Ashes 2025 – ऑस्ट्रेलिया की ज़मीन पर एक और एशेज हार, स्कोरलाइन 0-3, और सीरीज़ खत्म होने से पहले ही कहानी का अंत—इंग्लैंड क्रिकेट एक बार फिर वहीं खड़ा है, जहां सवाल कप्तान से ज़्यादा कोचिंग बॉक्स की ओर घूमने लगते हैं। और इस बार उंगली सीधे ब्रेंडन मैकुलम पर उठी है।
इसी बहस के बीच इंग्लैंड के पूर्व स्पिनर मोंटी पनेसर ने एक ऐसा नाम उछाल दिया है, जिसने चर्चा को नया मोड़ दे दिया—रवि शास्त्री।
मैकुलम पर दबाव क्यों बढ़ा?
11 दिनों के भीतर एशेज गंवाना।
दो टेस्ट बाकी रहते हुए 0-3 से पिछड़ना।
और मैदान पर वही पुरानी कहानी—ऑस्ट्रेलिया के सामने रणनीति बिखरी हुई।
मैकुलम के “बाज़बॉल” दर्शन ने शुरुआत में इंग्लैंड को नई पहचान दी थी, लेकिन ऑस्ट्रेलिया में वही अप्रोच हथियार से ज़्यादा कमजोरी बनती दिखी।
अब सवाल सीधा है—क्या यह सिर्फ खिलाड़ियों की नाकामी है, या कोचिंग मैसेज ही अब असर खो चुका है?
मोंटी पनेसर का बड़ा सुझाव
इंग्लैंड के पूर्व स्पिनर मोंटी पनेसर ने इस बहस में आग डाल दी है। पत्रकार रवि बिष्ट के यूट्यूब चैनल पर बातचीत में पनेसर ने साफ कहा कि अब टॉप लीडरशिप में बदलाव का वक्त आ गया है।
उनके मुताबिक, इंग्लैंड को ऐसा कोच चाहिए जो:
- ऑस्ट्रेलिया को ऑस्ट्रेलिया में हराने की मानसिकता रखता हो
- सिर्फ थ्योरी नहीं, प्रैक्टिकल अनुभव जानता हो
- दबाव में टीम को संभालना जानता हो
और पनेसर की नज़र में यह प्रोफाइल एक ही नाम पर फिट बैठती है—रवि शास्त्री।
“ऑस्ट्रेलिया को हराने का तरीका कौन जानता है?”
पनेसर के शब्दों में ही बात समझिए:
“आपको सोचना होगा—ऑस्ट्रेलिया को ऑस्ट्रेलिया में हराने का सही तरीका कौन जानता है? उनकी मानसिक, शारीरिक और रणनीतिक कमजोरियों का फायदा कैसे उठाया जाए? मुझे लगता है कि रवि शास्त्री इंग्लैंड के अगले मुख्य कोच होने चाहिए।”
यह बयान यूं ही नहीं आया। इसके पीछे ठोस इतिहास है।
रवि शास्त्री का ऑस्ट्रेलिया रिकॉर्ड: यही असली वजह
पनेसर का सुझाव भावनाओं पर नहीं, रिकॉर्ड बुक पर टिका है।
रवि शास्त्री के कार्यकाल में भारत ने:
- 2018–19 बॉर्डर–गावस्कर ट्रॉफी ऑस्ट्रेलिया में जीती (पहली बार)
- 2020–21 बॉर्डर–गावस्कर ट्रॉफी फिर ऑस्ट्रेलिया में जीती
वह भी तब, जब:
- टीम चोटों से जूझ रही थी
- ब्रिसबेन जैसे किले को ढहाया गया
- दबाव चरम पर था
यानी शास्त्री सिर्फ रणनीतिक कोच नहीं, बल्कि मेंटल टफनेस के आर्किटेक्ट रहे हैं।
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया और ICC के आधिकारिक रिकॉर्ड भी इन सीरीज़ जीतों की पुष्टि करते हैं।
मैकुलम का सफर: शानदार शुरुआत, फिर ठहराव
ब्रेंडन मैकुलम को मई 2022 में इंग्लैंड का मुख्य कोच बनाया गया था। तब हालात बेहद खराब थे—इंग्लैंड अभी-अभी ऑस्ट्रेलिया से 4-0 से एशेज हारकर लौटा था।
मैकुलम और कप्तान बेन स्टोक्स ने मिलकर टीम में क्रांतिकारी बदलाव किए:
- आक्रामक सोच
- रिज़ल्ट-ओरिएंटेड क्रिकेट
- डरमुक्त अप्रोच
नतीजा?
पहले 11 टेस्ट में 10 जीत।
लेकिन फिर ग्राफ नीचे आया।
आंकड़े जो कहानी बदल देते हैं
शुरुआती उड़ान के बाद:
- अगले 33 टेस्ट मैचों में
- इंग्लैंड को 16 हार झेलनी पड़ी
और ऑस्ट्रेलिया दौरे पर वही पुरानी तस्वीर—
- टॉप ऑर्डर बिखरा
- गेंदबाज़ी में धैर्य की कमी
- रणनीति में जिद
यहीं से मैकुलम मॉडल पर सवाल तेज़ हुए।
क्या इंग्लैंड को “बाज़बॉल” से आगे देखना चाहिए?
पनेसर की बातों का सार यही है—
ऑस्ट्रेलिया में सिर्फ एग्रेसिव क्रिकेट काफी नहीं।
वहां चाहिए:
- परिस्थितियों की समझ
- लंबे स्पैल की योजना
- और मानसिक मजबूती
रवि शास्त्री का कोचिंग स्टाइल ठीक इसी डीएनए पर टिका रहा है।
क्या यह बदलाव संभव है?
फिलहाल:
- मैकुलम का कॉन्ट्रैक्ट सुरक्षित है
- ECB की ओर से कोई आधिकारिक संकेत नहीं
- लेकिन दबाव साफ दिख रहा है
ऐसे में पनेसर का बयान शायद तुरंत बदलाव नहीं लाएगा, लेकिन बहस जरूर सेट कर देगा।
इंग्लैंड क्रिकेट के सामने असली सवाल
यह बहस सिर्फ एक कोच बनाम दूसरे कोच की नहीं है।
सवाल यह है:
- क्या इंग्लैंड एशेज जीतना चाहता है या सिर्फ “एंटरटेनिंग” दिखना?
- क्या आक्रामकता और रणनीति के बीच बैलेंस बन पाया है?
और सबसे अहम—
ऑस्ट्रेलिया में जीतने का ब्लूप्रिंट किसके पास है?
निष्कर्ष: सुझाव से शुरू हुई, बहस तक पहुंची बात
मोंटी पनेसर ने नाम लिया है रवि शास्त्री का।
लेकिन असल में उन्होंने इंग्लैंड क्रिकेट को आईना दिखाया है।
मैकुलम ने बदलाव लाया।
स्टोक्स ने जोश भरा।
लेकिन एशेज में नतीजे अब भी वही हैं।
अगर इंग्लैंड को सच में ऑस्ट्रेलिया में एशेज जीतनी है, तो शायद सोच भी उतनी ही कठोर करनी होगी—जितनी वहां की पिचें होती हैं।















