल्लेबाजों और गेंदबाजों दोनों को नई परिस्थितियों के अनुसार खुद को जल्दी ढालना पड़ेगा।
इसके बावजूद गंभीर का मानना है कि अगर विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल जैसी बड़ी उपलब्धि दांव पर हो, तो खिलाड़ियों को इन चुनौतियों के लिए तैयार रहना चाहिए।
टेस्ट क्रिकेट में नया प्रयोग बदल सकता है तस्वीर
पिछले कुछ वर्षों में डे-नाइट टेस्ट मैचों में गुलाबी गेंद का इस्तेमाल सफल रहा है। अब आईसीसी उसी अनुभव का उपयोग पारंपरिक टेस्ट मैचों में भी करना चाहती है, ताकि मौसम और रोशनी जैसी बाधाओं का असर कम किया जा सके।
अगर यह प्रयोग सफल रहता है तो आने वाले समय में टेस्ट क्रिकेट के नियमों में और भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं।















