Ajinkya Rahane – अहमदाबाद की हार सिर्फ 76 रन की नहीं थी—वो एक चयन बहस की शुरुआत भी थी। जैसे ही भारत सुपर-8 में साउथ अफ्रीका से हारा, चर्चा बल्लेबाज़ी से हटकर टीम कॉम्बिनेशन पर आ गई। खासकर एक सवाल—अक्षर पटेल बाहर और वॉशिंगटन सुंदर अंदर क्यों?
कप्तान सूर्यकुमार यादव की रणनीति, टीम मैनेजमेंट की सोच और “मैचअप” का सिद्धांत—सब कटघरे में हैं। और अब आवाज़ें सिर्फ फैंस की नहीं, बल्कि बड़े नामों की भी हैं।
रहाणे का सीधा सवाल: “इतना स्मार्ट बनने की क्या ज़रूरत?”
क्रिकबज पर अजिंक्य रहाणे ने साफ कहा, “मैं सच में हैरान हूं कि अक्षर पटेल मैच नहीं खेल रहे। वाशिंगटन सुंदर क्वालिटी प्लेयर हैं, लेकिन अक्षर अलग-अलग सिचुएशन में बहुत अच्छा कर रहे हैं। कभी-कभी जब आप बहुत ज्यादा स्मार्ट हो जाते हैं, तो सिलेक्शन में नुकसान हो सकता है।”
रहाणे का तर्क सरल था—आईसीसी टूर्नामेंट में प्रयोग नहीं, स्थिरता चाहिए। खासकर जब खिलाड़ी ने बड़े मंच पर पहले डिलीवर किया हो।
अक्षर बनाम सुंदर: बहस का केंद्र
| पहलू | अक्षर पटेल | वॉशिंगटन सुंदर |
|---|---|---|
| ऑलराउंड क्षमता | उच्च | मध्यम |
| बड़े मैच का अनुभव | सिद्ध | सीमित |
| 2024 फाइनल प्रदर्शन | 47 रन | — |
| इस मैच में ओवर | — | 2 ओवर |
रहाणे ने एक और अहम बात कही—“आपने सुंदर को इसलिए लिया क्योंकि साउथ अफ्रीका में लेफ्ट हैंडर्स ज्यादा हैं। लेकिन उसने सिर्फ दो ओवर ही फेंके।”
यानी जिस “मैचअप” के लिए चयन किया गया, वह पूरी तरह इस्तेमाल भी नहीं हुआ।
“ऑफ स्पिन बनाम लेफ्ट हैंडर”—क्या यह हमेशा काम करता है?
थ्योरी कहती है—ऑफ स्पिनर लेफ्ट हैंडर के खिलाफ कारगर।
लेकिन क्रिकेट एक्सेल शीट से नहीं खेला जाता।
रहाणे ने याद दिलाया—“लेफ्ट हैंडर्स के खिलाफ अक्षर का रिकॉर्ड सच में अच्छा था। आज हमने देखा कि केशव महाराज ने क्या किया—टॉप लेफ्ट हैंडेड बल्लेबाज़ों को आउट किया।”
यानी सिर्फ हाथ देखकर गेंदबाज़ चुनना पर्याप्त नहीं। क्वालिटी और हालिया फॉर्म भी मायने रखते हैं।
माइकल वॉन का तंज: “बहुत सारे दिमाग, ज़िंदगी मुश्किल”
इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन ने इस चयन को आधुनिक क्रिकेट की ‘ओवर-एनालिटिक्स’ बीमारी से जोड़ा।
“इस जमाने में बैकरूम में बहुत सारे लोग हैं—एनालिस्ट, साइंटिस्ट, डेटा एक्सपर्ट। कभी-कभी दिमाग ज़िंदगी को बहुत मुश्किल बना देता है।”
वॉन ने तीखा सवाल उठाया—“मैं उस व्यक्ति को जानना चाहता हूं जिसने बोर्ड मीटिंग में कहा कि हमें वॉशिंगटन सुंदर के साथ खेलना चाहिए।”
उनका इशारा साफ था—जब टीम जीत रही हो और अक्षर जैसा खिलाड़ी फॉर्म में हो, तो बदलाव क्यों?
मैच का संदर्भ
भारत 187 रन का पीछा कर रहा था।
ओपनिंग साझेदारी—0।
10 ओवर में 57/5।
ऐसे में एक भरोसेमंद ऑलराउंडर की जरूरत थी, जो दबाव झेल सके। 2024 फाइनल में अक्षर ने यही किया था—34/3 की स्थिति से 47 रन।
इस बार वह डगआउट में बैठे रहे।
क्या हार का कारण सिर्फ चयन था?
नहीं।
• ओपनर्स की विफलता
• स्ट्राइक रेट में गिरावट
• मिडिल ऑर्डर का ढहना
लेकिन बड़े टूर्नामेंट में चयन अक्सर फर्क डालते हैं। खासकर जब हार एकतरफा हो।















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