BCCI : महिला टीम में बड़ा बदलाव – इंग्लैंड के एक्सपर्ट को सौंपी जिम्मेदारी

Atul Kumar
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BCCI – वीमेंस प्रीमियर लीग का शोर अभी थमा भी नहीं है, लेकिन भारतीय महिला क्रिकेट के बैकएंड में एक अहम बदलाव की स्क्रिप्ट तैयार हो चुकी है। मैदान पर दिखने वाले नतीजों से पहले, टीम इंडिया ने फिटनेस और फिजिकल परफॉर्मेंस के मोर्चे पर बड़ा दांव खेला है।

इंग्लैंड के निकोलस ली अब भारतीय महिला क्रिकेट टीम के नए स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच होंगे—और यह जिम्मेदारी वह डब्ल्यूपीएल 2026 के खत्म होते ही संभाल लेंगे।

यह फैसला ऐसे वक्त पर आया है, जब भारतीय महिला टीम को अगले कुछ महीनों में ऑस्ट्रेलिया जैसे कठिन दौरे से गुजरना है। साफ है—बीसीसीआई अब सिर्फ स्किल नहीं, बल्कि एलीट फिटनेस कल्चर पर पूरा जोर लगा रहा है।

डब्ल्यूपीएल के बाद तुरंत जिम्मेदारी

पांच टीमों वाली वीमेंस प्रीमियर लीग का आयोजन 9 जनवरी से 5 फरवरी तक नवी मुंबई और वडोदरा में होना है। टूर्नामेंट खत्म होते ही निकोलस ली सीधे नेशनल ड्यूटी पर शिफ्ट करेंगे।

पीटीआई से बातचीत में एक सूत्र ने पुष्टि की,
“डब्ल्यूपीएल के बाद निकोलस ली भारतीय महिला क्रिकेट टीम के स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच का कार्यभार संभालेंगे।”

यानी तैयारी के लिए ज्यादा वक्त नहीं, और चुनौती बड़ी है।

डब्ल्यूपीएल के तुरंत बाद भारतीय महिला टीम 15 फरवरी से 9 मार्च तक ऑस्ट्रेलिया दौरे पर जाएगी, जहां उसे मल्टी-फॉर्मेट सीरीज़ खेलनी है। तेज पिचें, लंबा शेड्यूल और लगातार मैच—फिटनेस यहां निर्णायक भूमिका निभाएगी।

क्यों अहम है यह नियुक्ति?

महिला क्रिकेट अब सिर्फ टैलेंट का खेल नहीं रहा। आज के दौर में—

  • तेज़ मैच शेड्यूल
  • लगातार ट्रैवल
  • हाई-इंटेंसिटी क्रिकेट

इन सबके बीच फिटनेस ही वह फैक्टर है, जो टीमों को अलग करता है।

पिछले कुछ सालों में भारतीय महिला टीम को इंजरी कंसर्न, रिकवरी टाइम और डेथ ओवर्स की थकान जैसी समस्याओं से जूझना पड़ा है। निकोलस ली की एंट्री को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है—एक लॉन्ग-टर्म फिटनेस ओवरहॉल के तौर पर।

कौन हैं निकोलस ली?

निकोलस ली कोई नया नाम नहीं हैं। इंटरनेशनल क्रिकेट के बैक-रूम में उनका अनुभव काफी गहरा और विविध रहा है।

क्रिकेट करियर की बात करें तो—

  • दाएं हाथ के बल्लेबाज़
  • 13 फर्स्ट क्लास मैच
  • 490 रन

हालांकि खिलाड़ी के तौर पर उनका सफर लंबा नहीं रहा, लेकिन फिटनेस और फिजिकल परफॉर्मेंस के क्षेत्र में उन्होंने खुद को एक स्पेशलिस्ट के रूप में स्थापित किया है।

