BCCI : गंभीर को समय चयनकर्ताओं और टीम मैनेजमेंट से होगी पूछताछ

Atul Kumar
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BCCI – गुवाहाटी टेस्ट के तीसरे दिन जैसे ही भारतीय ड्रेसिंग रूम से निराशा बाहर छलकनी शुरू हुई, वैसे ही बाहर—टीवी डिबेट, एक्स-प्लेयरों की टिप्पणियों और सोशल मीडिया की भीड़—सबने एक ही नाम को निशाने पर लेना शुरू कर दिया: गौतम गंभीर।


0–2 की घरेलू हार, टीम का बिखरा आत्मविश्वास और लगातार तीसरी टेस्ट सीरीज गँवाना… यह सब मिलकर माहौल को आग में घी जैसा बना रहा था।

लेकिन इस हंगामे के बीच एक बड़ी खबर चुपचाप बाहर आई—बीसीसीआई, कम से कम अभी, गंभीर को हटाने के मूड में नहीं है।
और यही आने वाले हफ्तों की कहानी तय करेगा।

गंभीर बैकफुट पर, लेकिन कोचिंग पर फिलहाल खतरा नहीं

प्रेस कॉन्फ्रेंस में गंभीर का चेहरा साफ बता रहा था कि दबाव कितना भारी है।
बयान भी वैसा ही था—
“मेरे भविष्य का फैसला BCCI को करना है। भारतीय क्रिकेट ज़रूरी है, मैं नहीं।”

यह आमतौर पर वह लाइन होती है, जो तब बोली जाती है जब पद खतरे में हो।
लेकिन IND–SA सीरीज के बाद के 48 घंटों में घटनाक्रम उतनी तेजी से बदला जितनी तेजी से भारत की पहली पारी गिर गई थी।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, BCCI के एक शीर्ष अधिकारी ने साफ कहा—

  • बोर्ड जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करेगा
  • टीम ट्रांजिशन फेज में है
  • और वर्ल्ड कप 2026–27 चक्र को देखते हुए गंभीर को हटाना व्यवहारिक विकल्प नहीं है
  • ऊपर से गंभीर का कॉन्ट्रैक्ट 2027 तक का है

अधिकारियों के अनुसार:
“सेलेक्टर्स और टीम मैनेजमेंट से समीक्षा होगी, पर कार्रवाई तुरंत नहीं।”

यानी गंभीर फिलहाल सुरक्षित हैं—कम से कम T20 वर्ल्ड कप तक।

क्यों नहीं हटाया जाएगा गंभीर? बोर्ड की रणनीति के तीन बड़े कारण

बीसीसीआई अंदरूनी तौर पर कई लेयर्स में चीजें देखता है। और इस बार उनका फॉर्मूला कुछ इस तरह है:

वर्ल्ड कप सामने है—कोच बदलना रिस्की

इतिहास कहता है:
वर्ल्ड कप के महीनों पहले कोच बदलना टीम को अस्थिर कर देता है।
BCCI यह गलती नहीं करना चाहेगा।

टीम ट्रांजिशन में—विराट, रोहित, पुजारा, अश्विन, रहाणे सब जा चुके

टेस्ट टीम आधी बदल चुकी है।
ऐसे समय कोच का बदलना मतलब पूरा सिस्टम दोबारा शून्य पर लाना होगा।

जिम्मेदारी सिर्फ कोच की नहीं—खिलाड़ी भी जिम्मेदारी नहीं ले रहे

अश्विन जैसे सीनियर खिलाड़ी भी यह कह चुके हैं कि
“कोच बल्लेबाजी करने नहीं उतरता।”

और समीक्षा में यही सवाल उठेगा—
टीम की मानसिकता आखिर क्यों बदल रही है?

गंभीर के कार्यकाल का हाल—12 महीने, 3 टेस्ट सीरीज हार

तथ्य चुभते हैं—और यहाँ तो कई चुभनें हैं:

सीरीजनतीजाकहाँ
न्यूजीलैंड बनाम भारत (2024)0–3भारत
ऑस्ट्रेलिया दौरा (2024–25)1–3ऑस्ट्रेलिया
भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका (2025)0–2भारत

भारत ने 12 महीनों में:

  • 7 घरेलू टेस्ट खेले
  • 5 हारे
  • केवल 2 ही जीते

भारत जैसे देश में यह संकट जैसा रिकॉर्ड है।

टेस्ट में पतन क्यों?

कई कारण:

  • बल्लेबाजी में कोई स्थिर कोर नहीं
  • टीम कॉम्बिनेशन बार-बार बदलना
  • बल्लेबाजों का पावर-हिटिंग पर अत्यधिक निर्भर हो जाना
  • लाल गेंद की तकनीक कमजोर
  • दो घंटे अच्छा खेल, फिर अचानक पतन—एक पैटर्न

दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज इसका ताज़ा उदाहरण है।

गंभीर का बयान—संकेत था कि वे दबाव में हैं

हार के बाद गंभीर ने कहा था:

“भारतीय क्रिकेट महत्वपूर्ण है, मैं नहीं।
BCCI जो फैसला करेगा, वह स्वीकार है।”

यह किसी भी कोच का दबाव-भरा बयान होता है।
लेकिन इसके बाद बोर्ड का समर्थन आना—यह बताता है कि गंभीर को फिलहाल “अबयदान” मिल चुका है।

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