ACB – टी20 क्रिकेट अब सिर्फ एक फॉर्मेट नहीं रहा, यह करियर की दिशा तय करने वाला रास्ता बन चुका है। दुनिया भर में फैली फ्रेंचाइजी लीग्स, मोटे कॉन्ट्रैक्ट और साल भर का क्रिकेट—इसी वजह से आज वेस्टइंडीज और न्यूजीलैंड जैसे देशों के खिलाड़ी सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट ठुकराने से भी नहीं हिचकिचा रहे। देश बाद में, लीग पहले—यह ट्रेंड अब खुलकर दिखने लगा है।
और इसी बदलते माहौल में अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (ACB) ने ऐसा फैसला लिया है, जिसने पूरी टी20 दुनिया का ध्यान खींच लिया है।
ACB का बड़ा फैसला: अब सिर्फ तीन विदेशी लीग
गुरुवार को काबुल स्थित ACB हेडक्वार्टर में हुई सालाना जनरल मीटिंग (AGM) में बोर्ड ने एक नई पॉलिसी को मंजूरी दी। इस पॉलिसी के तहत अब कोई भी अफगान खिलाड़ी:
- एक साल में सिर्फ तीन विदेशी इंटरनेशनल T20 लीग खेल सकेगा
- इसके अलावा, वह ACB की फ्रेंचाइजी-बेस्ड T20 लीग में भी हिस्सा लेगा
यह नई अफगान लीग अक्टूबर 2026 से UAE में शुरू होगी, जिसमें कुल 5 टीमें होंगी।
मतलब साफ है—अब अनलिमिटेड लीग क्रिकेट नहीं, बल्कि कंट्रोल्ड कैलेंडर।
बोर्ड का तर्क: फिटनेस, मेंटल हेल्थ और नेशनल ड्यूटी
ESPNcricinfo के मुताबिक, ACB ने अपने आधिकारिक बयान में कहा:
“खिलाड़ियों की फिटनेस और मानसिक सेहत की सुरक्षा के लिए बोर्ड ने विदेशी लीग को लेकर नई पॉलिसी को मंजूरी दी है। इसका मकसद वर्कलोड मैनेज करना और नेशनल ड्यूटी के लिए बेहतरीन परफॉर्मेंस सुनिश्चित करना है।”
यह बयान पढ़ने में भले बैलेंस्ड लगे, लेकिन इसके पीछे एक सख्त संदेश छुपा है—
देश पहले, फ्रेंचाइजी बाद में।
मीटिंग में कौन-कौन था मौजूद?
इस अहम AGM में ACB के तमाम बड़े नाम शामिल रहे:
- मीरवाइस अशरफ (ACB चेयरमैन)
- नसीम खान (CEO)
- अहमद खालिद हातिम (बोर्ड मेंबर, करदान यूनिवर्सिटी चांसलर)
- खान जान अलोकोज़ई (ACCI हेड)
जबकि अल्लाह दाद नूरी, ओबैदुल्लाह सदेरखेल, अतीला कामगार और रईस अहमदज़ई वीडियो लिंक के ज़रिए शामिल हुए।
यह बताता है कि फैसला हल्के में नहीं लिया गया।
असली असर किन पर पड़ेगा?
इस पॉलिसी का सबसे बड़ा असर पड़ेगा अफगानिस्तान के सुपरस्टार्स पर—
जिनकी डिमांड हर लीग में है।
- राशिद खान
- नूर अहमद
- मुजीब उर रहमान
- रहमानुल्लाह गुरबाज
ये खिलाड़ी साल भर अलग-अलग लीग्स खेलकर न सिर्फ अनुभव, बल्कि भारी-भरकम पैसा भी कमाते हैं। अब तीन लीग की सीमा सीधे तौर पर उनकी फाइनेंशियल फ्रीडम को सीमित करेगी।
राशिद खान का केस: सबसे पेचीदा
राशिद खान इस पॉलिसी की सबसे बड़ी परीक्षा हैं।
- दुनिया के सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले T20 गेंदबाजों में शामिल
- फिलहाल SA20 में MI Cape Town के कप्तान
- MI की दूसरी फ्रेंचाइजी:
- MI Emirates (ILT20)
- MI New York (MLC)
- IPL में गुजरात टाइटन्स के अहम खिलाड़ी
अब सवाल उठता है—
अगर राशिद को सिर्फ तीन लीग चुननी हों, तो कौन सी छोड़ी जाएंगी?
यह फैसला सिर्फ क्रिकेटिंग नहीं, बल्कि करोड़ों डॉलर का गणित है।
दुनिया का ट्रेंड बनाम अफगान मॉडल
जहां:
- वेस्टइंडीज के खिलाड़ी खुलेआम कहते हैं कि लीग क्रिकेट उनकी प्राथमिकता है
- न्यूजीलैंड के खिलाड़ी सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट छोड़ रहे हैं
वहीं अफगानिस्तान ने बिल्कुल उलटा रास्ता चुना है।
लेकिन सवाल यह है—
क्या आज के जमाने में खिलाड़ी इस कंट्रोल को स्वीकार करेंगे?
ACB की अपनी लीग: प्लान क्या है?
ACB की फ्रेंचाइजी-बेस्ड T20 लीग, जो 2026 में UAE में होगी, बोर्ड के लिए दो मकसद पूरे करती है:
- खिलाड़ियों को घर से जुड़े रखना
- लीग रेवेन्यू का एक बड़ा हिस्सा खुद कंट्रोल करना
यह मॉडल IPL या SA20 जैसा भले न हो, लेकिन अफगान बोर्ड के लिए यह स्ट्रैटेजिक मूव है।
खिलाड़ी मानेंगे या टकराव होगा?
इतिहास गवाह है—
जब बोर्ड और खिलाड़ियों के बीच पैसे बनाम कंट्रोल की लड़ाई होती है, तो टकराव तय होता है।
अगर:
- खिलाड़ी पॉलिसी मानते हैं → अफगान क्रिकेट को स्थिरता मिलेगी
- खिलाड़ी विरोध करते हैं → सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट जैसा संकट खड़ा हो सकता है
अभी सब कुछ शांत लेकिन अस्थिर है।
सही इरादा, मुश्किल रास्ता
ACB का इरादा गलत नहीं है।
वर्कलोड, फिटनेस और नेशनल ड्यूटी—सब जायज तर्क हैं।
लेकिन टी20 लीग्स के इस दौर में खिलाड़ियों से कहना कि
“कम पैसा कमाओ, लेकिन देश के लिए रहो”
कहना आसान है, मनवाना नहीं।
अब देखना यह है कि
क्या अफगानिस्तान एक नया मॉडल सेट करता है—
या यह फैसला आगे चलकर टकराव की कहानी बनता है।















