WPL : अभिषेक नायर ने रिटायर्ड आउट विवाद पर तोड़ी चुप्पी

Atul Kumar
Published On:
WPL

WPL – पिछले दो दिन हरलीन देओल के करियर के सबसे अजीब, सबसे भारी और फिर सबसे सुकून भरे दिन रहे।
14 जनवरी को वह दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ 47 रन पर थीं, अर्धशतक बस कुछ शॉट दूर था—और तभी डगआउट से इशारा आया: रिटायर्ड आउट
15 जनवरी को वही हरलीन मुंबई इंडियंस के खिलाफ नाबाद अर्धशतक जड़कर यूपी वॉरियर्स को सीज़न की पहली जीत दिला रही थीं।

24–48 घंटे में कहानी पूरी पलट गई।
और अब, इस पूरे विवाद पर यूपी वॉरियर्स के हेड कोच अभिषेक नायर ने पहली बार खुलकर बात की है।

“हरलीन के लिए टीम हमेशा पहले रही है”

दिल्ली के खिलाफ रिटायर्ड आउट का फैसला जैसे ही सामने आया, सोशल मीडिया पर सवालों की बाढ़ आ गई। क्या यह खिलाड़ी के साथ नाइंसाफी थी? क्या मैनेजमेंट ने भरोसा तोड़ा?

इन्हीं सवालों के बीच अभिषेक नायर ने साफ शब्दों में टीम का स्टैंड रखा।

उन्होंने कहा,
“हरलीन के लिए हमेशा टीम पहले और खुद बाद में रही है। यह विश्वास हमारे ग्रुप में बहुत मजबूत है।”

नायर का फोकस सिर्फ उस एक फैसले पर नहीं था, बल्कि हरलीन की लंबी तस्वीर पर था—एक ऐसी बल्लेबाज़ जो सिर्फ टिकने वाली नहीं, बल्कि मैच बदलने वाली बने।

“मैं उसे टच और पावर—दोनों रोल में देखना चाहता हूं”

रिटायर्ड आउट के पीछे की सोच समझाते हुए नायर ने एक अहम बात कही, जो शायद इस पूरी बहस की चाबी है।

“मैंने हमेशा हरलीन को टच और पावर प्लेयर—दोनों के तौर पर देखने के लिए प्रोत्साहित किया है। मेरी सोच भारतीय खिलाड़ियों को अगले लेवल पर ले जाने की है।”

यानी यह फैसला किसी एक मैच के लिए नहीं था, बल्कि उस रोल के लिए था, जिसमें हरलीन आगे चलकर भारतीय क्रिकेट के लिए फिट हो सकें।

और आंकड़े उसी दिशा की तरफ इशारा कर रहे हैं।

हरलीन देओल इस सीज़न में:

  • हरमनप्रीत कौर के बाद अर्धशतक लगाने वाली दूसरी भारतीय बल्लेबाज़ बनीं
  • और वह भी दबाव वाले रन-चेज़ में

टीम कल्चर पर कोई समझौता नहीं

रिटायर्ड आउट के बाद सबसे बड़ा डर यह होता है कि ड्रेसिंग रूम का माहौल बदल जाएगा। लेकिन नायर ने साफ कहा—यूपी वॉरियर्स का कल्चर रिज़ल्ट पर नहीं टिकता।

“हमारी टीम का कल्चर नहीं बदलता, चाहे हम जीतें या हारें। कुछ मैच मुश्किल रहे हैं, लेकिन हमारे पास क्रांति गौड़ और फोएबे लिचफील्ड जैसे खिलाड़ी हैं, जो ड्रेसिंग रूम में एनर्जी बनाए रखते हैं।”

यही वजह है कि 24 घंटे के भीतर वही टीम, वही खिलाड़ी—पूरी तरह बदले हुए कॉन्फिडेंस के साथ मैदान पर उतरे।

हरलीन देओल: “मैंने इसे बस वैसे ही लिया”

मुंबई के खिलाफ जीत के बाद पोस्ट-मैच प्रेज़ेंटेशन में हरलीन देओल का अंदाज़ किसी भी तरह की शिकायत से कोसों दूर था।

उन्होंने कहा,
“मुझे अच्छा लग रहा है। यह टीम के लिए पहली जीत है और मैं बहुत खुश हूं।”

जब उनसे दिल्ली वाले मैच और रिटायर्ड आउट पर पूछा गया, तो जवाब और भी दिलचस्प था।

“कल भी मैं अच्छी बैटिंग कर रही थी। जैसा आपने आज देखा, क्लोई (ट्रायोन) कैसे पूरा सीन बदल सकती है। वह बड़े शॉट्स लगा सकती है। शायद कल वह हमारे फेवर में नहीं गया, बस यही हुआ।”

न कोई नाराज़गी।
न कोई कटाक्ष।
बस एक प्रोफेशनल का नजरिया।

“आज कुछ अलग नहीं था, बस मेरा दिन था”

मुंबई के खिलाफ नाबाद अर्धशतक में क्या बदला?

हरलीन ने इसे बेहद सादा शब्दों में समेट दिया।

“असल में कुछ अलग नहीं था। मुझे कुछ बाउंड्री वाली गेंदें मिलीं और मैंने उन्हें बाउंड्री में बदल दिया। कभी-कभी यह बस आपका दिन होता है—जहां आप हिट करने की सोचते हैं, गेंद वहीं आती है। आज मेरे लिए वैसा ही था।”

यही बल्लेबाज़ी की सबसे खूबसूरत सच्चाई है—आप तैयारी रोज़ करते हैं, लेकिन दिन आपका हो या न हो, यह हमेशा आपके हाथ में नहीं होता।

रिटायर्ड आउट से कॉन्फिडेंस कैसे बढ़ा?

सबसे दिलचस्प जवाब आख़िर में आया।

“सच कहूं तो कल की पारी से मुझे कॉन्फिडेंस मिला। पहले दो मैच मेरे फेवर में नहीं गए थे। लेकिन कल मैंने समझा कि मैं ओवरहिट करने की कोशिश कर रही थी। यह विकेट ऐसा नहीं है कि मैं सिर्फ पावर मारूं—मुझे टाइमिंग पर ध्यान देना होगा।”

यानी जिस पल को बाहर से लोग “झटका” मान रहे थे, वही पल हरलीन के लिए क्लैरिटी लेकर आया।

दो दिन, दो कहानियां

तारीखमुकाबलाप्रदर्शन
14 जनवरीबनाम DC47 (36), रिटायर्ड आउट
15 जनवरीबनाम MI64* (39), जीत
टॉस के बाद फाइनल टीम चाहिए तो, अभी जॉइन करे Cricketyatri का Telegram चैनल- Join Now




Follow Us On