Test : चोटों ने रोका सफर – डग ब्रेसवेल का भावुक रिटायरमेंट

Atul Kumar
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Test – न्यूजीलैंड क्रिकेट के एक शांत लेकिन बेहद भरोसेमंद सिपाही ने आखिरकार बल्ला और गेंद दोनों को अलविदा कह दिया है। डग ब्रेसवेल, वो ऑलराउंडर जिसने बड़े मंच पर कभी ज़्यादा शोर नहीं मचाया, लेकिन जब-जब ज़रूरत पड़ी—काम पूरा करके दिया—अब क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट से रिटायर हो चुके हैं।

उम्र 35 साल, शरीर थका हुआ, और पसलियों की वही पुरानी चोट, जिसने इस सीजन उन्हें सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट्स के लिए भी मैदान से दूर रखा। फैसला अचानक नहीं था—बस अब टालना मुमकिन नहीं रहा।

करियर का आखिरी पड़ाव: चोटों ने रोका रास्ता

डग ब्रेसवेल आखिरी बार 2023 में न्यूजीलैंड के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलते दिखे थे। उसके बाद रिकवरी, रिहैब और उम्मीदों का सिलसिला चलता रहा। लेकिन लगातार पसली की चोट ने साफ संकेत दे दिए कि शरीर अब उस स्तर की मांग नहीं झेल पाएगा।

सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट्स के लिए इस घरेलू सीजन से उनका बाहर रहना उसी दिशा का इशारा था—और अब औपचारिक ऐलान आ गया।

2011 से 2023: इंटरनेशनल सफर का खाका

ब्रेसवेल का इंटरनेशनल करियर भले लंबा न दिखे, लेकिन उसमें कुछ ऐसे पल हैं, जो हमेशा याद रखे जाएंगे।

इंटरनेशनल आंकड़े (2011–2023):

फॉर्मेटमैचविकेटखास बात
टेस्ट2874होबार्ट 2011: 9 विकेट
वनडे21उपयोगी ऑलराउंड योगदान
T20I20मिडिल ओवर्स में कंट्रोल

टेस्ट क्रिकेट में उनकी मीडियम पेस ने उन्हें 28 मैचों में 38.82 की औसत से 74 विकेट दिलाए। व्हाइट-बॉल क्रिकेट में भी उन्होंने कुल 46 विकेट लिए—अक्सर वो विकेट जो मैच का रुख मोड़ देते हैं।

होबार्ट 2011: जहां से कहानी अमर हुई

अगर डग ब्रेसवेल के करियर से एक तस्वीर चुननी हो, तो वो दिसंबर 2011, होबार्ट की होगी। यह उनका तीसरा ही टेस्ट मैच था। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ, उनकी ज़मीन पर—और ब्रेसवेल ने 9 विकेट लेकर वो कर दिखाया, जो दशकों तक न्यूजीलैंड नहीं कर पाया था।

उस जीत ने दो इतिहास लिखे:

  • 26 साल बाद ऑस्ट्रेलिया में न्यूजीलैंड की टेस्ट जीत
  • और विडंबना देखिए—वही जीत आज तक ऑस्ट्रेलिया में न्यूजीलैंड की आखिरी टेस्ट जीत भी है

यह वो दिन था, जब ब्रेसवेल ने खुद को सिर्फ एक स्क्वाड प्लेयर से कहीं ऊपर साबित कर दिया।

सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट्स: जहां पहचान बनी

इंटरनेशनल क्रिकेट के अलावा, ब्रेसवेल की असली पहचान डोमेस्टिक क्रिकेट में गढ़ी गई—खासतौर पर सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट्स के लिए। क्लब और स्टेट क्रिकेट में उन्होंने वर्षों तक जिम्मेदारी उठाई, नई गेंद से भी और लंबे स्पेल में भी।

सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट्स के आधिकारिक बयान में ब्रेसवेल ने कहा:

“यह मेरी जिंदगी का एक गौरवपूर्ण हिस्सा रहा है। एक युवा क्रिकेटर के तौर पर मैंने इसी का सपना देखा था। देश के लिए खेलने और सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट्स के लिए इतने साल क्रिकेट खेलने के मौके के लिए मैं हमेशा आभारी रहूंगा।”

ये शब्द किसी हेडलाइन की कोशिश नहीं करते—बस सच्चाई कहते हैं।

4000 रन + 400 विकेट: एक दुर्लभ डबल

डग ब्रेसवेल ऐसे खिलाड़ियों की श्रेणी में जाते हैं, जिनका नाम रिकॉर्ड बुक में खास कॉलम में लिखा जाता है।

फर्स्ट-क्लास करियर (137 मैच):

  • 437 विकेट @ 31.08
  • 4505 रन @ 25.45
  • 3 शतक

न्यूजीलैंड के फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में 4000+ रन और 400+ विकेट का यह डबल बहुत कम खिलाड़ियों ने हासिल किया है। जीतन पटेल के बाद ब्रेसवेल ऐसे चुनिंदा नामों में शामिल हो गए।

व्हाइट-बॉल लीग्स और IPL का अनुभव

ब्रेसवेल सिर्फ रेड-बॉल तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने दुनिया भर की लीग्स में खेला—कभी रोल प्लेयर, कभी बैकअप ऑलराउंडर, लेकिन हमेशा प्रोफेशनल।

  • IPL 2012 – दिल्ली डेयरडेविल्स (अब दिल्ली कैपिटल्स)
  • SA20 2024 – जोबर्ग सुपर किंग्स
  • ग्लोबल सुपर लीग – सेंट्रल स्टैग्स

इन टूर्नामेंट्स में उनका रोल छोटा रहा हो, लेकिन उनके अनुभव ने ड्रेसिंग रूम्स में हमेशा वैल्यू जोड़ी।

परिवार और विरासत: ब्रेसवेल नाम आगे बढ़ता रहेगा

डग ब्रेसवेल ने अपने चचेरे भाई माइकल ब्रेसवेल के साथ भी क्रिकेट खेला—

  • 2 वनडे
  • 1 टेस्ट

माइकल अगले महीने भारत दौरे पर वनडे टीम की कप्तानी करने वाले हैं। यानी ब्रेसवेल नाम न्यूजीलैंड क्रिकेट में अभी भी ज़िंदा है—बस किरदार बदल गया है।

डग खुद 2010 अंडर-19 वर्ल्ड कप का भी हिस्सा रहे, जहां से इस लंबी यात्रा की शुरुआत हुई थी।

क्यों खास रहा ब्रेसवेल का करियर?

डग ब्रेसवेल कभी पोस्टर बॉय नहीं बने।
कभी सबसे तेज़ गेंदबाज़ नहीं थे।
कभी सबसे ज्यादा रन बनाने वाले ऑलराउंडर भी नहीं।

लेकिन—

  • मुश्किल कंडीशंस में भरोसेमंद
  • टीम के लिए रोल समझने वाले
  • और मौके मिलने पर मैच पलटने की काबिलियत रखने वाले

ऐसे खिलाड़ियों के बिना कोई भी मजबूत टीम नहीं बनती।

बिना शोर के, पूरे सम्मान के साथ विदाई

डग ब्रेसवेल का रिटायरमेंट कोई सनसनी नहीं, बल्कि एक सम्मानजनक पूर्णविराम है। चोटों ने भले करियर को समय से पहले रोक दिया हो, लेकिन जो यादें, रिकॉर्ड्स और योगदान उन्होंने छोड़े हैं—वो हमेशा रहेंगे।

होबार्ट की वो सुबह,
400+ विकेट का डोमेस्टिक सफर,
और सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट्स की जर्सी में बिताए साल—
यही डग ब्रेसवेल की असली विरासत है।

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