अंतरराष्ट्रीय अनुभव: एक नजर

निकोलस ली का प्रोफेशनल सफर बताता है कि वह सिर्फ एक टीम या एक कंडीशन तक सीमित नहीं रहे।

टीम / देशभूमिकाअवधि
श्रीलंका (पुरुष)S&C कोचअक्टूबर 2016 – मार्च 2020
बांग्लादेशहेड ऑफ फिजिकल परफॉर्मेंसमार्च 2020 – जनवरी 2024
अफगानिस्तान (पुरुष)S&C कोचजनवरी 2025 – दिसंबर 2025
गल्फ जायंट्स (IL T20)S&C कोच2024–25 सीजन

यह लिस्ट साफ बताती है—एशियाई कंडीशंस, स्पिन-फ्रेंडली पिचें, तेज गर्मी और सीमित संसाधनों में काम करने का अनुभव—सब कुछ उनके पास है।

आईएल टी20 लीग में गल्फ जायंट्स के साथ काम करने का मतलब है कि वह फ्रैंचाइज़ी क्रिकेट की हाई-प्रेशर फिटनेस डिमांड से भी पूरी तरह वाकिफ हैं।

ऑस्ट्रेलिया दौरा: पहली बड़ी परीक्षा

निकोलस ली की असली परीक्षा कागज़ पर नहीं, बल्कि मैदान पर होगी—और वह भी तुरंत।

ऑस्ट्रेलिया दौरा भारतीय महिला टीम के लिए हमेशा से कठिन रहा है। तेज़ गेंदबाज़ी, उछाल और फील्डिंग स्टैंडर्ड—हर चीज़ टॉप लेवल की होती है।

ऐसे में—

  • वर्कलोड मैनेजमेंट
  • इंजरी प्रिवेंशन
  • रिकवरी साइकल
  • बैक-टू-बैक मैच फिटनेस

इन सभी पहलुओं पर निकोलस ली की भूमिका निर्णायक होगी।

महिला क्रिकेट में फिटनेस का बदलता चेहरा

पिछले दशक में महिला क्रिकेट ने स्किल के साथ-साथ एथलेटिसिज़्म में भी लंबी छलांग लगाई है। अब—

  • बाउंड्री लाइन पर स्प्रिंट
  • 100+ किमी/घंटा की बॉलिंग
  • लगातार 50 ओवर की फील्डिंग

यह सब नॉर्म बन चुका है।

इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसी टीमें पहले ही फिटनेस को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना चुकी हैं। भारत अब उस गैप को तेजी से भरना चाहता है।

निकोलस ली की नियुक्ति इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

बीसीसीआई का बड़ा संकेत

यह नियुक्ति सिर्फ एक कोच बदलने की खबर नहीं है। यह संकेत है कि—

  • महिला क्रिकेट को अब “प्रोजेक्ट” नहीं
  • बल्कि परफॉर्मेंस बिजनेस की तरह देखा जा रहा है

बीसीसीआई का फोकस साफ है—2026 और उसके बाद आने वाले आईसीसी टूर्नामेंट्स में भारत सिर्फ प्रतिभा के दम पर नहीं, बल्कि फिजिकल डोमिनेंस के साथ उतरे।

निष्कर्ष: बैक-रूम से बदलेगी तस्वीर?

मैच कोई भी जीते, लेकिन उसकी नींव अक्सर जिम, रिकवरी रूम और फिटनेस डेटा में रखी जाती है। निकोलस ली की एंट्री से भारतीय महिला क्रिकेट का यही बैक-रूम अब ज्यादा मजबूत दिख रहा है।

डब्ल्यूपीएल के बाद ऑस्ट्रेलिया दौरा
और उसके बाद लंबा इंटरनेशनल कैलेंडर

यह सिर्फ शुरुआत है।

अगर फिटनेस ने साथ दिया, तो आने वाले सालों में भारतीय महिला टीम का खेल सिर्फ बेहतर नहीं—ज्यादा आक्रामक और टिकाऊ भी नजर आएगा।

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