MS Dhoni : धोनी और मिश्रा अफवाहों के पार की कहानी – मिश्रा का सीधा जवाब

Atul Kumar
Published On:
MS Dhoni

MS Dhoni – दिल्ली की उस नेट प्रैक्टिस में, जहां स्पिनरों को अक्सर आख़िरी विकल्प समझा जाता है, अमित मिश्रा ने सालों तक अपनी बारी का इंतज़ार किया। बाहर बैठना, फिर बुलाया जाना, फिर दोबारा बाहर। और इस पूरे चक्र के बीच एक नाम हर बहस में बार-बार आता रहा—महेंद्र सिंह धोनी।
अब, रिटायरमेंट के बाद, मिश्रा ने पहली बार उन अफवाहों पर बिना घुमाए-फिराए बात की है, जो सालों से क्रिकेट गलियारों में तैरती रही हैं।

“अगर धोनी नहीं होते, तो शायद मैं टीम में ही नहीं होता”

मेन्स एक्सपी से बातचीत में अमित मिश्रा ने उस सबसे चर्चित थ्योरी को सीधा पलट दिया—कि धोनी की कप्तानी ने उनका करियर छोटा कर दिया।

“लोग बोलते हैं कि धोनी नहीं होते तो आपका करियर और अच्छा होता,” मिश्रा ने कहा।
“लेकिन अगर धोनी नहीं होते, तो हो सकता है मैं टीम में भी नहीं होता।”

यह बयान अपने आप में बहुत कुछ कह देता है।
मिश्रा ने साफ किया कि भारतीय टीम में उनकी एंट्री, वापसी और मौके—सब धोनी की ‘हां’ से जुड़े थे

अंदर–बाहर, लेकिन पूरी तरह बाहर कभी नहीं

अमित मिश्रा का इंटरनेशनल करियर कभी सीधी रेखा में नहीं चला।
वह 7–8 साल तक टीम में आते-जाते रहे।

  • कभी अश्विन को तरजीह
  • कभी जडेजा को
  • और कभी परिस्थितियों ने मिश्रा को बाहर रखा

लेकिन मिश्रा का कहना है कि यह सिलेक्शन की राजनीति नहीं, बल्कि टीम कॉम्बिनेशन की मजबूरी थी।

“ऐसा नहीं है कि मैं एक बार आया और फिर गायब हो गया,” उन्होंने कहा।
“मैं बार-बार टीम में आया। जब धोनी हां कहते थे, मैं आता ही था।”

सपोर्ट जो कैमरों में नहीं दिखता

धोनी का सपोर्ट कभी प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं दिखता था।
वह अक्सर मिड-ओवर बातचीत में नज़र आता था।

मिश्रा ने न्यूजीलैंड के खिलाफ अपनी आख़िरी वनडे सीरीज़ का एक किस्सा सुनाया—जो उनके करियर का टर्निंग पॉइंट बन गया।

भारत ने 260–270 रन बनाए थे।
मिश्रा गेंदबाज़ी के लिए आए और सोचा—आज विकेट नहीं, रन रोकते हैं।

“तू अपनी गेंद नहीं डाल रहा है”

कुछ ओवरों के बाद धोनी खुद उनके पास आए।

“उन्होंने कहा—तू अपनी नेचुरल बॉलिंग नहीं कर रहा,” मिश्रा ने याद किया।
“ज़्यादा मत सोच, जैसी तू हमेशा करता है वैसी ही गेंद डाल।”

यह एक लाइन थी।
लेकिन उसी ने पूरा स्पेल बदल दिया।

मैच पलटने वाला स्पेल

मिश्रा ने वही किया जो धोनी ने कहा।
कम सोचा।
ज़्यादा भरोसा किया।

नतीजा?

  • 5 विकेट
  • मैच भारत की तरफ
  • और मिश्रा के मुताबिक—उनका बेस्ट स्पेल

“धोनी की सोच साफ थी,” मिश्रा ने कहा।
“अगर मैं विकेट नहीं लेता, तो हम मैच हार जाते।”

यह वही धोनी थे, जो स्पिनर से डिफेंस नहीं, मैच-विनिंग ओवर चाहते थे।

अश्विन–जडेजा के दौर में मिश्रा

यह सच है कि धोनी के दौर में भारत के पास:

  • रविचंद्रन अश्विन
  • रविंद्र जडेजा

जैसे ऑल-राउंड स्पिन विकल्प थे।

टीम बैलेंस के लिहाज़ से यह दोनों अक्सर आगे रहे।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मिश्रा पर भरोसा नहीं था।

मिश्रा का करियर बताता है—
जब भी टीम को प्योर लेग स्पिन चाहिए थी, वह दरवाज़ा बंद नहीं था।

आंकड़े जो कहानी बताते हैं

अमित मिश्रा का अंतरराष्ट्रीय करियर

फॉर्मेटमैचविकेट
टेस्ट2276
वनडे3664
टी20I1016

एक 6 विकेट हॉल।
कई मैच जिताने वाले स्पेल।
लेकिन लगातार प्लेइंग XI नहीं।

यह करियर निराशा से ज़्यादा भरोसे का उतार-चढ़ाव था।

अफवाह बनाम हकीकत

सालों से कहा जाता रहा:

  • धोनी ने मिश्रा को पूरी तरह बैक नहीं किया
  • अश्विन–जडेजा को प्राथमिकता मिली
  • और मिश्रा पीछे रह गए

लेकिन खुद मिश्रा की बात कुछ और कहती है।

“हर चीज़ का एक पॉजिटिव और एक नेगेटिव होता है,” उन्होंने कहा।
“मैं पॉजिटिव आदमी हूं।”

धोनी का असली कैप्टनशिप स्टाइल

धोनी का तरीका सीधा था:

  • पब्लिक सपोर्ट कम
  • प्राइवेट भरोसा ज़्यादा
  • और रोल बिल्कुल साफ

मिश्रा जैसे स्पिनर के लिए यह स्टाइल कभी-कभी गलत समझा गया।
लेकिन अंदर की कहानी—अब सामने है।

करियर छोटा या सही इस्तेमाल?

यह सवाल अब भी रहेगा—
क्या अमित मिश्रा और लंबा खेल सकते थे?

शायद हां।
शायद नहीं।

लेकिन यह कहना कि धोनी ने उनका करियर “खत्म” किया—
खुद मिश्रा की नज़र में भी गलत है।

एक स्पिनर का क्लोज़िंग नोट

अमित मिश्रा की बातों में कड़वाहट नहीं थी।
कोई शिकायत नहीं।
बस साफ-साफ हकीकत।

कभी-कभी क्रिकेट करियर वो नहीं होता जो हम सोचते हैं,
बल्कि वो होता है जो टीम को उस वक़्त चाहिए होता है।

और उस दौर में, मिश्रा को जो रोल मिला—
वह शायद छोटा था,
लेकिन जब मिला, पूरा मिला।

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