BCCI – चोट, आलोचना, संदेह… ये तीन शब्द पिछले साल हार्दिक पांड्या की जिंदगी का अनचाहा ट्रेलर रहे। लेकिन कटक की शाम जब उन्होंने 28 गेंदों में 59 रन उड़ाए और फिर गेंद हाथ में लेकर 16 रन देकर विकेट निकाला—तो लगा जैसे इंटरवल के बाद हीरो फिर से एंट्री मार गया।
बीसीसीआई टीवी पर जारी इंटरव्यू में हार्दिक ने बेहद खुलकर बताया कि चोट के बाद वापसी सिर्फ शरीर की नहीं, दिमाग की लड़ाई भी होती है—और शायद पिच पर जितने रन उन्होंने बनाए, उससे ज्यादा पॉइंट्स उन्होंने इस बातचीत में बटोर लिए।
चोट के बाद हार्दिक का नया अवतार—पावर + शांति + विश्वास
हार्दिक का एक वाक्य इंटरव्यू का असली सार था—
“मेरी सोच थी कि पहले से ज्यादा ‘दमदार और बेहतर’ लौटना है।”
T20 क्रिकेट में वापसी सिर्फ हिटिंग से नहीं होती; गुस्सा, डर, आत्म-संदेह… सबको दरवाज़े पर ही छोड़कर मैदान में उतरना पड़ता है। हार्दिक ने माना कि चोटें मानसिक रूप से सबसे कठिन होती हैं।
उन्होंने कहा:
“चोटें आपको मानसिक रूप से टेस्ट करती हैं, संदेह पैदा करती हैं। लेकिन मेरे करीबी लोगों ने मुझे संभाले रखा।”
भरोसा—यह उनका सबसे बड़ा शब्द था, और सबसे बड़ा हथियार भी।
“अगर आप खुद पर भरोसा नहीं करेंगे, कोई और क्यों करेगा?”
यह लाइन एक क्रिकेटर की नहीं, एक फाइटर की लगती है। हार्दिक का कहना था—
“मैंने खुद को मजबूत बनाया। मैंने खुद पर विश्वास रखा। अगर आप खुद पर भरोसा नहीं करेंगे, तो दूसरे कैसे करेंगे?”
ये सिर्फ आत्मविश्वास की बात नहीं—यह उस मानसिकता की ओर संकेत है जिसमें खिलाड़ी खुद को दूसरों की राय के पिंजरे से निकाल लेता है। क्रिकेट जैसे हाई-प्रेशर खेल में यह rare है।
हार्दिक की फिलॉसफी—लोग क्या सोचते हैं, वो उनका काम है
कई बार हार्दिक के भीतर की straight-forwardness गलत समझ ली जाती है।
लेकिन उनके मुताबिक:
“मैं ईमानदार और यथार्थवादी हूँ। मुझे घुमाकर बात करना पसंद नहीं। लोग मेरे बारे में क्या सोचते हैं, मैं उसकी परवाह नहीं करता।”
ये बयान हालिया महीनों में उन चर्चाओं को भी जवाब देता है जहाँ हार्दिक को कप्तानी, फ़ॉर्म और चोट के कारण आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था।
“अब मैं बस खेलना चाहता हूँ… हर पल का आनंद लेना चाहता हूँ”
यह हार्दिक की जिंदगी का नया अध्याय है—न flashy persona, न कप्तानी का बोझ। बस क्रिकेट, क्राउड और पर्फॉर्मेंस।
उन्होंने कहा:
“अब वो समय आ गया है जब हार्दिक पांड्या सिर्फ खेलना चाहता है। बड़ा और बेहतर बनना ही मेरा ध्येय है।”
यह ‘बड़ा और बेहतर’ सिर्फ खेल नहीं—मानसिक मजबूती, टीम में भूमिका और फिनिशर के रूप में भरोसा… ये सब इसमें शामिल है।
और फिर आया हार्दिक का रॉकस्टार मोमेंट
स्टेडियम में शोर, दर्शकों की चीखें, कैमरे का फोकस… हार्दिक ने बताया कि उनकी प्रेरणा क्या है।
उन्होंने कहा:
“आपको एक रॉकस्टार होना चाहिए। 10 मिनट परफॉर्म करो और भीड़ पागल हो जाए… यही मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा है।”
यह लाइन पूरी तरह से हार्दिक की personality को define करती है—परफॉर्मेंस-ड्रिवन, high-energy और crowd-connected।
वे ये भी कहते हैं:
“मुझे लगता है कि दर्शक मेरा इंतजार करते हैं—मेरी बैटिंग देखने के लिए।”
कहने को यह confidence है, पर असल में यह उस connection की बात है जो शायद भारत में सिर्फ कुछ खिलाड़ियों के हिस्से आता है।
कटक मैच—हार्दिक की वापसी की सबसे परफेक्ट स्क्रिप्ट
पहले T20 में भारत का स्कोर: 175/6
हार्दिक: 59(28)*
दक्षिण अफ्रीका: 74 ऑल आउट – T20I इतिहास का उनका सबसे कम स्कोर
हार्दिक की पारी सिर्फ रन नहीं थी—यह एक संदेश था:
I am back.
Stronger.
Sharper.
Simpler.
















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