Smith : युवा कीवी अनुभवी भारतीय – कहां पलड़ा झुका

Atul Kumar
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Smith – भारत में टेस्ट क्रिकेट को लेकर जो सवाल पिछले कुछ महीनों से उठ रहे हैं, उन्हें अब बाहर से भी वही आवाज़ मिल रही है। इस बार बोलने वाले हैं न्यूज़ीलैंड के पूर्व विकेटकीपर और अब सशक्त कमेंटेटर इयान स्मिथ—और उनकी बातों में हैरानी भी है, चिंता भी, और एक साफ इशारा भी।

2024 के आखिर में भारत में न्यूजीलैंड की 3-0 की ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीत स्मिथ के लिए आज भी अविश्वसनीय है। 12 साल तक घर में अजेय रही भारतीय टीम का ऐसा ढहना सिर्फ नतीजा नहीं था—उसके पीछे, स्मिथ के मुताबिक, एक बड़ी वजह छुपी है: स्पिन के खिलाफ भारतीय बल्लेबाजों की घटती क्षमता।

ईमानदारी से कहूं तो मैं भी हैरान था

पीटीआई से बातचीत में स्मिथ ने बिना किसी लाग-लपेट के माना कि उन्होंने इस नतीजे की कल्पना नहीं की थी।

उनके शब्दों में,
“यह एक शानदार उपलब्धि है। ईमानदारी से कहूं तो यह मेरे लिए भी हैरानी की बात थी। मुझे नहीं लगा था कि वे भारत में ऐसा कर पाएंगे।”

यह बयान सिर्फ तारीफ नहीं है। यह उस भरोसे के टूटने की स्वीकारोक्ति है, जो दुनिया भर की टीमों को भारत में टेस्ट खेलने से पहले डराता रहा है।

एजाज और सैंटनर: वही स्पिन, लेकिन फर्क बड़ा

उस ऐतिहासिक सीरीज के हीरो रहे एजाज पटेल और मिचेल सैंटनर—दो खब्बू स्पिनर, जिन्होंने भारतीय बल्लेबाजी को लगातार उलझाया।

दिलचस्प बात यह है कि भारत में स्पिन हमेशा से चुनौती रही है। फर्क बस इतना है कि अब भारतीय बल्लेबाज ही स्पिन के खिलाफ ज्यादा असहज दिख रहे हैं।

स्मिथ कहते हैं,
“पहले जब हम यहां आते थे तो स्पिन हमें पूरी तरह उलझा देती थी। तब भी आपके पास बेहतरीन स्पिनर थे और आज भी हैं। फर्क यह है कि आज के खिलाड़ी स्पिन के खिलाफ ज्यादा आक्रामक रवैया अपनाते हैं।”

यह आक्रामकता जहां विदेशी बल्लेबाजों के लिए फायदेमंद साबित हुई, वहीं भारतीय बल्लेबाज उसी जाल में फंसते नजर आए।

युवा कीवी बल्लेबाजों ने सीनियर्स को पीछे छोड़ा

उस टेस्ट सीरीज में एक और बात चौंकाने वाली रही—
रचिन रवींद्र और विल यंग जैसे युवा बल्लेबाजों का प्रदर्शन।

अनुभव की कमी के बावजूद, इन दोनों ने भारतीय स्पिनरों को जिस आत्मविश्वास से खेला, उसने तस्वीर साफ कर दी।

बल्लेबाजसीरीज में प्रभाव
रचिन रवींद्रदबाव में रन, स्पिन के खिलाफ स्पष्ट योजना
विल यंगठोस डिफेंस, सही समय पर आक्रमण

स्मिथ के मुताबिक, यह सिर्फ टैलेंट नहीं, नजरिये का बदलाव है।

दक्षिण अफ्रीका की सीरीज ने खोल दी परतें

न्यूज़ीलैंड अकेली टीम नहीं रही जिसने यह कमजोरी पकड़ी।
हाल ही में दक्षिण अफ्रीका ने भारत को दो टेस्ट मैचों की सीरीज में क्लीन स्वीप किया।

उस सीरीज में ऑफ स्पिनर साइमन हार्मर ने भारतीय बल्लेबाजों की स्पिन के खिलाफ तकनीकी और मानसिक उलझन को पूरी तरह उजागर कर दिया।

स्मिथ मानते हैं कि पैटर्न अब साफ दिखने लगा है।

“ऐसा लगता है कि स्पिन के खिलाफ स्तर गिरा है। आंकड़े शायद कुछ और कहें, लेकिन आंखों से जो दिखता है, वह चिंता पैदा करता है।”

आत्मविश्वास या आत्म-संदेह?

सबसे दिलचस्प सवाल स्मिथ ने खुद उठाया—
क्या यह तकनीकी समस्या है, या मानसिक?

“यह कहना मुश्किल है कि क्या स्पिन के खिलाफ उनका आत्मविश्वास कम हुआ है या वे खुद पर शक करने लगे हैं। यह मुझे चौंकाता है, क्योंकि हमारे समय में ऐसा नहीं होता था।”

भारतीय क्रिकेट की ताकत हमेशा रही है—
घरेलू हालात में निश्चिंतता।

लेकिन पिछले कुछ वर्षों में, नतीजे कुछ और कहानी कह रहे हैं।

भारत के लिए खतरे की घंटी?

यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि भारत की स्पिन खेलने की परंपरा खत्म हो रही है।
टैलेंट की कोई कमी नहीं है।

लेकिन जब:

  • घरेलू टेस्ट सीरीज हारी जाए
  • स्पिनरों से बार-बार परेशानी दिखे
  • युवा विदेशी बल्लेबाज बेहतर नजर आएं

तो सवाल उठना लाज़मी है।

स्मिथ की दूसरी चिंता: टी20 लीग्स और कम उम्र

सिर्फ भारत ही नहीं, स्मिथ न्यूजीलैंड क्रिकेट को लेकर भी चिंतित हैं।
खासकर खिलाड़ियों के बहुत कम उम्र में फ्रेंचाइज़ी क्रिकेट की ओर मुड़ने को लेकर।

केन विलियमसन, ट्रेंट बोल्ट जैसे सीनियर खिलाड़ियों के राष्ट्रीय करार छोड़ने पर उन्हें आपत्ति नहीं।

“वे अपने करियर के अंतिम दौर में हैं। पैसा कमाइए, आपने इसका हक है।”

लेकिन परेशानी वहां शुरू होती है, जहां 20–25 साल के खिलाड़ी यही रास्ता चुनने लगें।

“फिन एलन जैसे खिलाड़ी जब इतनी कम उम्र में बाहर जाते हैं, तो यह चिंता का विषय है।”

न्यूजीलैंड की मजबूरी भी है

स्मिथ मानते हैं कि यह ट्रेंड रुकने वाला नहीं है—खासकर न्यूजीलैंड में।

  • देश में कोई बड़ी टी20 लीग नहीं
  • ‘सुपर स्मैश’ से सीमित कमाई
  • नई लीग शुरू करने पर विचार

जब विकल्प कम हों, तो खिलाड़ी बाहर जाएंगे ही।

बड़ी तस्वीर: बदलता टेस्ट क्रिकेट

इयान स्मिथ की बातें सिर्फ अतीत की यादें नहीं हैं।
वे मौजूदा टेस्ट क्रिकेट का एक्स-रे हैं।

भारत के लिए यह चेतावनी है—
और बाकी दुनिया के लिए मौका।

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