Ashwin : फीफा मॉडल बनाम ICC कैलेंडर – अश्विन ने उठाए सवाल

Atul Kumar
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Ashwin – टी20 विश्व कप 2026 की मेज़बानी भारत और श्रीलंका को मिली है, फरवरी–मार्च का स्लॉट तय है, और काग़ज़ पर यह टूर्नामेंट ब्लॉकबस्टर होना चाहिए। लेकिन भारतीय क्रिकेट के सबसे तेज़ दिमागों में से एक रविचंद्रन

अश्विन ने इस पूरे उत्साह पर ठंडा पानी डाल दिया है। उनका कहना सीधा है—अगर आईसीसी ने अभी भी नहीं सुना, तो इस बार का टी20 विश्व कप लोग देखेंगे ही नहीं।

यह कोई हेडलाइन बाइट नहीं, बल्कि एक रिटायर्ड दिग्गज की सोची-समझी चेतावनी है। अश्विन, जिन्होंने 2024 में इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कहा, अब बाहर से उस सिस्टम को देख रहे हैं, जिसका वह लंबे समय तक हिस्सा रहे। और जो तस्वीर उन्हें दिख रही है, वह चिंताजनक है।

अश्विन की चेतावनी: “हर साल वर्ल्ड कप होगा तो वैल्यू खत्म होगी”

अपने यूट्यूब चैनल पर खुलकर बोलते हुए अश्विन ने कहा कि आईसीसी की सबसे बड़ी समस्या यह है कि उसने वर्ल्ड कप को बहुत सस्ता बना दिया है—मतलब भावनात्मक तौर पर।

उनके शब्दों में,
“इस बार आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप कोई नहीं देखने वाला है। हर साल कोई न कोई आईसीसी टूर्नामेंट हो रहा है। इससे लोगों की दिलचस्पी खत्म हो जाती है।”

अश्विन की दलील सिर्फ फीलिंग पर नहीं, तुलना पर टिकी है। उन्होंने क्रिकेट की तुलना सीधे फुटबॉल के फीफा वर्ल्ड कप से की—जो हर चार साल में एक बार होता है और पूरी दुनिया उसे एक त्योहार की तरह देखती है।

“फीफा को देखिए। चार साल में एक बार वर्ल्ड कप होता है। इसलिए उसका इंतज़ार होता है, उसकी क़ीमत होती है।”

ग्रुप स्टेज की सबसे बड़ी समस्या: एकतरफ़ा मुकाबले

अश्विन की सबसे तीखी टिप्पणी टूर्नामेंट के मौजूदा फॉर्मेट पर रही। खासकर ग्रुप स्टेज में बड़ी टीमों और एसोसिएट देशों के बीच होने वाले मैचों को लेकर।

उन्होंने कहा,
“भारत बनाम अमेरिका, भारत बनाम नामीबिया जैसे मैच लोगों को वर्ल्ड कप से दूर ले जाएंगे।”

यह बयान भले ही कठोर लगे, लेकिन अश्विन का तर्क क्रिकेटिंग रियलिटी पर आधारित है। बड़ी और छोटी टीमों के बीच स्किल गैप इतना ज़्यादा है कि—

  • मैच ज़्यादातर एकतरफ़ा होते हैं
  • नतीजा पहले से अंदाज़ा लगाया जा सकता है
  • और दर्शक भावनात्मक तौर पर जुड़ नहीं पाते

उनके मुताबिक, पहले दौर में अगर भारत का मुकाबला इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया या श्रीलंका जैसी टीमों से होता था, तो टूर्नामेंट पहले ही दिन से पकड़ बना लेता था।

टीमों की संख्या बढ़ी, रोमांच घटा?

आईसीसी ने पिछले कुछ सालों में वर्ल्ड कप में टीमों की संख्या लगातार बढ़ाई है। मकसद साफ है—

  • ग्लोबलाइज़ेशन
  • नए मार्केट्स
  • ज़्यादा मैच
  • ज़्यादा रेवेन्यू

लेकिन अश्विन को लगता है कि इस सोच ने प्रोडक्ट की क्वालिटी को नुकसान पहुंचाया है।

पहलूपहलेअब
टीमों की संख्यासीमितबहुत ज़्यादा
ग्रुप मैचहाई-क्वालिटीकई एकतरफ़ा
दर्शकों की उत्सुकताबनी रहती थीजल्दी घटती है
वर्ल्ड कप का इंतज़ार4 साललगभग हर साल

