Test – सिडनी की सुबह इंग्लैंड के लिए नतीजों से ज़्यादा रिकॉर्ड्स की कहानी लेकर आई। एशेज पहले ही हाथ से निकल चुकी है, लेकिन जो रूट ने पांचवें और आखिरी टेस्ट में ऐसा अर्धशतक जड़ा कि पूरी क्रिकेट दुनिया का ध्यान एक बार फिर उन्हीं पर टिक गया।
यह सिर्फ एक और फिफ्टी नहीं थी—यह सचिन तेंदुलकर के ऐतिहासिक वर्ल्ड रिकॉर्ड से महज़ एक कदम की दूरी थी।
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ, उनकी ज़मीन पर, दबाव में—रूट ने वही किया जो वह पिछले एक दशक से करते आए हैं: टीम को संभाला, पारी को स्थिर किया और इतिहास के पन्नों में अपनी मौजूदगी और गहरी कर दी।
शुरुआती झटकों के बाद रूट–ब्रूक ने संभाली पारी
सिडनी टेस्ट में इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी का फैसला लिया, लेकिन शुरुआत बिल्कुल भी आदर्श नहीं रही। 57 रन के भीतर ही इंग्लैंड ने अपने टॉप-3 बल्लेबाज़ गंवा दिए।
- जैक क्रॉली
- बेन डकेट
- जैकब बेथल
तीन विकेट गिरते ही पारी डगमगाने लगी थी। यहीं पर क्रीज़ पर आए जो रूट—और उनके साथ युवा हैरी ब्रूक।
दोनों ने चौथे विकेट के लिए शतकीय साझेदारी की और ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ों की शुरुआती धार को कुंद कर दिया। रूट ने अपने चिर-परिचित अंदाज़ में पारी को थामा, जबकि ब्रूक ने आक्रामक स्ट्रोक्स से दबाव हटाया। देखते ही देखते दोनों ने अपने-अपने अर्धशतक पूरे कर लिए।
67वां अर्धशतक और चंद्रपॉल पीछे छूटे
इस अर्धशतक के साथ ही जो रूट ने एक बड़ा माइलस्टोन पार कर लिया। वह टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा अर्धशतक लगाने वाले बल्लेबाजों की सूची में अब अकेले दूसरे नंबर पर पहुंच गए हैं।
रूट का यह टेस्ट करियर का 67वां अर्धशतक था।
इसके साथ ही उन्होंने वेस्टइंडीज़ के दिग्गज शिवनरेन चंद्रपॉल (66 फिफ्टी) को पीछे छोड़ दिया।
अब इस ऐतिहासिक सूची में उनसे आगे सिर्फ एक नाम बचा है—
सचिन तेंदुलकर।
सचिन का रिकॉर्ड, अब बस एक फिफ्टी दूर
टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज़्यादा अर्धशतकों का वर्ल्ड रिकॉर्ड अब भी सचिन तेंदुलकर के नाम दर्ज है।
| खिलाड़ी | टेस्ट अर्धशतक |
|---|---|
| सचिन तेंदुलकर | 68 |
| जो रूट* | 67 |
| शिवनरेन चंद्रपॉल | 66 |
| राहुल द्रविड़ | 63 |
| एलन बॉर्डर | 63 |
| रिकी पोंटिंग | 62 |
| जैक्स कैलिस | 58 |
| एलिस्टर कुक | 57 |
अब रूट को सिर्फ एक और फिफ्टी चाहिए—और वह सचिन के रिकॉर्ड की बराबरी कर लेंगे। यह रिकॉर्ड तोड़ने के लिए उन्हें इसके बाद एक और अर्धशतक का इंतज़ार करना होगा, लेकिन बराबरी… वह इसी टेस्ट में संभव है।
एशेज हार, लेकिन रूट की जीत जारी
पांच मैचों की एशेज सीरीज़ इंग्लैंड पहले ही गंवा चुका है। ऑस्ट्रेलिया ने शुरुआती तीन टेस्ट जीतकर सीरीज़ अपने नाम कर ली थी। चौथे टेस्ट में इंग्लैंड ने 15 साल बाद ऑस्ट्रेलियाई धरती पर टेस्ट जीतकर ज़रूर राहत पाई, लेकिन ट्रॉफी तो हाथ से निकल चुकी थी।
अब पांचवें टेस्ट में इंग्लैंड की कोशिश सीरीज़ को 2–3 पर खत्म करने की है—इज़्ज़त बचाने की लड़ाई।
लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर देखें तो यह टेस्ट जो रूट का बनता जा रहा है।
क्यों खास है रूट का यह रिकॉर्ड?
यह रिकॉर्ड सिर्फ संख्या का खेल नहीं है।
67 अर्धशतक का मतलब है—
- अलग-अलग परिस्थितियों में निरंतरता
- तेज़ पिच, स्पिन ट्रैक, सीम मूवमेंट—हर जगह रन
- कप्तानी के दौर का दबाव झेलने के बाद भी प्रदर्शन
और सबसे अहम बात—
यह रिकॉर्ड टेस्ट क्रिकेट की सबसे लंबी परीक्षा में बना है।
सचिन, द्रविड़, पोंटिंग, कैलिस—इस सूची में शामिल हर नाम अपने दौर का स्तंभ रहा है। अब उसी लाइन में जो रूट खड़े हैं, और लगभग शिखर पर।
क्या इसी मैच में बराबरी संभव?
तकनीकी तौर पर—हां।
अगर रूट इस पारी में 100 के पार जाते हैं, तो वह:
- 68वीं फिफ्टी के साथ सचिन की बराबरी
- और फिर अगली फिफ्टी पर इतिहास रच सकते हैं
हालांकि रिकॉर्ड पूरी तरह तोड़ने के लिए उन्हें अगले मैच का इंतज़ार करना पड़ सकता है, लेकिन सचिन के बराबर आना भी अपने आप में ऐतिहासिक होगा।
नतीजों से परे एक विरासत
एशेज हार-जीत की कहानी अलग है।
लेकिन सिडनी टेस्ट एक और कहानी लिख रहा है—
जो रूट बनाम इतिहास।
हर फिफ्टी के साथ वह सिर्फ रन नहीं जोड़ रहे, बल्कि टेस्ट क्रिकेट की विरासत में अपनी जगह और पक्की कर रहे हैं।
सचिन का रिकॉर्ड अब अकेला नहीं रहा।
एक और नाम बहुत पास आ चुका है।
और सिडनी अभी खत्म नहीं हुआ है।















