Ashes : कैमरन ग्रीन को किस बात से बचने को कह रहे हैं पोंटिंग

Atul Kumar
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Ashes – कैमरन ग्रीन इस वक्त ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट के उस मोड़ पर खड़े हैं, जहां टैलेंट पर सवाल नहीं है, लेकिन दिशा पर बहस ज़रूर है। ऊंचा कद, तेज़ गेंद, साफ़ बैट स्विंग और ऑलराउंडर का टैग—सब कुछ है।

फिर भी एशेज जैसे बड़े मंच पर परफॉर्मेंस उम्मीदों से नीचे रहा। और यहीं से एंट्री होती है रिकी पोंटिंग की—सीधी, सख्त और बिल्कुल ऑस्ट्रेलियन सलाह के साथ: “चीज़ों को सरल रखो, ज़्यादा मत सोचो।”

पोंटिंग की चेतावनी: ओवरथिंकिंग टेस्ट क्रिकेट की सबसे बड़ी दुश्मन

ऑस्ट्रेलिया के महान कप्तान रिकी पोंटिंग ने ‘ICC Review’ में कैमरन ग्रीन को लेकर जो कहा, वह सिर्फ एक खिलाड़ी के लिए नहीं, बल्कि हर उभरते टेस्ट क्रिकेटर के लिए सबक है।

पोंटिंग का मानना है कि ग्रीन अपने खेल को लेकर जरूरत से ज्यादा सोचते हैं और बार-बार बदलाव करने की कोशिश करते हैं।

उनके शब्दों में,
“अगर मुझे उसे कोई एक सलाह देनी हो, तो वह यही होगी—चीज़ों को जितना हो सके उतना सरल बनाए रखो। अपने घरेलू क्रिकेट के प्रदर्शन के बारे में सोचो और वही टेस्ट क्रिकेट में दोहराने की कोशिश करो।”

टेस्ट क्रिकेट में, पोंटिंग के मुताबिक, एनालिसिस ज़रूरी है—लेकिन ओवर-एनालिसिस करियर खा जाता है।

25.20 करोड़ की कीमत, लेकिन एशेज में फीकी चमक

कैमरन ग्रीन हाल ही में सुर्खियों में तब आए जब IPL 2026 मिनी ऑक्शन में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) ने उन्हें ₹25.20 करोड़ में खरीदा। यह रकम सिर्फ स्किल की नहीं, बल्कि भविष्य की उम्मीद की कीमत थी।

लेकिन उसी वक्त चल रही एशेज सीरीज़ में उनका प्रदर्शन सवालों के घेरे में रहा।

पहले तीन टेस्ट में:

  • रन: 76
  • विकेट: 2
  • प्रभाव: सीमित

हालांकि ऑस्ट्रेलिया ने पहले तीनों टेस्ट जीतकर एशेज अपने नाम कर ली, लेकिन ग्रीन उस जीत की कहानी के सेंट्रल कैरेक्टर नहीं बन पाए।

घरेलू क्रिकेट बनाम टेस्ट प्रेशर

पोंटिंग की सलाह का सबसे अहम हिस्सा यहीं है। उनका मानना है कि ग्रीन को:

  • नई तकनीक
  • नए बैटिंग ट्रिगर
  • या लगातार रोल बदलने

से बचना चाहिए।

ऑस्ट्रेलिया में घरेलू क्रिकेट में ग्रीन का रिकॉर्ड बताता है कि जब वह सहज रहते हैं, तो प्रभावी होते हैं। टेस्ट क्रिकेट में समस्या स्किल की नहीं, मेंटल क्लैरिटी की है।

आंकड़े क्या कहते हैं? ग्रीन का टेस्ट प्रोफाइल

अब ज़रा ठंडे दिमाग से आंकड़ों को देखें।

कैटेगरीआंकड़े
टेस्ट मैच35
रन1,641
बल्लेबाज़ी औसत~33
शतक2
विकेट37

ये आंकड़े खराब नहीं हैं, लेकिन ऑस्ट्रेलिया जैसे सिस्टम में ऑलराउंडर से उम्मीदें इससे ज्यादा होती हैं।