“हर चीज़ ज़्यादा हो गई है”

अश्विन की सबसे बड़ी चिंता सिर्फ टी20 वर्ल्ड कप नहीं है। वह पूरे क्रिकेट कैलेंडर को लेकर परेशान हैं।

उनका कहना है,
“बहुत ज़्यादा द्विपक्षीय सीरीज़, बहुत ज़्यादा फॉर्मेट और बहुत ज़्यादा वर्ल्ड कप—यह सब मिलकर ओवरडोज़ हो गया है।”

उन्होंने यहां तक कहा कि वनडे फॉर्मेट अब गैरज़रूरी सा हो गया है, क्योंकि—

  • टी20 सबसे ज़्यादा खेला जा रहा है
  • टेस्ट को बचाने की लड़ाई चल रही है
  • और वनडे बीच में लटक गया है

यह वही बात है, जो कई पूर्व खिलाड़ी अलग-अलग शब्दों में पहले भी कह चुके हैं।

2010 के बाद ICC इवेंट्स की बाढ़

अगर पिछले 15 सालों पर नज़र डालें, तो अश्विन की चिंता समझ में आने लगती है।

सालICC इवेंट
2010T20 World Cup
2011ODI World Cup
2012T20 World Cup
2013Champions Trophy
2014T20 World Cup
2015ODI World Cup
2016T20 World Cup
2017Champions Trophy
2018कोई ICC इवेंट नहीं
2019ODI World Cup
2021T20 World Cup
2022T20 World Cup
2023ODI World Cup
2024T20 World Cup
2025Champions Trophy
2026T20 World Cup
2027ODI World Cup

2010 के बाद सिर्फ 2018 ऐसा साल रहा जब कोई ICC टूर्नामेंट नहीं हुआ।

यानी लगभग हर साल—
कोई न कोई “वर्ल्ड इवेंट”।

भारत–श्रीलंका मेज़बानी, लेकिन चुनौती असली है

टी20 विश्व कप 2026 की मेज़बानी भारत और श्रीलंका को मिली है। स्टेडियम्स, फैंस, ब्रॉडकास्ट—सब कुछ मौजूद होगा। बीसीसीआई और श्रीलंका क्रिकेट के पास इंफ्रास्ट्रक्चर की कोई कमी नहीं है

लेकिन अश्विन की चेतावनी यह है कि—

  • सिर्फ भीड़ से
  • सिर्फ शोर से
  • और सिर्फ मार्केटिंग से

वर्ल्ड कप की आत्मा नहीं बचती।

अगर फॉर्मेट दर्शकों को खींच नहीं पाया, तो टीवी और डिजिटल व्यूअरशिप पर सीधा असर पड़ेगा।

क्या ICC सुनेगा?

यह सबसे बड़ा सवाल है।

आईसीसी एक गवर्निंग बॉडी कम और इवेंट मैनेजमेंट मशीन ज़्यादा बनती जा रही है—ऐसा आरोप पहले भी लगता रहा है। लेकिन अश्विन जैसे खिलाड़ी, जो सिस्टम के अंदर रह चुके हैं, अगर खुलकर बोल रहे हैं, तो उसे नज़रअंदाज़ करना आसान नहीं होना चाहिए।

फुटबॉल ने दिखाया है कि—

  • कम इवेंट
  • ज़्यादा वैल्यू
  • और लंबा इंतज़ार

कैसे किसी टूर्नामेंट को खास बनाता है।

चेतावनी को हल्के में न लें

रविचंद्रन अश्विन की बात सिर्फ एक रिटायर्ड खिलाड़ी की भड़ास नहीं है। यह एक क्रिकेटिंग रियलिटी चेक है।

अगर हर साल वर्ल्ड कप होगा,
अगर ग्रुप स्टेज में रोमांच नहीं होगा,
अगर सब कुछ रेवेन्यू ड्रिवन रहेगा—

तो एक दिन लोग सच में पूछेंगे—
“कौन सा वर्ल्ड कप चल रहा है अभी?”

टी20 विश्व कप 2026 के पास अब भी वक्त है।
आईसीसी चाहे तो फॉर्मेट, कैलेंडर और प्राथमिकताओं पर दोबारा सोच सकता है।

क्योंकि वर्ल्ड कप सिर्फ मैचों का नाम नहीं होता।
वह इंतज़ार, उम्मीद और जुनून का नाम होता है।

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