Abhishek : ODI का दावेदार – अभिषेक शर्मा पर इरफान पठान की बड़ी बात

Atul Kumar
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Abhishek

Abhishek – नागपुर की पिच पर जैसे ही अभिषेक शर्मा ने पहली गेंद को सीमा रेखा के पार भेजा, माहौल ने बता दिया कि कुछ खास होने वाला है। पावरप्ले खत्म होने से पहले ही न्यूज़ीलैंड की गेंदबाज़ी बिखर चुकी थी और स्टैंड्स में बैठे दर्शक सिर्फ एक ही नाम ले रहे थे—अभिषेक शर्मा।

35 गेंदों में 84 रन, 238 का विशाल स्कोर और फिर प्लेयर ऑफ द मैच। यह सिर्फ एक T20 पारी नहीं थी, बल्कि भविष्य की एक झलक थी।

और शायद इसी झलक ने भारत के पूर्व ऑलराउंडर इरफान पठान को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है—T20 से आगे, वनडे वर्ल्ड कप 2027 तक।

T20 में तूफान, पावरप्ले का नया हथियार

अभिषेक शर्मा ने बहुत कम समय में T20 इंटरनेशनल क्रिकेट में अपनी एक अलग पहचान बना ली है। वह उन बल्लेबाज़ों में से नहीं हैं जो धीरे-धीरे पारी बनाते हैं। उनका गेम प्लान साफ है—शुरुआत में ही विपक्ष पर दबाव।

न्यूज़ीलैंड के खिलाफ पहले T20 में उन्होंने यही किया।

  • 35 गेंद
  • 84 रन
  • 10 चौके
  • 5 छक्के

यानी ज़्यादातर रन बाउंड्री से। भारत का स्कोर 238 तक पहुंचा और मैच वहीं खत्म हो गया। न्यूज़ीलैंड 190 तक ही सिमट गया।

इरफान पठान की बड़ी बात: ODI वर्ल्ड कप का प्लान

मैच के बाद चर्चा सिर्फ T20 तक सीमित नहीं रही। भारत के पूर्व क्रिकेटर इरफान पठान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक बयान दिया, जिसने बहस को नई दिशा दे दी।

इरफान ने लिखा कि अभिषेक शर्मा को 50 ओवर के वर्ल्ड कप 2027 की योजना में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने माना कि फिलहाल यशस्वी जायसवाल और ऋतुराज गायकवाड़ जैसे खिलाड़ी उनसे आगे हैं, लेकिन अगर अभिषेक अपने T20 वाले अंदाज़ को वनडे के पावरप्ले में उतार दें, तो वह भारत के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं।

यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत वनडे क्रिकेट में भी पावरप्ले डोमिनेशन को दोबारा परिभाषित कर रहा है।

T20 से ODI तक: क्या फिट बैठता है अभिषेक का गेम?

यह सवाल लाज़मी है। T20 और ODI में फर्क है। लेकिन पावरप्ले दोनों में समान है—पहले 10 ओवर, फील्डिंग सर्कल के अंदर चार फील्डर, और रन बनाने की आज़ादी।

अभिषेक शर्मा का T20 प्रोफाइल (संक्षेप में)

पहलूप्रभाव
पावरप्ले स्ट्राइकबेहद आक्रामक
बाउंड्री प्रतिशतबहुत ऊंचा
दबाव बनाने की क्षमतामैच की दिशा बदलने वाली
कमजोरीवैरायटी सीमित, रिस्क ज़्यादा

वनडे क्रिकेट में अगर उन्हें यही रोल मिले—बिना 40 ओवर खेलने की ज़िम्मेदारी—तो वह पावरप्ले स्पेशलिस्ट बन सकते हैं। ठीक वैसे ही, जैसे एक दौर में वीरेंद्र सहवाग बने थे।

खुद अभिषेक क्या कहते हैं?

मैच के बाद अभिषेक शर्मा ने अपनी बल्लेबाज़ी को लेकर बेहद ईमानदार बात कही। उन्होंने साफ कहा कि वह बहुत ज़्यादा शॉट्स नहीं खेलते, बल्कि कुछ गिने-चुने स्ट्रोक्स पर भरोसा करते हैं।

उनके मुताबिक, वह पावर हिटिंग के बजाय टाइमिंग पर ज़्यादा ध्यान देते हैं। उनका मानना है कि उनके पास बहुत अधिक शारीरिक ताकत नहीं है, इसलिए सही लाइन और लेंथ पर गेंद को टाइम करना ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।

उन्होंने यह भी बताया कि वह मैच से पहले वीडियो एनालिसिस करते हैं, गेंदबाज़ों की रणनीति समझते हैं और फिर तय करते हैं कि रन कहां बनाने हैं।

नंबर-1 T20 बल्लेबाज़, लेकिन भूख उससे बड़ी

फिलहाल अभिषेक शर्मा T20 इंटरनेशनल में दुनिया के नंबर-1 बल्लेबाज़ हैं। यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। लेकिन जिस तरह वह अपने खेल को लेकर बात करते हैं, उससे साफ दिखता है कि वह सिर्फ एक फॉर्मेट तक सीमित नहीं रहना चाहते।

भारत इस वक्त अलग-अलग शहरों में खेल रहा है—अलग पिच, अलग कंडीशन। अभिषेक का कहना है कि इन्हीं परिस्थितियों के हिसाब से खुद को ढालना सबसे ज़रूरी है। यही सोच उन्हें T20 से आगे भी ले जा सकती है।

चयनकर्ताओं के सामने असली सवाल

इरफान पठान ने जो बात कही है, वह सुझाव से कहीं आगे है। यह चयनकर्ताओं के लिए एक सवाल है—

  • क्या भारत 2027 वर्ल्ड कप के लिए एक स्पेशल पावरप्ले बैटर तैयार करेगा?
  • क्या T20 की आक्रामकता को वनडे में जगह मिलेगी?
  • और क्या अभिषेक शर्मा को समय रहते ODI क्रिकेट में आज़माया जाना चाहिए?
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