BCCI : जय शाह के विजन से बदला महिला क्रिकेट – मिताली का बड़ा खुलासा

Atul Kumar
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BCCI

BCCI – दिल्ली के उस मंच पर, जहां बीसीसीआई ‘नमन अवॉर्ड्स’ में दिग्गज एक साथ बैठे थे—मिताली राज की आवाज़ थोड़ी अलग थी। उसमें जश्न भी था… और एक लंबा इंतज़ार पूरा होने की संतुष्टि भी।

“मैं बरसों से चाहती थी कि भारतीय क्रिकेट का दबदबा हो… और अब वो समय आ गया है।”

यह सिर्फ एक बयान नहीं था—यह उस दौर का सार था, जिसे भारत ने पिछले कुछ सालों में जिया है।

एक साथ तीनों स्तर पर दबदबा

क्रिकेट में “डॉमिनेशन” का मतलब सिर्फ एक टीम का जीतना नहीं होता।

मिताली जिस बात की ओर इशारा कर रही थीं—वह है सिस्टम की जीत।

हाल की बड़ी उपलब्धियां

स्तरउपलब्धि
पुरुष टीमटी20 वर्ल्ड कप 2024, 2026
महिला टीमपहला ODI वर्ल्ड कप
अंडर-19 (जूनियर)विश्व कप खिताब

यानी, यह अब सिर्फ एक टीम की कहानी नहीं—
पूरा “इकोसिस्टम” जीत रहा है।

“अब गर्व होता है”—एक पूर्व खिलाड़ी की नजर

मिताली राज, जिन्होंने खुद उस दौर को देखा है जब महिला क्रिकेट को पहचान के लिए संघर्ष करना पड़ता था—

आज जब यह बदलाव देखती हैं, तो उनकी बात में एक भावनात्मक वजन है।

उन्होंने कहा—

“एक पूर्व क्रिकेटर होने के नाते यह प्रगति देखकर गर्व महसूस होता है।”

और सच में—

जो खिलाड़ी उस संघर्ष से गुजरे हों,
उनके लिए यह बदलाव सबसे ज्यादा मायने रखता है।

महिला क्रिकेट—सबसे बड़ा ट्रांसफॉर्मेशन

अगर पिछले 4-5 साल का सबसे बड़ा बदलाव देखें—
तो वह महिला क्रिकेट में हुआ है।

मिताली ने इसका श्रेय सीधे दिया—

जय शाह और बीसीसीआई को।

क्या बदला?

बदलावअसर
समान मैच फीसजेंडर इक्विटी
WPL (महिला लीग)प्रोफेशनल प्लेटफॉर्म
इंफ्रास्ट्रक्चरबेहतर ट्रेनिंग और एक्सपोजर

पहले:

महिला क्रिकेट = सीमित मौके

अब:

महिला क्रिकेट = करियर + पहचान + ग्लैमर

विजन और सिस्टम—दोनों साथ

मिताली ने खास तौर पर “विजन” शब्द का इस्तेमाल किया।

यह छोटा शब्द है… लेकिन असर बड़ा।

क्योंकि:

टैलेंट हमेशा था
लेकिन प्लेटफॉर्म नहीं

अब:

टैलेंट + सिस्टम + सपोर्ट

और यही कॉम्बिनेशन “डॉमिनेशन” बनाता है।

प्रेरणा—सचिन और द्रविड़ से

मिताली ने एक दिलचस्प बात और बताई—

उन्होंने अपने करियर में:

सचिन तेंदुलकर
राहुल द्रविड़

से काफी सीखा।

यह बताता है—

भारतीय क्रिकेट में “नॉलेज ट्रांसफर” हमेशा से चलता आया है।

सीनियर्स → जूनियर्स
पुरुष → महिला क्रिकेट

और यही चेन अब मजबूत हो चुकी है।

द्रविड़ और बिन्नी—एक और लेयर

इस इवेंट में राहुल द्रविड़ और रोजर बिन्नी को भी लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड मिला।

बिन्नी ने एक लाइन कही, जो बहुत सच्ची लगी—

“इतने बड़े देश में हर किसी को भारत के लिए खेलने का मौका नहीं मिलता।”

और यही बात भारतीय क्रिकेट की गहराई को दिखाती है।

क्या यह “गोल्डन एरा” है?

अगर ईमानदारी से देखें—

तो हां, भारत इस वक्त एक गोल्डन फेज में है।

लेकिन…

गोल्डन एरा को बनाए रखना—
शुरू करने से ज्यादा मुश्किल होता है।

आगे की चुनौती

अब सवाल यह नहीं है कि भारत जीत सकता है या नहीं—

सवाल यह है:

क्या भारत लगातार जीत सकता है?

आगे के टारगेट

फॉर्मेटलक्ष्य
टेस्टWTC जीत
ODI2027 वर्ल्ड कप
महिला क्रिकेटडॉमिनेशन जारी रखना
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