BCCI : ऑस्ट्रेलिया हार के बाद बदला रोडमैप – BCCI ने सख्त किया डोमेस्टिक नियम

Atul Kumar
Published On:
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BCCI – क्रिसमस से ठीक पहले भारतीय क्रिकेट में एक सख़्त लेकिन साफ़ संदेश आ गया है—अब सीनियर खिलाड़ियों के लिए घरेलू क्रिकेट ‘ऑप्शनल’ नहीं रहेगा।

बीसीसीआई ने तय कर दिया है कि मौजूदा भारतीय खिलाड़ी विजय हजारे ट्रॉफी 2025–26 में कम से कम दो वनडे मैच जरूर खेलेंगे। 24 दिसंबर से शुरू हो रहे इस टूर्नामेंट को अब सिर्फ डोमेस्टिक कैलेंडर का हिस्सा नहीं, बल्कि नेशनल ड्यूटी माना जाएगा।

क्यों लिया गया यह फैसला?

दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ आखिरी टी20 मैच 19 दिसंबर को है, जबकि न्यूजीलैंड के खिलाफ पहला वनडे 11 जनवरी 2026 से शुरू होगा। यानी बीच में तीन हफ्ते से ज्यादा का खाली स्लॉट।

बीसीसीआई का साफ मानना है—
अगर खिलाड़ी फिट हैं, उपलब्ध हैं और देश में हैं, तो उन्हें डोमेस्टिक क्रिकेट खेलना चाहिए।

इसी सोच के तहत अजीत अगरकर की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने यह निर्देश सभी सीनियर खिलाड़ियों को दे दिया है।

ऑस्ट्रेलिया दौरे की हार के बाद बदली सोच

यह फैसला अचानक नहीं आया।
इस साल की शुरुआत में ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज़ हार के बाद बोर्ड के अंदर गहन समीक्षा हुई थी। उस समीक्षा में एक अहम सिफारिश थी—

हर फॉर्मेट में घरेलू क्रिकेट को दोबारा केंद्र में लाया जाए।

मतलब साफ था:
नेट्स और आईपीएल काफी नहीं हैं।
मैच सिचुएशन, लंबी पारियां और घरेलू दबाव—सब कुछ जरूरी है।

कोहली–रोहित ने दे दी है उपलब्धता

इस निर्देश के बाद सबसे अहम सवाल था—क्या यह नियम सिर्फ नाम के लिए है?

जवाब साफ है—नहीं।

विराट कोहली और रोहित शर्मा ने पहले ही विजय हजारे ट्रॉफी के लिए अपनी उपलब्धता की सूचना दे दी है।
और इससे एक मैसेज चला गया है—यह सिर्फ “युवा खिलाड़ियों के लिए” नहीं है।

किन खिलाड़ियों से दो मैच खेलने की उम्मीद?

सूत्रों के मुताबिक, ये सीनियर खिलाड़ी भी कम से कम दो मुकाबले खेल सकते हैं:

– शुभमन गिल
– जसप्रीत बुमराह
– केएल राहुल
– हार्दिक पांड्या
– सूर्यकुमार यादव

हालांकि, कौन खिलाड़ी कौन से दो राउंड खेलेगा—यह खिलाड़ी और उनके राज्य संघ आपस में तय करेंगे।

BCCI अधिकारी ने क्या कहा?

बीसीसीआई के एक सीनियर अधिकारी ने स्थिति साफ करते हुए कहा:

“विजय हजारे ट्रॉफी के छह राउंड 24 दिसंबर से शुरू हो रहे हैं। खिलाड़ी और उनके राज्य संघ तय करेंगे कि वे कौन से दो राउंड खेलना चाहते हैं।”

उन्होंने यह भी जोड़ा:

“छूट सिर्फ उसी स्थिति में दी जाएगी, जब सेंटर ऑफ एक्सीलेंस किसी खिलाड़ी को अनफिट घोषित करे। बोर्ड का मानना है कि दक्षिण अफ्रीका सीरीज़ के बाद रिकवरी के लिए पर्याप्त समय मिलेगा।”

‘सिर्फ कोहली–रोहित को टारगेट नहीं किया जा रहा’

इस फैसले से एक और धारणा भी टूटती है—
कि चयन समिति और हेड कोच गौतम गंभीर सिर्फ कोहली और रोहित का उदाहरण सेट करना चाहते हैं।

असल में यह पूरे सीनियर ग्रुप के लिए समान नियम है।
नाम बड़ा हो या छोटा—अगर फिट हैं, तो खेलना होगा।

बुमराह को लेकर अपडेट

इस बीच एक अहम अपडेट जसप्रीत बुमराह को लेकर भी सामने आया है।
तेज गेंदबाज़ को धर्मशाला में तीसरे टी20 से पहले निजी कारणों से घर लौटना पड़ा।

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, उनके एक करीबी परिजन को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

सूत्र ने बताया:
“अगर सब कुछ ठीक रहा, तो बुमराह चौथे या पांचवें टी20 मैच के लिए टीम से जुड़ सकते हैं।”

विजय हजारे ट्रॉफी अब सिर्फ घरेलू टूर्नामेंट नहीं

इस फैसले के बाद विजय हजारे ट्रॉफी की अहमियत अचानक बढ़ गई है।

अब यह टूर्नामेंट:
– सीनियर खिलाड़ियों की फॉर्म टेस्टिंग ग्राउंड है
– चयनकर्ताओं के लिए सीधा रेफरेंस पॉइंट
– और खिलाड़ियों के लिए साफ संदेश—डोमेस्टिक क्रिकेट से दूरी अब मुश्किल होगी

भारतीय क्रिकेट का नया रोडमैप?

बीसीसीआई का यह कदम संकेत देता है कि आने वाले समय में:

  1. घरेलू क्रिकेट को दोबारा सम्मान मिलेगा
  2. सीनियर–जूनियर का फर्क कम होगा
  3. “वर्कलोड” की आड़ में लगातार ब्रेक लेना आसान नहीं रहेगा
  4. चयन सिर्फ नाम से नहीं, मैच प्रैक्टिस से तय होगा

यह सख़्ती नहीं, बल्कि सिस्टम को रीसेट करने की कोशिश है।

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