ODI : विजय हजारे का सबसे बड़ा रन मशीन – लेकिन टीम इंडिया से दूर

Atul Kumar
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ODI – जब न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज़ के लिए भारतीय टीम का ऐलान हुआ, तो चर्चा उन्हीं नामों के इर्द-गिर्द घूमती रही जिनकी वापसी हुई या जो बाहर रह गए। शुभमन गिल कप्तान बने, श्रेयस अय्यर की वापसी हुई (फिटनेस टेस्ट के अधीन), और उसी के साथ ऋतुराज गायकवाड़ और तिलक वर्मा टीम से बाहर हो गए।

लेकिन इस शोर-शराबे में एक नाम ऐसा भी था, जिस पर लगभग कोई बात नहीं हुई—
देवदत्त पडिक्कल।

और यही सबसे हैरान करने वाली बात है।

विजय हजारे ट्रॉफी में पडिक्कल का तूफान

अगर आप सिर्फ मौजूदा घरेलू सीज़न देखें, तो देवदत्त पडिक्कल का नाम पहली लाइन में लिखा जाना चाहिए था। विजय हजारे ट्रॉफी 2025–26 में उनका प्रदर्शन सिर्फ अच्छा नहीं, बल्कि असाधारण है।

अब तक के आंकड़े देखिए—

मैचरनऔसतशतक
5514102+4

पांच मैच, चार शतक।
हर दूसरी पारी में सौ का आंकड़ा।
और फिर भी… टीम इंडिया की वनडे स्क्वॉड से बाहर।

यह सिर्फ इस सीज़न की बात नहीं है

यह कहना आसान होता कि “ठीक है, एक सीज़न का फॉर्म है।”
लेकिन देवदत्त पडिक्कल के साथ मामला ऐसा नहीं है।

विजय हजारे ट्रॉफी में उनका कुल रिकॉर्ड देखिए—

मैचरनऔसत50+ स्कोरशतक
33252594.742512

33 मैचों में 12 शतक।
लगभग हर मैच में 50+ योगदान।
यह आंकड़े किसी फ्लैश-इन-द-पैन बल्लेबाज़ के नहीं हैं, बल्कि 50 ओवर क्रिकेट के स्पेशलिस्ट के हैं।

फिर भी वनडे डेब्यू क्यों नहीं?

यहीं से असली सवाल शुरू होता है।

देवदत्त पडिक्कल—

  • भारत के लिए टेस्ट खेल चुके हैं
  • टी20 इंटरनेशनल खेल चुके हैं
  • आईपीएल में भी लंबा अनुभव है

लेकिन वनडे?
अब तक एक भी मैच नहीं।

ऐसे दौर में, जब चयनकर्ता बार-बार कहते हैं कि “डोमेस्टिक परफॉर्मेंस को तवज्जो दी जाएगी”, पडिक्कल का लगातार बाहर रहना कई सवाल खड़े करता है।

गिल–अय्यर की वापसी और गणित

शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर की वापसी ने टीम का बैलेंस बदला, इसमें कोई शक नहीं।
लेकिन उसी गणित में—

  • ऋतुराज गायकवाड़ (हालिया ODI शतक) बाहर
  • तिलक वर्मा (विजय हजारे में शानदार फॉर्म) बाहर
  • और पडिक्कल… चर्चा से भी बाहर

चयनकर्ताओं का तर्क शायद यही है कि—

  • टॉप ऑर्डर पहले से भरा हुआ है
  • गिल, रोहित, यशस्वी, कोहली मौजूद हैं

लेकिन फिर सवाल वही—
अगर 50 ओवर क्रिकेट में इतना लगातार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी को भी मौका नहीं मिलेगा, तो घरेलू क्रिकेट का इनाम आखिर है क्या?

क्या फॉर्मेट-लेबलिंग की सजा मिल रही है?

पडिक्कल को अक्सर—

  • टेस्ट में “टेक्निकल”
  • टी20 में “एंकर”

मान लिया गया है।
लेकिन वनडे क्रिकेट तो इन्हीं दोनों का मिश्रण है।

उनका विजय हजारे रिकॉर्ड बताता है कि—

  • वह नई गेंद संभाल सकते हैं
  • बड़े स्कोर बना सकते हैं
  • और लंबी पारी खेल सकते हैं

यानी वनडे क्रिकेट की तीनों ज़रूरतें।

चयन नीति का अजीब विरोधाभास

एक तरफ चयनकर्ता कहते हैं—

“हम घरेलू क्रिकेट देख रहे हैं”

दूसरी तरफ—

  • 102 की औसत
  • चार शतक
  • 2500+ रन का टूर्नामेंट रिकॉर्ड

और फिर भी फोन नहीं आता।

बीसीसीआई की चयन नीति हमेशा से कंटिन्यूटी और भरोसे पर चलती रही है

लेकिन सवाल यह है—
क्या यह भरोसा सिर्फ कुछ तय नामों तक ही सीमित है?

अभी नहीं, तो कब?

देवदत्त पडिक्कल की उम्र, फॉर्म और अनुभव—तीनों उनके पक्ष में हैं।
वनडे वर्ल्ड कप साइकिल लंबी है।
टी20 वर्ल्ड कप अलग रास्ता है।

ऐसे में 50 ओवर फॉर्मेट में नए नामों को आज़माने का इससे बेहतर समय शायद नहीं मिलेगा।

अगर अभी भी नहीं,
तो फिर कब?

चुप्पी भी एक जवाब होती है

देवदत्त पडिक्कल का नाम इस टीम में नहीं है।
लेकिन उनके आंकड़े हर सिलेक्शन मीटिंग में मौजूद होने चाहिए।

कभी-कभी चयन न होना भी एक संदेश होता है—
और इस वक्त वह संदेश थोड़ा उलझा हुआ लग रहा है।

पडिक्कल रन बना रहे हैं।
लगातार।
शांत तरीके से।

अब सवाल यह नहीं कि वह काबिल हैं या नहीं।
सवाल यह है—
क्या टीम इंडिया सच में घरेलू प्रदर्शन को उतनी ही अहमियत देती है, जितनी वह कहती है?

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