Chopra : पाकिस्तान के बाद बांग्लादेश – आकाश चोपड़ा की तुलना ने बढ़ाया विवाद

Atul Kumar
Published On:
Chopra

Chopra – क्रिकेट के मैदान से बाहर की बहस जब तेज़ हो जाती है, तो उसकी गूंज सोशल मीडिया से लेकर बोर्डरूम तक सुनाई देती है। मुस्तफिजुर रहमान का आईपीएल 2026 से बाहर होना ऐसा ही मामला बन गया है—और अब इस पर आकाश चोपड़ा ने खुलकर अपना पक्ष रख दिया है।

भारत के पूर्व ओपनर और मौजूदा चर्चित कमेंट्रेटर ने न सिर्फ बीसीसीआई के फैसले का समर्थन किया, बल्कि इसे मौजूदा हालात में “बिल्कुल जायज़” भी बताया।

आकाश की यह प्रतिक्रिया ऐसे वक्त आई है, जब क्रिकेट, राजनीति और जनभावनाएं एक ही फ्रेम में आकर खड़ी हो गई हैं।

आकाश चोपड़ा का साफ स्टैंड: “BCCI ने सही किया”

आकाश चोपड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने दो खबरों के स्क्रीनशॉट दिखाए। एक खबर बांग्लादेश में एक हिंदू युवक पर हुई हिंसा से जुड़ी थी, और दूसरी—कोलकाता नाइट राइडर्स द्वारा मुस्तफिजुर रहमान को रिलीज़ किए जाने की।

वीडियो में आकाश कहते हैं,
“ये देखिए, पढ़ लीजिए। जो कुछ भी हो रहा है, उसी की वजह से बीसीसीआई ने ये कदम उठाया है।”

उन्होंने बिना किसी हिचक के कहा कि उनके हिसाब से बोर्ड का फैसला सही है।
“मेरे विचार से बिल्कुल ठीक किया है। हां, कोलकाता को थोड़ी दिक्कत ज़रूर होगी। अगर ऑक्शन से पहले बात होती तो बेहतर रहता, लेकिन ये एक डेवलपिंग स्टोरी है।”

यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि आकाश आमतौर पर क्रिकेटिंग फैसलों पर बैलेंस्ड राय रखने के लिए जाने जाते हैं।

“यह कोलेट्रल डैमेज है” – पाकिस्तान की मिसाल

आकाश चोपड़ा ने एक संवेदनशील लेकिन चर्चित तुलना भी की। उन्होंने कहा कि अगर कोई यह सवाल उठा रहा है कि मुस्तफिजुर की इसमें व्यक्तिगत गलती क्या है, तो यही बात पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर भी लागू होती है।

उनके शब्दों में,
“पाकिस्तानी क्रिकेटर्स भी व्यक्तिगत तौर पर कुछ नहीं करते थे। लेकिन जब देश कुछ गलत करता है, तो उसका असर खिलाड़ियों पर पड़ता है। यह कोलेट्रल डैमेज है।”

यह बयान सीधे 2008 के बाद के दौर की ओर इशारा करता है, जब पाकिस्तानी खिलाड़ी आईपीएल से बाहर हो गए थे। आकाश ने साफ कहा कि वह बीसीसीआई के स्टैंड के साथ खड़े हैं, और उन्होंने अपने फॉलोअर्स से भी पूछा कि वे इस मुद्दे पर कहां खड़े हैं।

BCCI का फैसला और टाइमलाइन

शनिवार, 3 जनवरी, को बीसीसीआई ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की कि मुस्तफिजुर रहमान आईपीएल 2026 नहीं खेलेंगे। बोर्ड ने केकेआर को निर्देश दिया कि वे खिलाड़ी को रिलीज़ करें और उन्हें रिप्लेसमेंट चुनने की अनुमति दी जाएगी।

यह फैसला ऐसे समय पर आया, जब:

  • आईपीएल 2026 का मिनी ऑक्शन हो चुका था
  • केकेआर ने मुस्तफिजुर को 9.20 करोड़ रुपये में खरीदा था
  • वह नीलामी में बिकने वाले इकलौते बांग्लादेशी खिलाड़ी थे

विरोध, बयान और बढ़ता दबाव

मुस्तफिजुर के चयन के बाद भारत में विरोध के स्वर तेज़ हो गए थे। कुछ राजनीतिक नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर इस फैसले की आलोचना की। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा ट्रेंड करने लगा।

इन घटनाक्रमों के बीच बीसीसीआई पर दबाव बढ़ा और आखिरकार बोर्ड ने हस्तक्षेप किया। केकेआर जैसी फ्रेंचाइजी अपने स्तर पर ऐसा कदम नहीं उठा सकती थी, क्योंकि आईपीएल कॉन्ट्रैक्ट्स कानूनी रूप से बाध्यकारी होते हैं।

मुस्तफिजुर: मैदान पर रिकॉर्ड, बाहर विवाद

यह पूरा विवाद ऐसे वक्त में चल रहा है, जब मुस्तफिजुर रहमान ने हाल ही में टी20 क्रिकेट में 400 विकेट पूरे कर लिए हैं। वह ऐसा करने वाले बांग्लादेश के पहले तेज़ गेंदबाज़ बने हैं।

आईपीएल में भी उनका रिकॉर्ड कमजोर नहीं रहा—

  • 65 मैच
  • 65 विकेट
  • CSK, DC, RR, SRH और MI जैसी टीमों का हिस्सा

यानी क्रिकेटिंग योग्यता पर सवाल नहीं है।

क्या यह आधिकारिक बैन है?

यहां एक बात साफ करना ज़रूरी है।

बीसीसीआई ने बांग्लादेशी खिलाड़ियों पर कोई आधिकारिक या लिखित प्रतिबंध घोषित नहीं किया है।
मुस्तफिजुर का मामला बोर्ड के मुताबिक “हाल के घटनाक्रमों” और सुरक्षा/प्रशासनिक सलाह के आधार पर लिया गया केस-स्पेसिफिक निर्णय है।

क्रिकेट, भावनाएं और मुश्किल फैसले

आकाश चोपड़ा की प्रतिक्रिया ने इस बहस को और तेज़ कर दिया है। एक तरफ खिलाड़ी है, जिसने कोई व्यक्तिगत गलती नहीं की। दूसरी तरफ माहौल है, जिसमें क्रिकेट अकेला नहीं रह गया।

यह सवाल अब सिर्फ मुस्तफिजुर का नहीं है।
यह सवाल है—
क्या अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट पूरी तरह मैदान तक सीमित रह पाएगा?

स्टैंड साफ, बहस जारी

आकाश चोपड़ा ने बिना घुमाए-फिराए अपना स्टैंड रख दिया है—वह बीसीसीआई के फैसले के साथ हैं। उनकी बातों से यह साफ है कि वह इसे क्रिकेटिंग नहीं, बल्कि हालात से जुड़ा फैसला मानते हैं।

लेकिन जैसे हर बड़े फैसले के साथ होता है, यह मामला भी दो ध्रुवों में बंट चुका है।
एक ओर सिद्धांत और जनभावना।
दूसरी ओर खिलाड़ी और खेल।

आईपीएल 2026 तक यह बहस शायद और तेज़ होगी।

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