Afridi – शनिवार को इस्लामाबाद से आई एक खबर ने पाकिस्तान के क्रिकेट और सियासत—दोनों गलियारों में हलचल पैदा कर दी। नाम वही पुराना, असर वही गहरा—शाहिद अफरीदी।
पाकिस्तान के पूर्व कप्तान और सबसे चर्चित ऑलराउंडरों में से एक अफरीदी ने पहली बार खुले तौर पर राजनीति को लेकर अपनी चुप्पी तोड़ी है। न कोई घोषणा, न कोई पार्टी जॉइन करने का ऐलान—लेकिन इतना जरूर कि अब सवाल हवा में तैर रहा है।
क्या “बूम-बूम” अफरीदी भविष्य में इमरान खान की राह पर चल सकते हैं?
इस्लामाबाद शिफ्ट और उठते सवाल
45 वर्षीय शाहिद अफरीदी अब पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में बस चुके हैं। यह वही शहर है, जहां देश की राजनीति की नब्ज धड़कती है। स्वाभाविक था कि उनके वहां शिफ्ट होने को सियासी चश्मे से देखा जाए।
शनिवार को जंग अखबार से बातचीत में अफरीदी ने इस बात की पुष्टि की कि वह अब इस्लामाबाद में रह रहे हैं। जब उनसे सीधे पूछा गया कि क्या यह कदम राजनीति में एंट्री की तैयारी है, तो उन्होंने फिलहाल ऐसी किसी योजना से इनकार किया।
लेकिन इनकार भी ऐसा, जो पूरी तरह दरवाजा बंद नहीं करता।
“अभी प्लान नहीं, लेकिन देश के लिए कुछ करना चाहता हूं”
अफरीदी ने अपने बयान में बहुत संतुलित लहजा अपनाया। न सरकार पर हमला, न विपक्ष का खुला समर्थन।
उन्होंने कहा,
“मैं पाकिस्तान को समृद्ध होते देखना चाहता हूं। मुझे लगता है कि यह तभी संभव है, जब सरकार और अन्य महत्वपूर्ण संस्थाओं को अपना संवैधानिक कार्यकाल पूरा करने दिया जाए।”
यह बयान सिर्फ एक क्रिकेटर का विचार नहीं है। यह एक ऐसे शख्स की सोच है, जो सिस्टम, स्थिरता और संस्थाओं की भूमिका को समझता है।
फिर उन्होंने वो लाइन कही, जिसने पूरी बहस को जन्म दिया—
“पाकिस्तान और पाकिस्तानी क्रिकेट ने मुझे शोहरत, दौलत, सब कुछ दिया है। मैं निश्चित रूप से अपने देश के लिए कुछ करना चाहूंगा।”
यही “कुछ करना” आज पाकिस्तान में सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला शब्द है।
कराची से इस्लामाबाद तक का सफर
शाहिद अफरीदी का जन्म पाकिस्तान के उत्तरी कबायली इलाके में हुआ था, लेकिन उनका पूरा बचपन और क्रिकेटिंग जीवन कराची में बीता। कराची सिर्फ उनका शहर नहीं था, वह उनकी पहचान थी।
अब, दशकों बाद, उनका इस्लामाबाद जाना एक सिंबॉलिक मूव माना जा रहा है। क्योंकि पाकिस्तान में राजनीति अक्सर कराची से नहीं, इस्लामाबाद से लड़ी जाती है।
यहीं से इमरान खान ने भी अपना राजनीतिक सफर मजबूत किया था।
इमरान खान की विरासत और तुलना का दबाव
पाकिस्तान में जब भी कोई बड़ा क्रिकेटर राजनीति की बात करता है, तुलना अपने आप इमरान खान से होने लगती है। वजह साफ है।
- 1992 वर्ल्ड कप विजेता कप्तान
- पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक
- देश के प्रधानमंत्री
इमरान खान ने यह साबित किया कि क्रिकेट की लोकप्रियता को सियासी ताकत में बदला जा सकता है। हालांकि आज वह 2023 से अलग-अलग मामलों में जेल में हैं, लेकिन उनका प्रभाव अभी भी खत्म नहीं हुआ है।
पाकिस्तान क्रिकेट और राजनीति: पुराना रिश्ता
पाकिस्तान में क्रिकेटरों का राजनीति में जाना कोई नई बात नहीं है।
- इमरान खान – प्रधानमंत्री बने
- सरफराज नवाज – पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी में शामिल हुए, खेल मंत्री भी रहे
अब अगर शाहिद अफरीदी इस सूची में जुड़ते हैं, तो यह किसी को हैरान नहीं करेगा। फर्क बस इतना है कि अफरीदी की छवि हमेशा से ज्यादा भावनात्मक और जन-आधारित रही है।
अफरीदी: आंकड़ों से बड़ा नाम
अगर सिर्फ करियर पर नजर डालें, तो अफरीदी पाकिस्तान के इतिहास में एक अलग ही जगह रखते हैं।
| फॉर्मेट | मैच |
|---|---|
| टेस्ट | 27 |
| वनडे | 398 |
| टी20 | 99 |
| कुल इंटरनेशनल | 524 |
वह पाकिस्तान के लिए 500 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले इकलौते क्रिकेटर हैं।
1996 से 2016 तक—दो दशक।
यह लोकप्रियता, यह पहचान—राजनीति में उतरने वाले किसी भी चेहरे के लिए सबसे बड़ी पूंजी होती है।
क्यों अफरीदी का बयान अहम है?
अफरीदी ने यह नहीं कहा कि वह राजनीति में आ रहे हैं।
लेकिन उन्होंने यह भी नहीं कहा कि वह कभी नहीं आएंगे।
यही अंतर है।
- उन्होंने सिस्टम की बात की
- संवैधानिक स्थिरता की बात की
- देश के लिए कुछ करने की इच्छा जताई
पाकिस्तान जैसे देश में, यह बयान बीज बोने जैसा माना जाता है।
अभी नहीं, लेकिन कभी भी?
फिलहाल अफरीदी के पास कोई पार्टी नहीं है।
कोई चुनावी एजेंडा नहीं है।
कोई राजनीतिक गठबंधन नहीं है।
लेकिन वह अब इस्लामाबाद में हैं।
और उन्होंने “देश के लिए कुछ करने” की बात सार्वजनिक रूप से कह दी है।
इतना काफी है चर्चाओं के लिए।















