Ganguly : Steve Waugh को टॉस के लिए इंतजार कराने पर Srinath बोले- मैं होता तो कुछ मैचों के लिए बैन कर देता

Atul Kumar
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Ganguly – भारतीय क्रिकेट के इतिहास में सौरव गांगुली और स्टीव वॉ की प्रतिद्वंद्विता का किस्सा आज भी काफी मशहूर है। 2001 की ऐतिहासिक बॉर्डर-गावस्कर टेस्ट सीरीज के दौरान कोलकाता के ईडन गार्डन्स में गांगुली ने टॉस के लिए ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव वॉ को काफी देर तक इंतजार कराया था।

अब भारत के पूर्व तेज गेंदबाज जवागल श्रीनाथ ने उस पुराने किस्से को याद करते हुए मजेदार बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर वह उस समय मैच रेफरी होते तो गांगुली को कुछ मैचों के लिए प्रतिबंधित कर देते।

Steve Waugh को कराया था Toss के लिए इंतजार

2001 की भारत-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सीरीज भारतीय क्रिकेट के इतिहास की सबसे यादगार सीरीज में से एक रही।

कोलकाता के ईडन गार्डन्स में खेले गए टेस्ट से पहले सौरव गांगुली टॉस के लिए समय पर मैदान पर नहीं पहुंचे थे।

ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव वॉ मैदान पर गांगुली का इंतजार करते रहे।

बाद में गांगुली ने देरी की वजह बताते हुए कहा था कि उन्हें अपना ब्लेजर नहीं मिल रहा था, जिसकी वजह से वह टॉस के लिए देर से पहुंचे।

उस समय इस घटना को लेकर काफी चर्चा हुई थी और इसे ऑस्ट्रेलियाई टीम को परेशान करने वाली गांगुली की गेममैनशिप के तौर पर भी देखा गया।

Javagal Srinath बोले- ‘मैं होता तो Ban कर देता’

श्रीनाथ ने EEMAGINE इवेंट में इस घटना को याद करते हुए कहा:

“मैं सौरव को कुछ मैचों के लिए बैन कर देता!”

श्रीनाथ का यह बयान उस घटना को लेकर उनके मजाकिया अंदाज को दिखाता है।

वर्तमान में श्रीनाथ आईसीसी के मैच रेफरी हैं। ऐसे में उनका यह कहना दिलचस्प रहा कि अगर वह 2001 में मैच रेफरी होते तो गांगुली पर कार्रवाई कर सकते थे।

हालांकि, उन्होंने यह बात हल्के-फुल्के अंदाज में कही और साथ ही गांगुली की कप्तानी की जमकर तारीफ भी की।

Ganguly की Leadership की Srinath ने की तारीफ

श्रीनाथ ने सौरव गांगुली की कप्तानी को भारतीय क्रिकेट के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया।

उनके मुताबिक, गांगुली की सबसे बड़ी खासियतों में से एक थी कि उन्होंने युवराज सिंह, हरभजन सिंह और वीरेंद्र सहवाग जैसे युवा खिलाड़ियों को तैयार किया और उन्हें बड़े मंच पर खेलने का आत्मविश्वास दिया।

गांगुली की कप्तानी में भारतीय टीम ने एक नई आक्रामक पहचान बनाई।

टीम के खिलाड़ियों में विपक्षी टीमों के खिलाफ मुकाबला करने का विश्वास बढ़ा और भारतीय क्रिकेट का रवैया भी बदला।

Match-Fixing Scandal के बाद आया बदलाव

श्रीनाथ ने भारतीय क्रिकेट में आए इस बदलाव को 1990 के दशक के आखिर में सामने आए मैच-फिक्सिंग विवाद के बाद की परिस्थितियों से भी जोड़ा।

उनके मुताबिक, उस दौर में खिलाड़ियों के सामने भारतीय क्रिकेट की छवि को फिर से मजबूत करने की चुनौती थी।

खिलाड़ियों में यह दृढ़ संकल्प था कि वे दुनिया को साबित करें कि क्रिकेट एक महान और साफ खेल है।

श्रीनाथ ने कहा कि हर खिलाड़ी भारतीय क्रिकेट की छवि को वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध था।

