ODI : जायसवाल का पहला ODI टन – भारत के लिए तीनों फॉर्मेट में शतक लगाने वाले छठे बल्लेबाज़ बने

Atul Kumar
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ODI – ब्रिस्बेन की रात नहीं—विशाखापत्तनम की दोपहर वो गवाह बनी जब भारतीय टीम ने तीसरे और निर्णायक वनडे में दक्षिण अफ्रीका को 9 विकेट से कुचलकर सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली।

और सच कहें तो यह जीत स्कोरकार्ड जितनी आसान दिखती है, असल में उतनी ही एकतरफा थी। 271 का पीछा करते हुए भारत ने सिर्फ 39.5 ओवर में काम खत्म कर दिया—मानो गेंदबाज़ी की कड़ी मेहनत का इनाम बल्लेबाज़ों ने बड़ी सहजता से उठा लिया हो।

यशस्वी जायसवाल का पहला वनडे शतक, रोहित शर्मा की लयदार फॉर्म, और विराट कोहली का क्लासिक-कम्फर्टेबल 65*—तीनों ने मिलकर दक्षिण अफ्रीकी आक्रमण को फीका कर दिया।

271 का पीछा—जायसवाल–रोहित की शुरुआत ने मैच वहीं खत्म कर दिया

लक्ष्य भले 270 का था, लेकिन विकेट फ्लैट, आउटफील्ड तेज, और भारतीय ओपनर्स का मूड आक्रामक।
यशस्वी और रोहित ने शुरुआती ओवरों में गेंदबाज़ों को सेट होने का मौका ही नहीं दिया—धीरे शुरू होकर, फिर स्ट्राइक रोटेशन और चौकों से टेम्पो पकड़कर।

पहले विकेट के लिए 155 रन

रोहित शर्मा—73 गेंद पर 75
यशस्वी जायसवाल—नाबाद 116 (121 गेंद)

रोहित का यह लगातार दूसरा अर्धशतक था और सीरीज में उनकी रेंज साफ झलक रही थी—कभी शॉर्ट गेंद, कभी इनस्विंगर, सब सहजता से खेले। 75 पर आउट हुए, लेकिन उस समय तक SA की उम्मीदें लगभग खत्म।

यशस्वी जायसवाल—111 गेंद में शतक, और एक अनोखा क्लब

यशस्वी की पारी में ठहराव भी था और टाइमिंग का जादू भी।
12 चौके, 2 छक्के—लेकिन ग़ौर करने वाली बात यह है कि उन्होंने मैच को अंत तक पकड़कर रखा।
इस शतक के साथ वे:

तीनों फॉर्मेट में शतक लगाने वाले भारत के सिर्फ छठे बल्लेबाज़ बन गए।

21 साल की उम्र, और इतनी पक्की समझ—ये भारतीय क्रिकेट के लिए बहुत बड़ा संकेत है।

विराट कोहली—कभी हमला, कभी कंट्रोल, 65* की खूबसूरत रचना

रोहित आउट हुए तो दक्षिण अफ्रीका को लगा मैच थोड़ा धीमा पड़ेगा।
लेकिन विराट कोहली ने आते ही बिल्कुल अलग स्तर का नियंत्रण दिखाया।

45 गेंद में 65*,
6 चौके, 3 छक्के—
मानो वे नेट्स में प्रैक्टिस खेल रहे हों, मैच नहीं।

भारत ने 39.5 ओवर में 271/1 बनाकर रनों का पीछा मानो किसी प्रशिक्षण सत्र जैसा आसान कर दिया।

दक्षिण अफ्रीका—डिकॉक ने उम्मीद जगाई, कुलदीप–कृष्णा ने बुझाई

टॉस दक्षिण अफ्रीका के पक्ष में नहीं था, लेकिन उनकी शुरुआत भी बिल्कुल गलत दिशा में गई। रयान रिकलटन पहले ओवर में बिना खाता खोले चलते बने—अर्शदीप की तंग लाइन से परेशान होकर राहुल को कैच दे बैठे।

इसके बाद बावुमा (48) और डिकॉक (106) ने टीम को पटरी पर लाया।
दूसरे विकेट के लिए 113 रन—और भारत थोड़ी देर के लिए बैकफुट पर भी गया।

लेकिन 29वें ओवर में प्रसिद्ध कृष्णा का ‘टर्निंग पॉइंट’

  • मैथ्यू ब्रीट्ज़के—LBW
  • एडन मारक्रम—एक रन पर आउट
  • और कुछ देर बाद डिकॉक भी बोल्ड

कृष्णा ने दक्षिण अफ्रीका को वहीं से नीचे की ढलान पर धकेल दिया।

क्विंटन डिकॉक का शतक बेहद शानदार था—8 चौके, 6 छक्के, और भारत के खिलाफ उनका सातवां शतक।
इसके साथ उन्होंने:

  • सनथ जयसूर्या (भारत के खिलाफ 7 शतक) की बराबरी
  • भारत में विदेशी खिलाड़ी के तौर पर एबी डिविलियर्स के सर्वाधिक शतकों की बराबरी भी कर ली।

कुलदीप का मैजिक—39वां ओवर बना आफत का ओवर

दक्षिण अफ्रीका की पारी टूटनी शुरू हुई, और कुलदीप यादव ने वहीं से काम संभाल लिया:

— ब्रेविस (29)
— मार्को यानसन (17)
— कॉर्बिन बोश (9)
— लुंगी एनगिडी (1)

कुलदीप का स्पेल—10 ओवर, 41 रन, 4 विकेट—मिडिल ओवर्स पर भारत का पूरा कंट्रोल दिखाता है।

दक्षिण अफ्रीका की पारी—संक्षेप में

बल्लेबाज़रन
डिकॉक106
बावुमा48
ब्रीट्ज़के24
बाकीसंघर्ष

भारत की गेंदबाज़ी

गेंदबाज़विकेट
प्रसिद्ध कृष्णा4
कुलदीप यादव4
अर्शदीप सिंह1
रवींद्र जडेजा1

SA 270 पर ऑल आउट, और भारतीय बल्लेबाज़ों ने इसे लगभग टी20 जैसी सहजता से पार कर लिया।

क्यों यह जीत इतनी महत्वपूर्ण है?

  1. सीरीज 2-1—डिकॉक की शानदार फॉर्म और बावुमा की वापसी के बावजूद भारत ने दबदबा बनाए रखा।
  2. यशस्वी का शतक—भारत को भविष्य का टॉप-ऑर्डर तैयार मिल गया है।
  3. रोहित–कोहली की फॉर्म—टी20 से ब्रेक के बाद भी अनुभव अपनी जगह खड़ा है।
  4. गेंदबाज़ी—स्पिन और पेस दोनों के हाथों 4-4 विकेट मिलना टीम संतुलन की गवाही देता है।

भारत ने इस सीरीज में अपनी डेप्थ, कंट्रोल, और संयम तीनों दिखाए—और सबसे अहम, जीत की आदत बरकरार रखी।

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