Rana – भारतीय टीम का नया दौर सिर्फ रन बनाने या विकेट लेने तक सीमित नहीं है। यह दौर मल्टी-स्किल क्रिकेटरों का है। और अगर किसी को अब भी शक था, तो हर्षित राणा ने न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले वनडे में उसे दूर कर दिया। गेंद से दो बड़े विकेट, फिर बल्ले से दबाव में 29 रन—और उसके बाद एक खुलासा, जिसने टीम इंडिया की सोच को और साफ कर दिया।
मुख्य कोच गौतम गंभीर तेज गेंदबाज़ों को भी सिर्फ गेंद तक सीमित नहीं रखना चाहते। उनका फोकस साफ है—हर खिलाड़ी को मैच जिताने के एक से ज्यादा तरीके आने चाहिए।
“टीम मुझे ऑलराउंडर बनते देखना चाहती है”
मैच के बाद जब हर्षित राणा मीडिया के सामने आए, तो उन्होंने बिना घुमाए-फिराए बात रख दी।
“टीम मैनेजमेंट चाहता है कि मैं एक ऑलराउंडर के तौर पर खुद को तैयार करूं। मैं लगातार अपनी बल्लेबाज़ी पर काम कर रहा हूं। प्रैक्टिस सेशंस में उसी पर फोकस रहता है।”
यह बयान यूं ही नहीं आया।
राणा इस मैच में चोटिल वॉशिंगटन सुंदर से पहले बल्लेबाज़ी करने उतरे थे—और वहीं से तस्वीर साफ हो गई।
कोच गंभीर की सोच: ज्यादा ऑलराउंडर, ज्यादा कंट्रोल
गौतम गंभीर के कोच बनने के बाद एक पैटर्न साफ दिखता है।
टीम कॉम्बिनेशन में:
- ज्यादा ऑलराउंडर
- गहरी बल्लेबाज़ी
- और गेंदबाज़ जो रन भी बना सकें
हार्दिक पंड्या के वनडे के लिए उपलब्ध न होने के चलते पहले मैच में रवींद्र जडेजा और वॉशिंगटन सुंदर—दोनों को खिलाया गया। पिछले कुछ समय में टीम इंडिया लगातार ऐसे कॉम्बिनेशन के साथ उतर रही है, जहां 8 नंबर तक बल्लेबाज़ी आती हो।
यही वजह है कि गंभीर को आलोचनाएं भी झेलनी पड़ी हैं।
लेकिन हर्षित राणा का प्रदर्शन उनके पक्ष में जाता दिख रहा है।
नंबर 8 पर बल्लेबाज़ी की तैयारी
राणा ने खुद बताया कि उनसे क्या उम्मीद की जा रही है।
“मेरी टीम चाहती है कि मैं ऑलराउंडर के तौर पर आठवें नंबर पर बल्लेबाज़ी करूं। मुझे भरोसा है कि जरूरत पड़ने पर मैं 30–40 रन बना सकता हूं।”
यह आत्मविश्वास यूं ही नहीं आया।
राणा ने माना कि इस मैच में केएल राहुल ने उन्हें काफी सपोर्ट दिया।
“यह आत्मविश्वास का मामला था। केएल भाई ने मेरी मदद की।”
[Image: KL Rahul talking to Harshit Rana during the chase]
दबाव में साझेदारी, यहीं बदला मैच
301 रन के लक्ष्य का पीछा करते वक्त जब
विराट कोहली (93)
श्रेयस अय्यर (49)
और रवींद्र जडेजा (4)
लगातार आउट हुए, तब मैच एक बार फिर खुल गया था।
यहीं राणा ने राहुल के साथ मिलकर छठे विकेट के लिए 37 रन की साझेदारी की। यह पार्टनरशिप स्कोरबोर्ड से कहीं ज्यादा अहम थी—इसने भारत को दोबारा संतुलन दिया।
राणा ने खुद कहा,
“जब तक विराट भाई क्रीज पर थे, लग रहा था मैच जल्दी खत्म हो जाएगा। लेकिन क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है।”
[Image: Harshit Rana and KL Rahul running between the wickets]
गेंद से भी असर, सिर्फ बल्ला ही नहीं
राणा का योगदान सिर्फ बल्लेबाज़ी तक सीमित नहीं रहा।
उन्होंने:
- न्यूजीलैंड के दोनों सलामी बल्लेबाज़ों को आउट किया
- नई गेंद से दबाव बनाया
- और पावरप्ले में रन रोकने में मदद की
यह वही पैकेज है, जिसकी तलाश टीम मैनेजमेंट कर रहा है।
बुमराह की गैरमौजूदगी पर सीधा जवाब
जब राणा से पूछा गया कि जसप्रीत बुमराह की अनुपस्थिति में क्या नई गेंद से विकेट निकालने में दिक्कत हो रही है, तो उनका जवाब बेबाक था।
“मुझे नहीं पता आप कौन सा क्रिकेट देख रहे हैं। आज भले ही शुरुआती विकेट न मिले हों, लेकिन सिराज भाई ने बहुत अच्छी गेंदबाज़ी की।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि:
- नई गेंद से रन नहीं लुटाए गए
- पिच धीमी थी
- ज्यादा उछाल भी नहीं था
यानी हालात को देखते हुए गेंदबाज़ी पूरी तरह प्लान के मुताबिक थी।
गंभीर युग में तेज गेंदबाज़ों की नई भूमिका
गौतम गंभीर का मॉडल साफ है:
- सिर्फ स्पेशलिस्ट नहीं
- मल्टी-डायमेंशनल खिलाड़ी
आज का क्रिकेट 4 गेंदबाज़ + 7 बल्लेबाज़ से आगे निकल चुका है। अब जरूरत है:
- गेंदबाज़ जो बल्लेबाज़ी कर सकें
- और बल्लेबाज़ जो 1–2 ओवर डाल सकें















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