Padikkal – लखनऊ के इकाना स्टेडियम में देवदत्त पडिक्कल ने जो 232 रन बनाए, वह सिर्फ एक बड़ी पारी नहीं थी—वह उनके प्रथम श्रेणी करियर का बयान था। लेकिन क्रिकेट की यही विडंबना है। जिस मैच में सब कुछ परफेक्ट लग रहा था, उसी मैच के चौथे दिन एक डाइविंग कैच की कोशिश ने कहानी में अचानक सस्पेंस जोड़ दिया।
रणजी ट्रॉफी 2025-26 सेमीफाइनल में उत्तराखंड के खिलाफ कर्नाटक का दबदबा साफ दिख रहा था। 736 रन का पहाड़ जैसा स्कोर। जवाब में उत्तराखंड 233 पर ढेर। और फिर… 75वें ओवर की पांचवीं गेंद पर वह पल आया जिसने ड्रेसिंग रूम की धड़कन बढ़ा दी।
232 रन: धैर्य और क्लास की मिसाल
देवदत्त पडिक्कल ने नंबर 3 पर बल्लेबाजी करते हुए 330 गेंदों में 232 रन बनाए।
29 चौके। 3 छक्के।
एक लंबी, संयमित और तकनीकी रूप से शानदार पारी।
यह उनकी फर्स्ट-क्लास करियर की सर्वश्रेष्ठ पारियों में से एक रही। कर्नाटक ने 194.4 ओवर में 736 रन बनाए—रणजी सेमीफाइनल जैसे बड़े मंच पर ऐसा स्कोर मनोवैज्ञानिक बढ़त भी देता है।
कर्नाटक की पहली पारी
| बल्लेबाज | रन | गेंदें | चौके | छक्के |
|---|---|---|---|---|
| देवदत्त पडिक्कल | 232 | 330 | 29 | 3 |
| टीम कुल | 736 | 194.4 ओवर | — | — |
चोट कैसे लगी?
उत्तराखंड की पहली पारी का 75वां ओवर।
प्रसिद्ध कृष्णा गेंदबाजी कर रहे थे।
अभय नेगी ने ड्राइव खेला।
पडिक्कल गली में तैनात थे। उन्होंने डाइव लगाई—गेंद हाथ में नहीं आई, लेकिन उंगली जरूर चोटिल हो गई। वह तुरंत दर्द में दिखे और मैदान से बाहर चले गए।
पहली नज़र में यह उंगली की चोट लगी। लेकिन समय बेहद अहम है—आईपीएल नजदीक है।
आईपीएल से पहले बढ़ी चिंता
देवदत्त पडिक्कल आगामी आईपीएल सीजन में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु का प्रतिनिधित्व करते हैं। फ्रेंचाइज़ी और फैंस दोनों के लिए यह खबर चिंता बढ़ाने वाली है।
फिलहाल चोट की गंभीरता को लेकर आधिकारिक मेडिकल अपडेट का इंतजार है। अगर यह सिर्फ मामूली सूजन है, तो राहत। लेकिन अगर फ्रैक्चर या लिगामेंट डैमेज हुआ, तो रिकवरी में समय लग सकता है।
दूसरी पारी में नहीं उतरे मैदान पर
कर्नाटक ने उत्तराखंड को 233 पर समेटने के बाद फॉलो-ऑन देने के बजाय दोबारा बल्लेबाजी का फैसला किया। रणनीतिक रूप से यह फैसला मैच को पूरी तरह सुरक्षित करने जैसा था।
लेकिन दूसरी पारी में पडिक्कल बल्लेबाजी करने नहीं आए।
नंबर 3 पर श्रेयस गोपाल उतरे—और खाता खोले बिना आउट हो गए।
करुण नायर नंबर 4 पर आए।
लंच तक कर्नाटक 39/1 पर था और कुल बढ़त 542 रन की हो चुकी थी। मैच लगभग कर्नाटक की पकड़ में था, लेकिन पडिक्कल की अनुपस्थिति चर्चा का केंद्र बनी रही।
गेंदबाजी में कर्नाटक का दबदबा
उत्तराखंड की पहली पारी 233 पर सिमटी।
विद्याधर पाटिल और व्यशाक विजयकुमार ने तीन-तीन विकेट झटके।
736 बनाम 233—यह अंतर सेमीफाइनल में मानसिक दबाव बनाने के लिए काफी होता है।
दूसरी तरफ इतिहास
उधर, जम्मू-कश्मीर ने बंगाल को उन्हीं के घर में हराकर पहली बार रणजी ट्रॉफी फाइनल में जगह बना ली। यह अपने आप में बड़ी खबर है। घरेलू क्रिकेट का यह सीजन लगातार सरप्राइज दे रहा है।
पडिक्कल का 232 रन वाला दिन उनके करियर के स्वर्णिम पन्नों में रहेगा। लेकिन खेल का दूसरा चेहरा यह है कि एक डाइविंग कैच की कोशिश पूरी तैयारी को सवालों में डाल सकती है।
कर्नाटक फाइनल की दहलीज पर खड़ा है।
आरसीबी को आईपीएल से पहले फिट पडिक्कल चाहिए।
और भारतीय क्रिकेट फैंस बस यही दुआ कर रहे हैं—चोट गंभीर न हो।















