Ashwin – टीम इंडिया की 2–0 वाली घरेलू हार ने सिर्फ खिलाड़ियों की तकनीक और मानसिकता पर सवाल नहीं उठाए—उसने पूरे भारतीय क्रिकेट सिस्टम में एक बहस खड़ी कर दी कि टेस्ट टीम का भविष्य आखिर किस दिशा में जा रहा है।
गुवाहाटी टेस्ट खत्म होते ही सोशल मीडिया, टीवी स्टूडियो और पूर्व खिलाड़ियों की बातचीत में एक ही बात गूंजने लगी—“गौतम गंभीर को टेस्ट कोचिंग से हटाया जाए।”
लेकिन इसी तूफान के बीच एक बेहद ठंडी, संतुलित और कड़वी सच्चाई सामने आई—और उसे सामने लाया रविचंद्रन अश्विन ने।
अश्विन, जिन्होंने गंभीर की कोचिंग में दिसंबर तक खेला, उन्होंने खुलकर कहा—
“कोच पर दोष लगाना आसान है, लेकिन बल्लेबाजी गेंदबाजी करने मैदान में कोच नहीं जाता। जिम्मेदारी खिलाड़ियों की है।”
अश्विन का करारा जवाब—“कोच बैट लेकर नहीं खेलने जाएगा”
गुवाहाटी टेस्ट के तुरंत बाद यूट्यूब चैनल “ऐश की बात” में अश्विन ने लंबा विश्लेषण किया।
उनका पहला वाक्य ही सबसे ज्यादा असरदार था:
“एक कोच बल्ला उठाकर खेलने नहीं जा सकता। वह सिर्फ गाइड कर सकता है, बात कर सकता है—बाकी सब खिलाड़ियों का काम है।”
यह बयान उस समय और भी तीखा लगा क्योंकि ठीक उसी वक्त गंभीर के खिलाफ #SackTheCoach जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे थे।
अश्विन ने कहा कि:
- कोच फैसले बना सकता है
- स्ट्रैटेजी दे सकता है
- प्लान समझा सकता है
लेकिन मैच के दिन:
- शॉट कौन खेलेगा
- गेंद कहाँ डालनी है
- दबाव में कैसी बॉडी लैंग्वेज रखनी है
- साझेदारी कैसे बनानी है
ये सब खिलाड़ियों को ही करना होता है।
“गंभीर मेरा रिश्तेदार नहीं”—अश्विन का साफ संदेश
इंटरनेट पर यह भी चर्चा थी कि अश्विन गंभीर के करीबी होने के कारण उनका बचाव कर रहे हैं।
इस पर अश्विन का जवाब एकदम सीधा था:
“गौतम मेरा रिश्तेदार नहीं है। अगर चाहता तो उनकी 10 गलतियाँ भी गिना देता। पर बात यहाँ गलतियों की नहीं—जिम्मेदारी की है।”
यानी अश्विन का बचाव भावनात्मक नहीं, पेशेवर था।
खिलाड़ी जिम्मेदारी से बच रहे हैं? अश्विन ने बड़ा आरोप लगाया
अश्विन ने कहा कि उन्हें हाल के दिनों में यह चीज़ लगातार दिख रही है कि कई खिलाड़ी अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं।
उन्होंने कहा:
“मैंने बहुत कम खिलाड़ियों को देखा है जो कहें—हाँ, ये मेरी गलती थी।
हर जगह हम कोच को दोष देने की तलाश में रहते हैं।”
उन्होंने एक तमिल कहावत भी सुनाई:
“अगर आपके पास आटा है तो रोटी बना सकते हैं।
अगर आटा ही नहीं, तो रोटी कैसे बनेगी?”
मतलब—अगर खिलाड़ी खुद तैयार नहीं, मानसिक रूप से मजबूत नहीं, और टेस्ट डायनेमिक्स नहीं समझ रहे, तो कोच के पास विकल्प ही क्या रह जाता है?
“बहुत रोटेशन हुआ”—लेकिन फिर भी खिलाड़ी अपनी जगह नहीं संभाल पाए
अश्विन ने माना:
- टीम में बहुत रोटेशन हुआ
- चयन नीति स्थिर नहीं थी
- कई खिलाड़ियों को निरंतर मौके नहीं मिले
लेकिन उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि:
“फिर भी, खेलने और परफॉर्म करना खिलाड़ी का काम है।
कोच और कप्तान फैसले ले सकते हैं—पर अमल खिलाड़ी को ही करना होता है।”
गंभीर की आलोचना क्यों बढ़ी?
गौतम गंभीर की कोचिंग में:
- भारत को न्यूजीलैंड से 0–3 की हार
- दक्षिण अफ्रीका से घर में 0–2
- 7 महीनों में 5 घरेलू टेस्ट हार
- बल्लेबाजी लगातार ढहना
- चयन में अस्थिरता
इन वजहों से आलोचना बढ़ी।
लेकिन अश्विन ने साफ कह दिया—“कोच को हटाने से कुछ हल नहीं होगा।”
“कोच को निकालना आसान लगता है”—अश्विन का सबसे बड़ा बयान
अश्विन ने कहा:
“किसी को नौकरी से निकालना आसान लगता है।
लोग संतुष्ट हो जाते हैं।
लेकिन एक खेल टीम को मैनेज करना इतना आसान नहीं।”
यह बयान आज के क्रिकेट माहौल पर सीधा कटाक्ष है—जहाँ हार का सबसे आसान समाधान कोच पर आरोप लगाना माना जाता है।
रोटेशन—Yes
लेकिन उसका सामना खिलाड़ी को करना ही होता है।
यह बयान सिर्फ गंभीर की रक्षा नहीं—पूरे भारतीय क्रिकेट को झकझोरने जैसा है
अश्विन भारत के सबसे पढ़े-लिखे, सामरिक और स्पष्ट सोच वाले खिलाड़ियों में आते हैं।
उनके इस बयान का मकसद गंभीर को बचाना भर नहीं था।
वह एक सिस्टम की समस्या पर उंगली उठा रहे थे:
- दबाव झेलने की क्षमता
- टेस्ट की मानसिकता
- शॉट चयन
- जिम्मेदारी
- मैच परिस्थिति की समझ
इन मुद्दों पर टीम इंडिया गंभीर रूप से पिछड़ चुकी है।
और शायद यही दर्द अश्विन के शब्दों में छलक कर सामने आया।















