World Cup 2011 : गैरी कर्स्टन का खुलासा—युवराज सिंह का सिलेक्शन क्यों था विवादों में

Atul Kumar
Published On:
World Cup 2011

World Cup 2011 – टीम इंडिया के 2011 वर्ल्ड कप का सबसे बड़ा हीरो कौन था, इस सवाल का जवाब देश का हर क्रिकेटप्रेमी बिना सोचे-समझे देगा—युवराज सिंह। लेकिन ज़रा सोचिए, अगर वो टीम में होते ही नहीं तो? सुनने में अजीब लगता है न। अब ये राज़ खुद उस दौर के हेड कोच गैरी कर्स्टन ने खोला है। कर्स्टन ने माना कि वर्ल्ड कप से ठीक पहले युवराज का सिलेक्शन ही शक के घेरे में था।

युवराज के सिलेक्शन पर मची खींचतान

रेडिफ से बातचीत में गैरी कर्स्टन ने साफ कहा कि युवराज को टीम में शामिल करने को लेकर गंभीर बहस हुई थी। कई सेलेक्टर्स और टीम मैनेजमेंट को लग रहा था कि उनका फॉर्म डगमगा चुका है और फिटनेस भी चिंता का विषय थी। लेकिन कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और खुद कर्स्टन ने युवराज का साथ दिया। और आज पीछे मुड़कर देखें तो शायद यही फैसला भारतीय क्रिकेट के इतिहास का “गेम-चेंजर” निकला।

आँकड़े जो कहानी खुद कहते हैं

युवराज ने वर्ल्ड कप 2011 में बल्ले और गेंद दोनों से ऐसा प्रदर्शन किया जिसने इतिहास में उनका नाम हमेशा के लिए दर्ज कर दिया।

मैचरनविकेटखास उपलब्धि
लीग स्टेजलगातार अर्धशतकमहत्वपूर्ण ब्रेकथ्रूटीम को स्थिरता दी
क्वार्टर फाइनल (ऑस्ट्रेलिया)57* रन2 विकेटदबाव में मैच जिताया
सेमीफाइनल (पाकिस्तान)अहम रन2 विकेटबड़े मंच पर झंडा गाड़ा
फाइनल (श्रीलंका)21* रन2 विकेटखिताब में निर्णायक योगदान
पूरा टूर्नामेंट362 रन15 विकेटप्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट

उनकी ऑलराउंड क्षमता ने ही भारत को 28 साल बाद वर्ल्ड कप दिलाया।

युवराज की मानसिक जंग

कर्स्टन ने ये भी स्वीकार किया कि युवराज का यह बदलाव रातों-रात नहीं आया। इसके पीछे थे टीम के मेंटल कंडीशनिंग कोच पैडी अप्टन। उन्होंने युवराज के आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती पर लगातार काम किया। वर्ल्ड कप से पहले युवी ने खुद भी कई कठिन फैसले लिए—खानपान, ट्रेनिंग, और अपने खेल पर फोकस बढ़ाया।

कर्स्टन ने मुस्कुराते हुए कहा—“युवी कभी-कभी मुझे बहुत परेशान करता था, लेकिन मैदान पर उसे बैटिंग करते देखना कमाल था। शुक्र है हमने उसे टीम में लिया।”

फाइनल की रात और सुनहरा सफर

मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में जब धोनी ने छक्का जड़ा, तो पूरा देश झूम उठा। लेकिन उस जीत की नींव कई मौकों पर युवराज की परफ़ॉर्मेंस से रखी गई थी। चाहे ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ क्वार्टर फाइनल की ठंडी नसें हो या पाकिस्तान के खिलाफ सेमीफाइनल का दबाव—हर जगह युवी डटे रहे।

क्यों याद रहेगा यह फैसला

अगर उस वक़्त कर्स्टन और धोनी युवराज के लिए खड़े न होते, तो शायद कहानी अलग होती। टीम इंडिया के पास बैकअप विकल्प थे, लेकिन युवराज जैसा ऑलराउंडर और “बिग-मैच प्लेयर” कोई नहीं। यही वजह है कि आज भी लोग कहते हैं—वर्ल्ड कप 2011 का मतलब है युवराज सिंह।

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