IND – गुवाहाटी की धूप में तीसरे दिन का खेल शुरू हुआ तो लगा कि भारत मैच में लौट आएगा। मगर कुछ ही सत्रों के भीतर हालात ऐसे बदले कि 68 गेंदों में हुआ बैटिंग कोलैप्स भारत को सीरीज हार के मुहाने पर खड़ा कर गया।
साउथ अफ्रीका ने पहले ही पारी में 489 रन बनाकर मैच पर पकड़ बना ली थी—और कुलदीप यादव की “रोड़ जैसी सपाट पिच” वाली टिप्पणी ने उम्मीद जगाई थी कि भारतीय बल्लेबाज़ भी बड़े स्कोर से जवाब देंगे। लेकिन जो हुआ, वह उससे उलट था।
भारत का 68 गेंदों का कोलैप्स—मैच यहीं हाथ से निकला
भारत पहली पारी में 201 रन पर ऑल आउट हो गया, जिससे साउथ अफ्रीका को 288 रन की विशाल बढ़त मिल गई।
गुवाहाटी की पिच पर ऐसा ढहाव शायद ही किसी ने सोचा था।
राहुल–जायसवाल ने सुबह शानदार बल्लेबाज़ी करते हुए पहले एक घंटे में SA को कोई मौका नहीं दिया था।
लेकिन 65 के स्कोर पर केएल राहुल, फिर 33वें ओवर में जायसवाल—और यहीं से भारतीय पारी की डोर खुलनी शुरू हुई।
इसके बाद विकेट ऐसे गिरे जैसे किसी ने एक कतार में खड़े डोमिनोज़ को छू दिया हो—
- 96/3 – साई सुदर्शन
- 102/4 – ध्रुव जुरेल
- 105/5 – ऋषभ पंत
- 119/6 – नीतीश रेड्डी
- 122/7 – रविंद्र जडेजा
इन 6 विकेटों के गिरने में सिर्फ 68 गेंदें लगीं।
और भारत ने इन गेंदों में सिर्फ 27 रन बनाए।
यही वह फेज़ था जिसने भारत को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया।
यान्सन–हार्मर–महाराज की तिकड़ी ने भारत को जकड़ लिया
मार्को यान्सन ने गति और बाउंस के मिश्रण से भारतीय मिडिल ऑर्डर को जैसे पढ़ लिया था।
जैसे-जैसे ओवर बढ़ते गए, गेंदबाज़ी और टाइट होती गई—और शॉट सिलेक्शन बिगड़ता गया।
सायमन हार्मर और केशव महाराज ने मिलकर भारत की उम्मीदों को लगभग खत्म कर दिया।
वॉशिंगटन सुंदर–कुलदीप की जुझारू साझेदारी—पर देर हो चुकी थी
वॉशिंगटन सुंदर ने 92 गेंदों पर 48 और कुलदीप यादव ने 134 गेंदों पर 19 रन बनाकर पारी को थोड़ा संभाला।
दोनों ने मिलकर SA के बॉलर्स को थकाया भी…
लेकिन जब बाकी बल्लेबाज़ सिर्फ 201 तक सीमित हों, तो ऐसी साझेदारियाँ मैच नहीं बचा पातीं।
SA की दूसरी पारी—भारत पर दबाव अब खतरनाक स्तर पर
तीसरे दिन का खेल खत्म होने तक दक्षिण अफ्रीका ने 26/0 बना लिए थे और बढ़त 314 रन हो चुकी है।
गुवाहाटी की पिच जैसे-जैसे पुरानी होगी, भारत की राह और मुश्किल होती जाएगी।
भारत के लिए इतिहास भी मुश्किल—387 रन का रिकॉर्ड
भारत में टेस्ट क्रिकेट का सबसे बड़ा सफल रनचेज़ सिर्फ 387 रन है।
और अब भारत को SA के खिलाफ यह टेस्ट जीतना है तो चमत्कार ही चाहिए—सिर्फ बल्लेबाज़ी नहीं, गेंदबाज़ी में भी दो स्तर ऊपर का प्रदर्शन।















