ODI – क्रिकेट को यूं ही “अनिश्चितताओं का खेल” नहीं कहा जाता। यहां कभी-कभी ऐसा कुछ हो जाता है, जो आंकड़ों से आगे निकलकर किंवदंती बन जाता है। रन, विकेट, जीत-हार—सब पीछे छूट जाते हैं, और याद रह जाता है बस एक नाम।
3 दिसंबर 1986 को शारजाह में ठीक ऐसा ही हुआ था। और उस दिन नाम था—कर्टनी वॉल्श।
आज भी जब वनडे क्रिकेट के सबसे खौफनाक स्पेल की बात होती है, तो वेस्टइंडीज के इस दिग्गज तेज़ गेंदबाज़ का वह कारनामा खुद-ब-खुद ज़ुबान पर आ जाता है—1 रन देकर 5 विकेट।
शारजाह 1986: जब वॉल्श बने काल
शारजाह का मैदान।
वेस्टइंडीज बनाम श्रीलंका।
तारीख—3 दिसंबर 1986।
टॉस श्रीलंका ने जीता और पहले गेंदबाज़ी चुनी। उस दौर की ताक़तवर वेस्टइंडीज़ टीम ने 50 ओवर में 5 विकेट पर 248 रन बना डाले। लक्ष्य साफ था—249 रन।
कागज़ पर यह एक सामान्य रन-चेज़ लग रहा था। लेकिन मैदान पर जो हुआ, वह इतिहास बन गया।
4.3 ओवर, 1 रन, 5 विकेट: आंकड़े नहीं, झटका
श्रीलंका की पारी शुरू होते ही कर्टनी वॉल्श ने गेंद हाथ में ली। इसके बाद जो हुआ, उसे सिर्फ “घातक” कहना भी कम होगा।
वॉल्श ने:
- 4.3 ओवर फेंके
- 3 मेडन ओवर
- सिर्फ 1 रन दिया
- और 5 विकेट चटका दिए
यह कोई टाइपो नहीं है। एक रन। पांच विकेट।
कौन-कौन बने शिकार?
वॉल्श की गेंदों के सामने श्रीलंकाई बल्लेबाज़ टिक ही नहीं पाए। जिन पांच बल्लेबाज़ों को उन्होंने पवेलियन भेजा, उनके स्कोर खुद कहानी कहते हैं:
- दिलीप मेंडिस – 2
- अशांत डी मेल – 0
- रवि रत्नायके – 0
- रुमेश रत्नायके – 0
- ग्रीम लैब्रॉय – 1
चार बल्लेबाज़ सिंगल डिजिट में, तीन तो खाता भी नहीं खोल पाए।
पूरी टीम 55 पर ढेर
कर्टनी वॉल्श के इस कहर का नतीजा यह हुआ कि 249 रन का पीछा कर रही श्रीलंका की पूरी टीम सिर्फ 55 रन पर ढेर हो गई।
वनडे क्रिकेट में यह सिर्फ हार नहीं थी—यह तबाही थी।
वेस्टइंडीज ने मैच बेहद आसानी से जीत लिया, लेकिन असली जीत उस स्पेल की थी, जिसे आज भी वनडे इतिहास के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज़ी प्रदर्शन में गिना जाता है।
क्यों खास है यह रिकॉर्ड?
वनडे क्रिकेट में 5 विकेट लेना अपने-आप में बड़ी बात है।
लेकिन:
- 1 रन देकर 5 विकेट
- 3 मेडन ओवर
- 4.3 ओवर में पूरी तबाही
यह संयोजन आज भी बेहद दुर्लभ है। कई महान गेंदबाज़ आए, कई घातक स्पेल देखने को मिले—लेकिन वॉल्श का यह कारनामा अलग ही लीग में खड़ा है।
कर्टनी वॉल्श सिर्फ एक स्पेल नहीं, एक युग
यह स्पेल कोई संयोग नहीं था। कर्टनी वॉल्श उस दौर के सबसे डरावने तेज़ गेंदबाज़ों में से एक थे। लंबा कद, सटीक लाइन-लेंथ और कभी न थकने वाला एप्रोच।
उनका करियर खुद उनकी महानता की गवाही देता है।
इंटरनेशनल करियर आंकड़े
- टेस्ट मैच – 132
- टेस्ट विकेट – 519
- वनडे मैच – 205
- वनडे विकेट – 227
- कुल अंतरराष्ट्रीय विकेट – 746
बल्ले से भी उन्होंने योगदान दिया:
- टेस्ट में – 936 रन
- वनडे में – 321 रन
वॉल्श सिर्फ विकेट लेने वाली मशीन नहीं थे, बल्कि वेस्टइंडीज के गेंदबाज़ी आक्रमण की रीढ़ थे।
बल्लेबाज़ों में दहशत क्यों थी?
80 और 90 के दशक में जब कर्टनी वॉल्श रन-अप लेते थे, तो बल्लेबाज़ सिर्फ रन नहीं—जान बचाने की सोचते थे। उनकी गेंदबाज़ी में रफ्तार थी, उछाल था और सबसे खतरनाक थी—लगातार एक ही जगह मारने की आदत।
शारजाह का वह स्पेल उसी मानसिक दबाव का नतीजा था।
जब क्रिकेट ने अपना जादू दिखाया
3 दिसंबर 1986 का वह दिन सिर्फ वेस्टइंडीज की जीत नहीं था। वह दिन क्रिकेट के इतिहास में दर्ज एक ऐसा अध्याय था, जिसने यह साबित कर दिया कि:
- क्रिकेट में कुछ भी संभव है
- एक गेंदबाज़ अकेले मैच पलट सकता है
- और कुछ रिकॉर्ड कभी पुराने नहीं होते
कर्टनी वॉल्श का 1 रन पर 5 विकेट—
यह सिर्फ आंकड़ा नहीं,
क्रिकेट का जादू है।















