Gavaskar : गावस्कर का तीखा हमला – फ्रेंचाइजी ओनर पर उठाए सवाल

Atul Kumar
Published On:
Gavaskar

Gavaskar – क्रिकेट और जियोपॉलिटिक्स का रिश्ता हमेशा थोड़ा असहज रहा है—और ‘द हंड्रेड’ की इस ताजा घटना ने फिर वही पुराना घाव कुरेद दिया है। एक तरफ लीग क्रिकेट का ग्लोबल मॉडल है… और दूसरी तरफ राष्ट्रीय भावनाएं, जो ऐसे फैसलों को तुरंत विवाद में बदल देती हैं।

और इस बार—आवाज आई है सुनील गावस्कर की, वो भी काफी सख्त लहजे में।

विवाद की जड़—एक खरीद, कई सवाल

मामला सीधा है, लेकिन असर गहरा।

सन ग्रुप की फ्रेंचाइजी सनराइजर्स लीड्स ने:

खिलाड़ीदेशकीमत
अबरार अहमदपाकिस्तान£1,90,000 (~₹2.3 करोड़)

यानी, एक सामान्य फ्रेंचाइजी खरीद—
लेकिन भारतीय संदर्भ में यह “नॉर्मल” नहीं रहा।

सोशल मीडिया से लेकर दिग्गजों तक—तीखी प्रतिक्रिया

भारत में इस फैसले पर तुरंत प्रतिक्रिया आई—

और फिर सुनील गावस्कर ने इसे एक बड़े मुद्दे के रूप में उठाया।

उन्होंने अपने कॉलम में जो कहा—वह सिर्फ आलोचना नहीं थी, बल्कि एक कड़ा आरोप था।

उनका तर्क:

पाकिस्तानी खिलाड़ियों को दी गई फीस
→ टैक्स के रूप में उनकी सरकार तक जाती है
→ और वह पैसा भारत के खिलाफ इस्तेमाल हो सकता है

यह एक गंभीर और संवेदनशील दावा है—
जो भावनाओं और राजनीति दोनों को छूता है।

“ओनर को समझ होनी चाहिए थी”—गावस्कर

गावस्कर ने खास तौर पर फ्रेंचाइजी ओनर पर सवाल उठाया।

उनका कहना था—

कोच (डेनियल वेटोरी) विदेशी हैं,
उन्हें संदर्भ समझ नहीं आया होगा

लेकिन:

भारतीय ओनर को यह फैसला रोकना चाहिए था।

यहां उन्होंने सीधे-सीधे जिम्मेदारी “मालिकाना स्तर” पर रखी।

IPL vs ग्लोबल लीग—फर्क यहीं है

इस पूरे विवाद को समझने के लिए एक चीज अहम है—

IPL में क्या हुआ?

सालघटना
2008पाक खिलाड़ी खेले
2008 (Nov)मुंबई आतंकी हमला
बाद मेंपाक खिलाड़ियों पर रोक

यानी, IPL ने एक स्पष्ट स्टैंड लिया।

लेकिन:

The Hundred = इंग्लैंड की लीग
जहां ऐसे प्रतिबंध नहीं हैं।

असली टकराव—क्रिकेट या देश?

यहीं पर बहस गहरी हो जाती है।

एक पक्ष कहता है:

स्पोर्ट्स = ग्लोबल
खिलाड़ी = प्रोफेशनल

दूसरा पक्ष कहता है:

देश पहले
भावनाएं पहले
इतिहास नहीं भूल सकते

और गावस्कर साफ तौर पर दूसरे पक्ष में खड़े दिखे।

क्या यह सिर्फ एक खिलाड़ी का मामला है?

नहीं।

यह:

एक खिलाड़ी से शुरू होकर
एक पॉलिसी तक जाता है

और फिर—

एक बड़े सवाल पर खत्म होता है:

क्या भारतीय कंपनियों को विदेशों में भी वही स्टैंड रखना चाहिए जो IPL में है?

सन ग्रुप—चुप, लेकिन दबाव में

अब तक सन ग्रुप या फ्रेंचाइजी की ओर से कोई बड़ा सार्वजनिक जवाब नहीं आया है।

लेकिन:

सोशल मीडिया
पूर्व खिलाड़ी
और पब्लिक सेंटिमेंट

इन तीनों का दबाव—स्पष्ट है।

खेल और राजनीति—कभी अलग नहीं हुए

यह पहली बार नहीं है—

और शायद आखिरी भी नहीं।

क्रिकेट, खासकर भारत-पाकिस्तान संदर्भ में—

हमेशा सिर्फ खेल नहीं रहा।

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