Gambhir – भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप (WTC) 2025-27 की अंक तालिका में भारत के पांचवें स्थान पर होने के बावजूद टीम के टेस्ट प्रदर्शन का बचाव किया है। गंभीर का कहना है कि WTC रैंकिंग उनके लिए मायने नहीं रखती और भारतीय टीम टेस्ट क्रिकेट में संघर्ष नहीं कर रही है।
गंभीर ने श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टेस्ट की पूर्व संध्या पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि भारतीय टीम पिछले साल से अच्छा टेस्ट क्रिकेट खेल रही है। हालांकि, टीम के हालिया टेस्ट रिकॉर्ड और WTC की स्थिति को देखते हुए गंभीर का बयान चर्चा का विषय बन गया है।
भारत ने श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की मौजूदा सीरीज का पहला मुकाबला जीत लिया है। लेकिन WTC फाइनल में जगह बनाने के लिए टीम इंडिया को अभी लंबा सफर तय करना होगा।
गंभीर बोले- रैंकिंग मायने नहीं रखती
गौतम गंभीर ने WTC तालिका में भारत की स्थिति को लेकर कहा कि उनका ध्यान रैंकिंग पर नहीं, बल्कि इस बात पर है कि टीम भविष्य में क्रिकेट को किस नजरिए से देखती है।
उन्होंने कहा कि भारतीय टीम यह सोचने पर ध्यान दे रही है कि क्रिकेट में आगे कैसे बढ़ना है और टीम के सुधार के लिए कौन से फैसले सही होंगे।
गंभीर ने साफ कहा कि उनके लिए रैंकिंग मायने नहीं रखती और भारत टेस्ट क्रिकेट में संघर्ष नहीं कर रहा है।
क्या आंकड़े भी गंभीर की बात का समर्थन करते हैं?
गंभीर का बयान भले ही आत्मविश्वास से भरा हो, लेकिन भारतीय टीम के हालिया टेस्ट रिकॉर्ड को देखें तो तस्वीर कुछ अलग नजर आती है।
गंभीर के मुख्य कोच बनने के बाद भारत को टेस्ट क्रिकेट में कई बड़ी हार का सामना करना पड़ा है। खासकर न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज ने टीम इंडिया की टेस्ट क्रिकेट में कमजोरियों को उजागर किया।
भारत जैसी टीम के लिए घरेलू परिस्थितियों में लगातार हारना और विदेशी दौरों पर बड़े मुकाबले गंवाना गंभीर की कोचिंग के सामने बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है।
न्यूजीलैंड ने भारत को घर पर 3-0 से हराया
अक्टूबर-नवंबर 2024 में न्यूजीलैंड की टीम भारत दौरे पर आई थी। दोनों टीमों के बीच तीन टेस्ट मैचों की सीरीज खेली गई।
भारत को घरेलू परिस्थितियों में टेस्ट क्रिकेट की सबसे मजबूत टीमों में माना जाता है। लेकिन न्यूजीलैंड ने भारतीय टीम को उसी की धरती पर 3-0 से क्लीन स्वीप कर दिया।
भारतीय बल्लेबाजी और स्पिन गेंदबाजी दोनों ही अपेक्षाओं के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर सके। इस सीरीज की हार ने भारत के WTC अभियान को भी बड़ा झटका दिया।
ऑस्ट्रेलिया में भी भारत को मिली करारी हार
न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू हार के बाद भारत ने 2024-25 बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के लिए ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया।
पांच टेस्ट मैचों की सीरीज में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 3-1 से हराया। इस सीरीज में भारतीय टीम को कई क्षेत्रों में संघर्ष करना पड़ा।
इस हार के कारण भारत लगातार तीसरी बार WTC फाइनल में पहुंचने से भी चूक गया। टीम के लिए यह परिणाम काफी निराशाजनक रहा क्योंकि इससे पहले भारत WTC के शुरुआती दोनों चक्रों के फाइनल में पहुंचा था।
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भी मिली हार
भारत के टेस्ट संघर्ष का एक और उदाहरण दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू सीरीज को माना जा सकता है।
भारत को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज में 2-0 से हार का सामना करना पड़ा। यह परिणाम भी टीम के WTC अभियान और घरेलू टेस्ट रिकॉर्ड के लिए बड़ा झटका रहा।
हालांकि, इसके बाद भारत ने अफगानिस्तान के खिलाफ घरेलू मैदान पर एकमात्र टेस्ट जीता, लेकिन यह मुकाबला WTC का हिस्सा नहीं था।
श्रीलंका के खिलाफ जीत से मिली राहत
मौजूदा दौरे पर भारत ने श्रीलंका के खिलाफ पहले टेस्ट में जीत दर्ज करके सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है।
यह जीत भारतीय टीम के लिए सकारात्मक जरूर है, लेकिन WTC फाइनल की राह अभी भी आसान नहीं है।
भारत को श्रीलंका के खिलाफ मौजूदा सीरीज के अलावा आगे कई मजबूत टीमों से मुकाबले खेलने हैं। खासतौर पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की घरेलू सीरीज भारतीय टीम के WTC अभियान के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है।
WTC फाइनल की राह भारत के लिए क्यों मुश्किल?