पोंटिंग का रियलिस्टिक आकलन

रिकी पोंटिंग ने ग्रीन को ना तो फ्लॉप कहा, ना ही सुपरस्टार बना दिया। उनका स्टैंड संतुलित है।

उन्होंने साफ कहा कि 26 साल की उम्र में ग्रीन के करियर का फाइनल जजमेंट देना जल्दबाज़ी होगी।

पोंटिंग ने कुछ अहम फैक्टर्स भी गिनाए:

  • ऑस्ट्रेलिया में ग्रीन का औसत 30 से कम
  • करियर औसत 30 से थोड़ा ऊपर
  • 30 टेस्ट में सिर्फ 2 शतक
  • पीठ की सर्जरी
  • गेंदबाज़ी की रफ्तार में गिरावट

यानी यह सिर्फ फॉर्म का मसला नहीं, बल्कि फिजिकल और रोल मैनेजमेंट का भी सवाल है।

सर्जरी के बाद वही ग्रीन नहीं?

ग्रीन की बैक सर्जरी को हल्के में नहीं लिया जा सकता। पोंटिंग ने इशारों में कहा कि:

  • गेंदबाज़ी की गति पहले जैसी नहीं रही
  • वर्कलोड मैनेजमेंट ज़रूरी है
  • ऑलराउंडर के रोल को रीडिफाइन करना पड़ सकता है

यह वही फेज़ है जहां कई ऑलराउंडर या तो स्पेशलिस्ट बनते हैं, या दबाव में टूट जाते हैं।

टेस्ट क्रिकेट में सर्वाइव करने का ऑस्ट्रेलियन फॉर्मूला

पोंटिंग की सलाह असल में ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट फिलॉसफी का सार है:

  • बेसिक्स पर भरोसा
  • रोल क्लैरिटी
  • घरेलू फॉर्म का ट्रांसलेशन
  • और धैर्य

टेस्ट क्रिकेट में हर मैच खुद को दोबारा साबित करने की परीक्षा नहीं होना चाहिए। यही ग्रीन के लिए सबसे बड़ा सबक है।

क्या IPL प्राइस टैग भी दबाव बढ़ा रहा है?

₹25 करोड़ का टैग सिर्फ जेब नहीं, दिमाग पर भी भारी पड़ता है। खासकर जब खिलाड़ी:

  • इंटरनेशनल क्रिकेट खेल रहा हो
  • एशेज जैसे हाई-प्रेशर सीरीज़ में हो
  • और खुद को ऑलराउंडर साबित करने की जद्दोजहद में हो

ग्रीन को यह समझना होगा कि टेस्ट क्रिकेट और IPL दो अलग दुनियाएं हैं। पोंटिंग की सलाह इसी फर्क को समझाने की कोशिश है।

आगे का रास्ता: सरल, स्थिर और सधे हुए कदम

कैमरन ग्रीन के पास अभी वक्त है।

  • उम्र: 26
  • सिस्टम का भरोसा
  • कप्तानों का सपोर्ट

लेकिन टेस्ट क्रिकेट में सर्वाइव करना सिर्फ टैलेंट से नहीं होता। मेंटल स्टेबिलिटी ही असली करेंसी है।

पोंटिंग ने जो कहा, वह आलोचना नहीं—चेतावनी है।

निष्कर्ष: जितना कम सोचोगे, उतना लंबा खेलोगे

कैमरन ग्रीन को अगर टेस्ट क्रिकेट में लंबा करियर बनाना है, तो उन्हें खुद को फिर से वही खिलाड़ी बनाना होगा—

  • जो घरेलू क्रिकेट में बेखौफ खेलता था
  • जो बदलाव नहीं, भरोसे से खेलता था
  • और जो हर गेंद को साबित करने का मौका नहीं मानता था

रिकी पोंटिंग ने रास्ता दिखा दिया है।
अब गेंद ग्रीन के पाले में है।

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