Rahane : विराट कोहली घमंडी नहीं हैं – अजिंक्य रहाणे का बड़ा खुलासा

Atul Kumar
Published On:
Rahane

Rahane – विराट कोहली को लेकर एक सवाल सालों से हवा में तैरता रहा है—क्या वह घमंडी हैं?
मैदान पर उनकी आक्रामकता, आंखों में आग, हर रन के बाद का रिएक्शन… बाहर से देखने वालों को यह सब अक्सर गलत संकेत देता है। लेकिन अब इस बहस पर ड्रेसिंग रूम के अंदर से जवाब आया है। और वह जवाब दिया है भारत के पूर्व कप्तान अजिंक्य रहाणे ने—बिलकुल साफ, बिना घुमाए।

रहाणे, जिन्होंने विराट के साथ लंबे वक्त तक भारतीय टीम में खेला है, कहते हैं कि लोग कोहली को समझ ही नहीं पाते। और शायद यही वजह है कि वह अक्सर गलत समझ लिए जाते हैं।

“विराट घमंडी नहीं हैं, लोग उन्हें गलत पढ़ लेते हैं”

क्रिकबज से बातचीत में अजिंक्य रहाणे ने इस मुद्दे पर खुलकर बात की। उनके शब्दों में कोई डिप्लोमेसी नहीं थी—सीधी बात।

“लोग अक्सर सोचते हैं कि विराट कोहली घमंडी हैं, लेकिन वे असल में ऐसे नहीं हैं। मैंने उनके साथ खेला है, मैं उन्हें अच्छी तरह जानता हूं।”

रहाणे के मुताबिक, समस्या कोहली की पर्सनैलिटी में नहीं, बल्कि लोगों की धारणा में है। विराट मैदान पर इतने डूबे रहते हैं कि बाहर वालों को लगता है वह खुद में खोए हुए हैं—या खुद को बाकी सब से ऊपर मानते हैं। जबकि सच्चाई कुछ और ही है।

खेल में डूब जाना, यही उनकी पहचान है

रहाणे ने एक बेहद अहम लाइन कही, जो विराट कोहली को समझने की चाबी बन सकती है।

“विराट सिर्फ इसलिए महान नहीं हैं कि वह रनों के भूखे हैं। असली फर्क उनकी सोच और उनके रवैये से आता है।”

यानी कोहली का फोकस सिर्फ रन नहीं है।
वह प्रोसेस, तैयारी और मेंटल एज पर जीते हैं। और यही चीज़ बाहर से देखने वालों को अक्सर “अहंकार” जैसी लगती है।

मैच से दो दिन पहले… विराट का ‘ज़ोन’

रहाणे ने विराट कोहली की मैच-डे माइंडसेट पर ऐसा खुलासा किया, जो शायद बहुत कम लोग जानते होंगे।

“मैंने उन्हें बड़े मैच से दो दिन पहले देखा है। वह बामुश्किल किसी से बात करते हैं—यहां तक कि अपने टीममेट्स से भी नहीं।”

सुनने में यह अजीब लग सकता है। लेकिन रहाणे बताते हैं कि यह दूरी घमंड नहीं, बल्कि तैयारी का हिस्सा है।

उस दौर में:

  • विराट अक्सर एयरपॉड्स लगाए रहते हैं
  • अपना पसंदीदा म्यूज़िक सुनते हैं
  • जिम और फिटनेस रूटीन पर फोकस करते हैं
  • और खुद को एक अलग मानसिक स्पेस में ले जाते हैं

रहाणे के शब्दों में,
“यह चुप्पी अहंकार नहीं है। यह उनका तरीका है खुद को मैच के लिए तैयार करने का।”

ड्रेसिंग रूम में असर: शुरुआत में कन्फ्यूज़न

रहाणे ने ईमानदारी से यह भी माना कि विराट का यह व्यवहार हर किसी को तुरंत समझ नहीं आता।

“शुरुआत में कई खिलाड़ी असमंजस में पड़ जाते हैं। उन्हें लगता है कि वह बात क्यों नहीं कर रहे?”

लेकिन जो खिलाड़ी विराट को समय से जानते हैं—उन्हें फर्क समझ में आ जाता है।

“जब वह बात नहीं करते थे, मैं समझ जाता था कि वह अपना जोन बना रहे हैं।”

यह वही जोन है, जिसमें जाकर विराट कोहली:

  • दबाव को अपने पक्ष में मोड़ते हैं
  • बड़े मैचों में शांत रहते हैं
  • और रन मशीन बन जाते हैं

अनुशासित इंटेंसिटी: यही उन्हें अलग बनाती है

रहाणे ने विराट कोहली की एक खास क्वालिटी पर खास ज़ोर दिया—
Disciplined Intensity।

मतलब:
आक्रामकता है, लेकिन बेकाबू नहीं
जज्बा है, लेकिन बिना दिशा के नहीं
और भावनाएं हैं, लेकिन कंट्रोल के साथ

यही वजह है कि वह सिर्फ स्टार खिलाड़ी नहीं, बल्कि एलीट एथलीट हैं।

“सब कुछ हासिल करने के बाद भी सीखने की भूख”

अजिंक्य रहाणे ने कोहली के वर्क एथिक्स की भी खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि इतने रिकॉर्ड्स, इतनी उपलब्धियों के बावजूद विराट में आज भी बेहतर बनने की बेचैनी है।

“उनका काम करने का तरीका अमेज़िंग है। वह हमेशा बदलाव चाहते हैं। हमेशा सुधार करना चाहते हैं।”

यह लाइन विराट कोहली के करियर को समरी में बता देती है।
रिकॉर्ड्स के बाद भी संतोष नहीं।
शिखर पर पहुंचकर भी रुकने का मन नहीं।

‘कभी हार न मानने वाला’ रवैया

रहाणे ने आखिर में जिस बात पर ज़ोर दिया, वही विराट कोहली की असली पहचान है।

“उनका कभी हार न मानने वाला जज़्बा और सीखने की भूख उन्हें सबसे अलग बनाती है।”

यही वजह है कि:

  • खराब दौर के बाद भी वह लौटते हैं
  • आलोचनाओं के बाद और मजबूत बनते हैं
  • और उम्र के साथ भी उनका खेल गिरता नहीं
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