Test : बीसीसीआई का बड़ा बदलाव—गुवाहाटी टेस्ट में बदले ब्रेक इतिहास में पहली बार

Atul Kumar
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Test – गुवाहाटी की ठंडी, जल्दी ढलती शामों ने आखिरकार 138 साल पुराने टेस्ट क्रिकेट के नियमों को भी झुका दिया।
आज, 22 नवंबर, से भारत–दक्षिण अफ्रीका टेस्ट में कुछ ऐसा होने जा रहा है जो टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ—
पहले सेशन के बाद टी ब्रेक होगा और दूसरे सेशन के बाद लंच ब्रेक।
यानी टेस्ट का सदियों पुराना “पहले लंच–फिर टी” वाला क्रम उलट दिया गया है।

यह बदलाव किसी नियम-संशोधन या आईसीसी के प्रयोग का नतीजा नहीं है, बल्कि पूर्वोत्तर भारत के मौसम और सूर्योदय–सूर्यास्त के समय से जुड़े व्यावहारिक कारणों के चलते किया गया है।

गुवाहाटी टेस्ट क्यों बना ऐतिहासिक?

बरसापारा स्टेडियम में शनिवार से शुरू हो रहे इस टेस्ट मैच के लिए बीसीसीआई ने मैच टाइमिंग और ब्रेक दोनों में बड़ा बदलाव किया है।
पूर्वोत्तर में सूरज जल्दी उगता है और जल्दी ढल जाता है—और टेस्ट मैचों में रोशनी का गिरना एक बड़ा जोखिम है।
अगर दोपहर बाद रोशनी कम हो जाती, तो मैच जल्दी रोकना पड़ सकता था।

इसलिए:

  • पहला ब्रेक: टी ब्रेक (पहले सेशन के बाद 11:00 बजे)
  • दूसरा ब्रेक: लंच ब्रेक (दूसरे सेशन के बाद 1:20 PM)

यह व्यवस्था टेस्ट इतिहास में कभी नहीं देखी गई थी।

मैच टाइमिंग भी बदली

गुवाहाटी टेस्ट में सब कुछ थोड़ा जल्दी होगा:

सेशनसमय
मैच शुरू9:00 AM
पहला सेशन9:00 – 11:00
टी ब्रेक11:00 – 11:20 (20 मिनट)
दूसरा सेशन11:20 – 1:20
लंच ब्रेक1:20 – 2:00 (40 मिनट)
तीसरा सेशन2:00 – 4:00

भारत में आमतौर पर टेस्ट मैच 9:30 बजे शुरू होता है, लेकिन गुवाहाटी के लिए उसे भी आगे खिसकाया गया है।

ब्रेक व्यवस्था क्यों पलटी?

तीन मुख्य वजहें:

  1. पूर्वोत्तर के राज्यों में जल्दी अंधेरा होने का प्राकृतिक कारण
  2. रोशनी कम होने की स्थिति में मैच का समय बर्बाद न हो
  3. प्लेइंग टाइम अधिकतम सुनिश्चित करना

यह बदलाव टेस्ट क्रिकेट की परंपरा को तोड़ता है, लेकिन परिस्थिति को देखते हुए पूरी तरह व्यावहारिक माना जा रहा है।

टेस्ट इतिहास में पहली बार

टेस्ट मैच शुरू हुए 1887 में—और तब से:

  • हमेशा लंच → टी ब्रेक होता आया
  • कभी भी टी → लंच का क्रम नहीं अपनाया गया
  • पिंक-बॉल टेस्ट में केवल “डिनर ब्रेक” का अंतर था
  • लेकिन बेसिक क्रम कभी नहीं बदला

गुवाहाटी टेस्ट इस लिहाज से क्रिकेट के इतिहास में एक माइलस्टोन बन गया है।

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