Australia – टी20 वर्ल्ड कप 2026 में ऑस्ट्रेलिया का ग्रुप स्टेज से बाहर होना सिर्फ एक हार नहीं था—यह एक संदेश था। पांच बार की वनडे चैंपियन टीम, बड़े मंच की माहिर, और फिर भी सुपर-8 से पहले घर वापसी। क्रिकेट जगत में हलचल मचना लाजिमी था। और अब पूर्व भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन की तीखी टिप्पणी ने बहस को और तेज कर दिया है।
अपने यूट्यूब शो ‘ऐश की बात’ में खेल पत्रकार विमल कुमार के साथ चर्चा करते हुए अश्विन ने सीधे सवाल उठाया—क्या ऑस्ट्रेलिया ने इस टी20 विश्व कप को उतनी गंभीरता से लिया, जितनी जरूरत थी?
क्या ऑस्ट्रेलिया को सच में फर्क पड़ता है?
अश्विन का कहना था कि यह सिर्फ फॉर्म की समस्या नहीं थी, बल्कि दृष्टिकोण की कमी भी दिखी। उनके मुताबिक, जिस देश के पास प्रतिभा की इतनी गहराई हो, उसका इस तरह से बाहर होना साधारण बात नहीं हो सकती।
ग्रुप-B में ऑस्ट्रेलिया तीन मैचों में सिर्फ 2 अंक जुटा सका और चौथे स्थान पर रहा। दूसरी ओर, जिम्बाब्वे ने 5 अंकों के साथ सुपर-8 में जगह बनाकर इतिहास रच दिया।
ग्रुप-B की स्थिति
| टीम | मैच | अंक | स्थिति |
|---|---|---|---|
| जिम्बाब्वे | 3 | 5 | क्वालीफाई |
| — | — | — | — |
| ऑस्ट्रेलिया | 3 | 2 | बाहर |
चयन पर सवाल: हेज़लवुड और कमिंस क्यों नहीं?
अश्विन ने टीम चयन पर भी खुलकर सवाल उठाए। उन्होंने खासतौर पर जोश हेज़लवुड और पैट कमिंस जैसे अनुभवी गेंदबाजों की अनुपस्थिति को बड़ा कारण बताया।
उनका मानना है कि बड़े टूर्नामेंट में अनुभव की अहमियत होती है। टी20 फॉर्मेट भले तेज हो, लेकिन दबाव के क्षण वही खिलाड़ी संभालते हैं जो बड़े मंच के आदी हों।
मिचेल स्टार्क को लेकर भी उन्होंने कड़ा बयान दिया—“शायद उनका समय अब समाप्त हो चुका है।” यह टिप्पणी ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट सर्कल में चर्चा का विषय बन चुकी है।
भारत से तुलना: भूख और निरंतरता
अश्विन ने भारतीय टीम का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत ने वर्षों तक विश्व कप जीतने के लिए लगातार प्रयास किए, असफलताओं के बावजूद हार नहीं मानी।
उनके अनुसार, इस टूर्नामेंट में ऑस्ट्रेलिया में वह “भूख” नजर नहीं आई। जिम्बाब्वे जैसी टीम के खिलाफ 170 रन के लक्ष्य का पीछा करते समय भी बल्लेबाजी संघर्ष करती दिखी।
यह वही ऑस्ट्रेलिया है जो बड़े मैचों में मानसिक मजबूती के लिए जानी जाती रही है। लेकिन इस बार वह धार गायब थी।
क्या टी20 प्राथमिकता में पीछे है?
एक बड़ा सवाल यही है—क्या ऑस्ट्रेलिया टी20 को उतनी प्राथमिकता देता है जितनी टेस्ट और वनडे को?
ऑस्ट्रेलिया की क्रिकेट संस्कृति लंबे फॉर्मेट पर आधारित रही है। लेकिन आधुनिक दौर में फ्रेंचाइज़ी लीग और आक्रामक टी20 टेम्पलेट ने खेल का संतुलन बदल दिया है।
अगर कोई टीम इस बदलाव के साथ खुद को ढालने में धीमी रहती है, तो नतीजे सामने आते हैं।
जिम्बाब्वे की कहानी: नया अध्याय
जहां ऑस्ट्रेलिया बाहर हुआ, वहीं जिम्बाब्वे ने सुपर-8 में पहुंचकर इतिहास रचा। यह परिणाम सिर्फ उलटफेर नहीं, बल्कि संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अंतर कम हो रहा है।
छोटी टीमें अब सिर्फ भाग लेने नहीं, जीतने भी आ रही हैं।
आगे का रास्ता
अब असली सवाल है—क्या ऑस्ट्रेलिया इस हार से सीख लेगा?
क्या टीम चयन में बदलाव होगा?
क्या युवा खिलाड़ियों को ज्यादा मौके मिलेंगे?
या फिर टी20 ढांचे में रणनीतिक पुनर्निर्माण होगा?
इतिहास बताता है कि ऑस्ट्रेलिया वापसी करना जानता है। लेकिन इस बार आलोचना भीतर से नहीं, बाहर से भी तेज है।
रविचंद्रन अश्विन की टिप्पणी कड़ी जरूर है, लेकिन पूरी तरह निराधार नहीं। बड़े टूर्नामेंट सिर्फ नाम और इतिहास से नहीं जीते जाते। वहां रणनीति, प्रतिबद्धता और मानसिक दृढ़ता की जरूरत होती है।
टी20 वर्ल्ड कप 2026 में ऑस्ट्रेलिया की विदाई एक चेतावनी है—कि क्रिकेट का परिदृश्य बदल चुका है।
अब देखना यह है कि कंगारू टीम अगली बार मैदान पर जवाब देती है… या बहस और लंबी चलती है।