Top Players की एकजुटता बनी Team India की ताकत

श्रीनाथ के मुताबिक, उस दौर में भारतीय टीम की लीडरशिप सिर्फ कप्तान तक सीमित नहीं थी।

टीम के शीर्ष चार-पांच खिलाड़ी एक ही सोच के साथ आगे बढ़ रहे थे।

इस एकजुटता का फायदा भारतीय टीम को मिला।

टीम ने घरेलू मैदान पर लगातार बेहतर प्रदर्शन करना शुरू किया और धीरे-धीरे विदेशी परिस्थितियों में भी जीत हासिल करने का आत्मविश्वास विकसित किया।

1999 के बाद बदलने लगा था India का रवैया

श्रीनाथ ने भारतीय टीम के विदेशी रिकॉर्ड का भी जिक्र किया।

उनके मुताबिक, 1991 से लेकर 1997-98 के बीच भारत को विदेशी धरती पर जीत हासिल करने में काफी संघर्ष करना पड़ा।

लेकिन 1999 के बाद भारतीय क्रिकेट में चीजें बदलने लगीं।

टीम के खिलाड़ियों में विदेश में जीत हासिल करने की मानसिकता विकसित हुई और इसी दौर में भारत ने मजबूत विदेशी टीमों को चुनौती देना शुरू किया।

सौरव गांगुली की कप्तानी ने इस बदलाव को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

2001 की Australia Series आज भी यादगार

2001 की बॉर्डर-गावस्कर सीरीज भारतीय क्रिकेट के लिए एक टर्निंग पॉइंट मानी जाती है।

भारत ने चार मैचों की? नहीं, तीन टेस्ट की सीरीज 2-1 से जीती थी।

मुंबई में पहला टेस्ट हारने के बाद भारत ने कोलकाता में ऐतिहासिक वापसी की और फिर चेन्नई में निर्णायक मुकाबला जीतकर सीरीज अपने नाम कर ली।

ईडन गार्डन्स टेस्ट में राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण की ऐतिहासिक बल्लेबाजी और हरभजन सिंह की शानदार गेंदबाजी आज भी क्रिकेट इतिहास में याद की जाती है।

2003 World Cup Final में Srinath पहले Batting के पक्ष में थे

श्रीनाथ ने 2003 विश्व कप फाइनल का भी जिक्र किया।

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए उस फाइनल में भारतीय टीम को हार का सामना करना पड़ा था।

श्रीनाथ ने बताया कि वह उन खिलाड़ियों में शामिल थे जो पहले बल्लेबाजी करना चाहते थे।

उनका मानना था कि भारत को पहले बल्लेबाजी करके बड़ा स्कोर बनाना चाहिए और ऑस्ट्रेलिया पर दबाव डालना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वह हमेशा पहले बल्लेबाजी करके विपक्षी टीम पर दबाव बनाने के पक्ष में रहे।

Ganguly की सोच थी अलग

2003 विश्व कप फाइनल में टॉस भारत के पक्ष में आया था और सौरव गांगुली ने पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया।

श्रीनाथ की सोच इससे अलग थी।

वह पहले बल्लेबाजी करने के पक्ष में थे, लेकिन कप्तान का फैसला हो जाने के बाद उन्होंने टीम के फैसले का सम्मान किया।

श्रीनाथ ने माना कि एक बार फैसला हो जाने के बाद टीम को उसी योजना के साथ आगे बढ़ना होता है।

Australia की टीम थी बेहद मजबूत

श्रीनाथ ने यह भी माना कि उस समय ऑस्ट्रेलिया की टीम बेहद मजबूत थी।

2003 विश्व कप में रिकी पोंटिंग की टीम शानदार फॉर्म में थी और फाइनल में उसने भारत को एकतरफा अंदाज में हराया।

पोंटिंग ने 140 रन की शानदार पारी खेली थी।

भारत उस मैच में 125 रन पर ऑलआउट हो गया था और ऑस्ट्रेलिया ने विश्व कप खिताब अपने नाम किया।

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Atul Kumar

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क्रिकेट को देखता हूं और समझता हूं और आप लोगों तक नए-नए सूचनाएं पहुंचाने की कोशिश करता हूं। लाइफ में हमेशा नई-नई चीजों को सीखने का शौक रखता हु, पुराने न्यूज़ को नए तरीके से प्रस्तुत करता हूं।

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