Test : ऑस्ट्रेलिया में जीत के बाद भी क्यों नाराज़ दिखे बेन स्टोक्स – आइडियल नहीं था

Atul Kumar
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Test – 15 साल का इंतज़ार, 16 हारें, 2 ड्रॉ… और फिर आखिरकार वह दिन आया, जब इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलियाई ज़मीन पर टेस्ट जीत का सूखा तोड़ दिया।

मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर खेला गया बॉक्सिंग डे टेस्ट भले ही सिर्फ दो दिन में खत्म हो गया हो, लेकिन इसके मायने इंग्लैंड के लिए कहीं बड़े थे। एशेज 2025–26 के चौथे टेस्ट में 4 विकेट से मिली जीत ने सीरीज़ की तस्वीर नहीं बदली, मगर इंग्लैंड के आत्मविश्वास को ज़रूर सहारा दे दिया।

हालांकि हकीकत यही है कि इंग्लैंड यह सीरीज़ पहले ही 3–0 से गंवा चुका था। चौथा टेस्ट जीतना ट्रॉफी नहीं दिलाता, लेकिन 2011 के बाद ऑस्ट्रेलिया में पहली टेस्ट जीत होना अपने-आप में बड़ी बात है।

दो दिन का टेस्ट और 36 विकेट: स्टोक्स का सीधा सवाल

कप्तान बेन स्टोक्स जीत से खुश तो थे, लेकिन संतुष्ट बिल्कुल नहीं। मैच के बाद उनकी बातों में राहत कम और चिंता ज़्यादा झलकी।

स्टोक्स ने साफ कहा कि यह जीत “आदर्श परिस्थितियों” में नहीं आई।

“हम जीत गए, लेकिन सच कहूं तो यह वह नहीं है जो आप चाहते हैं। हालात खेल के एक ही स्किल के पक्ष में थे। दो दिन में 36 विकेट गिरना आदर्श नहीं है।”

मेलबर्न की पिच पर तेज़ गेंदबाज़ों को इतनी मदद थी कि बल्लेबाज़ी किसी लॉटरी से कम नहीं लग रही थी। स्टोक्स ने इशारों में यही कहा कि हालात ने खेल को सीमित कर दिया।

170–175 रन का पीछा: आसान नहीं था

भले ही लक्ष्य सिर्फ 175 रन का था, लेकिन स्टोक्स जानते थे कि इस पिच पर कुछ भी आसान नहीं।

“170 रन का पीछा करना हमेशा मुश्किल होने वाला था। लेकिन जिस तरह से हमने शुरुआत से गेम को आगे बढ़ाया, वही सही तरीका था।”

इंग्लैंड ने आक्रामक लेकिन सोच-समझकर खेला। विकेट गिरे, दबाव आया, लेकिन टीम घबराई नहीं। यही फर्क बना।

2013–14 की यादें और लगातार गिरावट

इस जीत की अहमियत समझने के लिए थोड़ा पीछे जाना ज़रूरी है।

बेन स्टोक्स और जो रूट उस इंग्लिश टीम का भी हिस्सा थे, जो 2013–14 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गई थी। उससे पहले इंग्लैंड ने लगातार तीन एशेज सीरीज़ जीती थीं। लेकिन उसके बाद कहानी बदल गई।

  • ऑस्ट्रेलिया में
  • 16 टेस्ट में हार
  • 2 ड्रॉ
  • एक भी जीत नहीं

मेलबर्न की यह जीत उस लंबे और तकलीफदेह सिलसिले का अंत है।

सीरीज़ हार, लेकिन थोड़ी राहत

इस एशेज सीरीज़ में इंग्लैंड को जमकर आलोचना झेलनी पड़ी। बल्लेबाज़ी, गेंदबाज़ी, चयन—हर मोर्चे पर सवाल उठे। ऐसे में चौथे टेस्ट की जीत ने कम से कम यह दिखा दिया कि टीम पूरी तरह टूटी नहीं है।

चार टेस्ट मैचों में:

  • संभावित खेल दिन – 20
  • असल में खेला गया – सिर्फ 13 दिन

यह आंकड़ा खुद बताता है कि हालात कितने चरम पर रहे।

जो रूट और “नूसा विवाद” का ज़िक्र

मैच के बाद जो रूट ने मैदान से बाहर हुए नूसा विवाद को भी स्वीकार किया, जहां कुछ खिलाड़ी शराब पीते नज़र आए थे। रूट ने माना कि यह आदर्श स्थिति नहीं थी, लेकिन उन्होंने टीम की प्रतिक्रिया की तारीफ की।

“यह निराशाजनक है, लेकिन इसका सीरीज़ पर असर नहीं पड़ा। पिछले कुछ समय में जो भी हुआ, उसके बाद इस तरह जवाब देना बहुत ज़रूरी था।”

रूट के मुताबिक, इस जीत ने इंग्लैंड की क्रिकेट समझ और मानसिक मजबूती दिखाई।

“उस विकेट पर रास्ता निकालना, हालात को समझना और भरोसे के साथ खेलना—यह बड़ी बहादुरी दिखाता है। मुझे लड़कों पर बहुत गर्व है।”

पिच, परिस्थितियां और टेस्ट क्रिकेट की बहस

मेलबर्न टेस्ट ने एक बार फिर टेस्ट क्रिकेट की दिशा पर सवाल खड़े कर दिए।

  • दो दिन का टेस्ट
  • तेज़ गेंदबाज़ों का दबदबा
  • बल्लेबाज़ी के लिए बेहद कम मौका

स्टोक्स की नाराज़गी इसी बात को लेकर थी। उनका मानना है कि जीत मायने रखती है, लेकिन खेल का संतुलन उससे भी ज़्यादा ज़रूरी है।

इंग्लैंड के लिए आगे का रास्ता

यह जीत इंग्लैंड के लिए रीसेट बटन जैसी है। ट्रॉफी भले हाथ से निकल चुकी हो, लेकिन:

  • टीम का आत्मविश्वास लौटा
  • आलोचनाओं के बीच जवाब मिला
  • ऑस्ट्रेलिया में जीत का डर टूटा

अब सवाल यही है—क्या इंग्लैंड इस जीत को एक अपवाद रहने देगा, या इसे आगे की सीरीज़ के लिए नींव बनाएगा?

जीत मिली, सवाल बाकी हैं

मेलबर्न में इंग्लैंड ने 15 साल बाद टेस्ट जीता। यह इतिहास है।
लेकिन बेन स्टोक्स की बातों से साफ है कि यह जीत उन्हें पूरी तरह खुश नहीं कर पाई।

सीरीज़ हार चुके इंग्लैंड के लिए यह मैच ट्रॉफी की कहानी नहीं, बल्कि कैरेक्टर की कहानी है।

और शायद यही इस जीत का सबसे बड़ा मतलब है।

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