BPL – बांग्लादेश प्रीमियर लीग (BPL) में गुरुवार दोपहर अचानक सब कुछ थम-सा गया। 15 जनवरी को खेला जाने वाला 25वां मुकाबला—चैटोग्राम रॉयल्स बनाम नोआखली एक्सप्रेस—अपने तय समय पर शुरू ही नहीं हो सका। दोपहर 1 बजे की पहली गेंद तो दूर, टॉस तक नहीं हो पाया।
वजह बारिश नहीं, आउटफील्ड नहीं, बल्कि खुद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) के खिलाफ खिलाड़ियों का खुला विद्रोह।
यह सिर्फ एक मैच की देरी नहीं थी। यह सिस्टम के खिलाफ जमा होता गुस्सा था, जो अब मैदान पर दिखने लगा।
मैदान पर नहीं पहुंचे खिलाड़ी, टॉस भी टला
ESPNcricinfo की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों टीमें तय समय पर मैदान पर ही नहीं पहुंचीं।
लोकल टाइम के अनुसार 12:30 बजे टॉस होना था, और 1:00 बजे मैच शुरू। लेकिन खिलाड़ी ड्रेसिंग रूम से बाहर ही नहीं आए।
मैच रेफरी शिपर अहमद ने स्थिति पर साफ कहा,
“हम ग्राउंड के बीच में खड़े हैं, लेकिन हमें नहीं पता कि क्या हो रहा है। BPL टेक्निकल कमेटी ही बेहतर बता सकती है।”
यह बयान अपने आप में काफी कुछ कह देता है—मैदान तैयार था, दर्शक इंतजार में थे, लेकिन क्रिकेटर नहीं।
एक बयान, जिसने आग लगा दी
इस पूरे बवाल की जड़ में है BCB की फाइनेंस कमेटी के चेयरमैन नजमुल इस्लाम का एक बयान, जिसने खिलाड़ियों को भड़का दिया।
नजमुल इस्लाम ने हाल ही में कहा था कि
अगर बांग्लादेश की टीम टी20 वर्ल्ड कप में नहीं खेलती, तो इससे बोर्ड को कोई वित्तीय नुकसान नहीं होगा। नुकसान होगा सिर्फ खिलाड़ियों को—और बोर्ड उनकी कमाई की भरपाई नहीं करेगा।
इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी जोड़ा कि
BCB खिलाड़ियों पर करोड़ों टका खर्च करता है, लेकिन खराब प्रदर्शन पर उनसे पैसे वापस नहीं मांगता—इसलिए मुआवजे की कोई बात ही नहीं बनती।
यहीं से मामला फिसल गया।
खिलाड़ियों का पलटवार: “सीमा पार कर दी गई”
नजमुल इस्लाम के बयान के बाद क्रिकेट वेलफेयर एसोसिएशन ऑफ प्लेयर्स (CWAB) ने बुधवार रात आनन-फानन में एक इमरजेंसी ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई।
CWAB के अध्यक्ष मोहम्मद मिथुन ने बिना लाग-लपेट के कहा,
“नजमुल इस्लाम के शब्दों ने सीमा पार कर दी है।”
खिलाड़ियों की मांग साफ है:
– नजमुल इस्लाम इस्तीफा दें
– अगर ऐसा नहीं हुआ, तो
– देश में हर तरह की क्रिकेट गतिविधियों का बहिष्कार
– मैच खेलने से इनकार
यानी मामला सिर्फ BPL तक सीमित नहीं रहेगा।
BPL पर सीधा असर, आगे और मैच भी खतरे में
चैटोग्राम बनाम नोआखली मैच का समय पर शुरू न होना एक खतरनाक संकेत है। BPL बांग्लादेश क्रिकेट की आर्थिक रीढ़ माना जाता है—ब्रॉडकास्ट राइट्स, स्पॉन्सरशिप, फ्रेंचाइज़ी इन्वेस्टमेंट।
अगर खिलाड़ी मैदान पर उतरने से इनकार करते हैं, तो:
– लीग की साख को नुकसान
– फ्रेंचाइज़ियों पर दबाव
– और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर BCB की छवि पर सवाल
सिर्फ गुस्सा नहीं, भरोसे की लड़ाई
यह विरोध सिर्फ पैसों को लेकर नहीं है। खिलाड़ियों का मानना है कि बोर्ड उन्हें सिर्फ एसेट की तरह देखता है, पार्टनर की तरह नहीं।
जब एक अधिकारी सार्वजनिक रूप से यह कहे कि:
– टीम वर्ल्ड कप खेले या न खेले, बोर्ड को फर्क नहीं पड़ता
तो यह खिलाड़ियों के सम्मान और मेहनत—दोनों पर चोट है।