WTC 2025-27 चक्र में भारत इस समय पांचवें स्थान पर है। ऐसे में फाइनल में जगह बनाने के लिए टीम को आने वाले मुकाबलों में लगातार जीत हासिल करनी होगी।
सिर्फ श्रीलंका के खिलाफ सीरीज जीतना पर्याप्त नहीं होगा। भारत को आने वाले बड़े मुकाबलों में भी बेहतर प्रदर्शन करना होगा।
ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की सीरीज भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक हो सकती है।
गंभीर के कार्यकाल में टेस्ट और व्हाइट-बॉल क्रिकेट की तस्वीर अलग
गौतम गंभीर के कार्यकाल में भारतीय टीम का प्रदर्शन टेस्ट और सीमित ओवरों के क्रिकेट में अलग-अलग रहा है।
टी20 और वनडे क्रिकेट में टीम इंडिया ने शानदार परिणाम हासिल किए हैं। गंभीर के मार्गदर्शन में भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी 2025 जीती और 2026 में टी20 विश्व कप का खिताब भी अपने नाम किया।
लेकिन टेस्ट क्रिकेट में टीम को न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ महत्वपूर्ण हार झेलनी पड़ी।
यही अंतर गंभीर की कोचिंग को लेकर सबसे बड़ी बहस का विषय बना हुआ है।
राहुल द्रविड़ के बाद गंभीर ने संभाली थी जिम्मेदारी
जून 2024 में भारत के टी20 विश्व कप जीतने के बाद राहुल द्रविड़ का मुख्य कोच के रूप में कार्यकाल समाप्त हुआ था।
इसके बाद जुलाई 2024 में गौतम गंभीर ने भारतीय टीम के मुख्य कोच की जिम्मेदारी संभाली। उनसे टेस्ट क्रिकेट में भी भारतीय टीम को मजबूत बनाए रखने की बड़ी उम्मीदें थीं।
शुरुआत में गंभीर के सामने एक मजबूत टेस्ट टीम थी, लेकिन इसके बाद लगातार कुछ बड़े परिणाम भारत के पक्ष में नहीं रहे।
गंभीर के बयान और आंकड़ों के बीच क्यों है बहस?
गंभीर का कहना है कि भारत टेस्ट क्रिकेट में संघर्ष नहीं कर रहा है। उनका जोर इस बात पर है कि टीम भविष्य की ओर देख रही है और सही फैसले लेने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
लेकिन दूसरी तरफ, भारत के हालिया टेस्ट परिणामों में न्यूजीलैंड के खिलाफ 3-0, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 3-1 और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 2-0 जैसी हार शामिल हैं।
यही कारण है कि गंभीर के बयान और आंकड़ों के बीच अंतर दिखाई देता है।
हालांकि, किसी टीम की मौजूदा स्थिति का आकलन केवल कुछ सीरीज के परिणामों से नहीं किया जा सकता। भारत के पास अभी WTC चक्र में कई महत्वपूर्ण मुकाबले बाकी हैं और टीम के पास अपनी स्थिति सुधारने का मौका मौजूद है।
अब गंभीर के सामने सबसे बड़ी चुनौती
गौतम गंभीर के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती टेस्ट क्रिकेट में भारतीय टीम को फिर से मजबूत बनाना है।
श्रीलंका के खिलाफ मौजूदा सीरीज में भारत को जीत की लय बनाए रखनी होगी। इसके बाद आने वाली बड़ी सीरीज में टीम को लगातार प्रदर्शन करना होगा।
अगर भारत WTC 2025-27 के फाइनल में पहुंचना चाहता है तो उसे आने वाले मुकाबलों में सिर्फ जीत ही नहीं, बल्कि निरंतरता भी दिखानी होगी।













